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CEO जगदीशन के नेतृत्व में HDFC Bank की स्थिर शुरुआत, दिलचस्प होगा मर्जर के बाद का दूसरा सफर

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HDFC Bank सबसे ज्यादा क्रेडिट कार्ड जारी करने वाला बैंक था और अभी भी शीर्ष पर बना हुआ है। क्रेडिट कार्ड जारी करने पर प्रतिबंध बैंक के लिए बड़ा झटका था।

Last Updated- October 29, 2023 | 11:20 PM IST
HDFC Bank

देश के निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक एचडीएफसी बैंक के एमडी और सीईओ शशिधर जगदीशन ने हाल में अपना पहला कार्यकाल पूरा किया है। अक्टूबर 2020 से अक्टूबर 2023 के बीच उनकी यात्रा उतार-चढ़ाव से भरी हुई रही। वहीं 27 अक्टूबर से शुरू हुई दूसरी यात्रा ज्यादा दिलचस्प हो सकती है, क्योंकि अब एचडीएफसी के विलय का असर होगा, जिसका 1 जुलाई से एकीकरण हुआ है व बैंक अब वृद्धि के अगले चरण में पहुंच रहा है।

आदित्य पुरी से 27 अक्टूबर, 2020 को कार्यभार ग्रहण करने के बाद ही भारतीय रिजर्व बैंक ने एचडीएफसी बैंक को ग्राहकों को नए क्रेडिट कार्ड देने और डिजिटल 2.0 कार्यक्रम के तहत नए उत्पाद पेश करने से रोक दिया, क्योंकि बैंक के मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग प्लेटफॉर्मों पर बार बार गतिरोध आ रहा था।

एचडीएफसी बैंक सबसे ज्यादा क्रेडिट कार्ड जारी करने वाला बैंक था और अभी भी शीर्ष पर बना हुआ है। क्रेडिट कार्ड जारी करने पर प्रतिबंध बैंक के लिए बड़ा झटका था। जगदीशन के नेतृत्व में इस चुनौती पर एचडीएफसी बैंक ने युद्ध स्तर पर काम किया और खामियां दूर की गईं। उसके बाद अगस्त 2021 में क्रेडिट कार्ड जारी करने को लेकर प्रतिबंध हटा और उसके बाद मार्च 2022 में रिजर्व बैंक ने डिजिटल 2.0 पर प्रतिबंध भी खत्म कर दिया।

महामारी के दौरान एचडीएफसी बैंक ने नए सिरे से रणनीति बनाई और खुदरा और थोक ऋण की हिस्सेदारी का आंकड़ा बदल दिया क्योंकि महामारी के दौरान थोक ऋण पर जोखिम ज्यादा था। अब एचडीएफसी के विलय के बाद महामारी के पहले वाला अनुपात बहाल कर दिया गया है।

जगदीशन के नेतृत्व में पिछले 3 साल में एचडीएफसी बैंक की बैलेंस शीट दोगुने से ज्यादा हो गई। लोन बुक का आकार 127 प्रतिशत , जमा 77 प्रतिशत बढ़ा और करीब 40 लाख क्रेडिट कार्ड जोड़े गए।

इसके बाद अप्रैल 2022 में एचडीएफसी बैंक और एचडीएफसी के बड़े विलय की घोषणा की गई। यह विलय 1 जुलाई, 2023 से प्रभाव में आया।

जगदीशन का मानना है कि यह विलय रिकॉर्ड वक्त में पूरा किया गया था, जिससे एचडीएफसी बैंक की कार्ययोजना लागू करने की क्षमता का पता चलता है। यह विलय आसान नहीं था और उम्मीद की जा रही थी कि इसका वित्त पर असर पड़ेगा।

एचडीएफसी बैंक शुद्ध ब्याज से लाभ (एनआईएम) और संपत्ति की गुणवत्ता को लेकर हमेशा सचेत रहा है। एचडीएफसी बैंक ने एनआईएम 4 प्रतिशत से नीचे कभी नहीं होने दिया और जब पिछले दशक के दूसरी आधी अवधि के दौरान एनपीए बढ़ा और मार्च 2018 में जब बैंकिंग क्षेत्र का सकल एनपीए बढ़कर 11.5 प्रतिशत पर पहुंच गया था, तब भी बैंक की संपत्ति की गुणवत्ता अपनी श्रेणी में सबसे बेहतर बनी रही।

विलय एचडीएफसी के कुछ आंकड़ों के लिए चुनौती थी, जिसे लेकर उसे गर्व था। बैंक द्वारा दिए गए कर्ज के प्रतिशत के रूप में सकल एनपीए 30 सितंबर 2023 को बढ़कर 1.34 प्रतिशत पर पहुंच गया, जो 30 जून को 1.17 प्रतिशत था। विलय के दिन 1 जुलाई को यह अनुपात 1.41 प्रतिशत था, जो बाद में कम हो गया।

बैंक का जून सितंबर के दौरान ब्याज से शुद्ध मुनाफा घटकर 3.4 प्रतिशत रह गया। यह एचडीएफसी के फंड की ज्यादा लागत की वजह से हुआ। फंड की लागत में अंतर करीब 250 बीपीएस था। एचडीएफसी की करीब 5 लाख करोड़ रुपये की उधारी का विलय बैंक के साथ कर दी गई।

जगदीशन ने साफ किया कि मुनाफे के सूचकांक के रूप में संपत्तियों पर रिटर्न को भी लिया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि कंपनी ने संपत्तियों पर मुनाफा (आरओए) करीब 2 प्रतिशत बरकरार रखा है और आरओई 16.2 प्रतिशत रहा है।’

ब्रोकिंग फर्म मोतीलाल ओसवाल ने कहा, ‘एचडीएफसीबी ने बेहतर शुरुआत की है और क्षमता बनाई है। कारोबार में वृद्धि की गति बनाए रखने की संभावना है। ऑपरेटिंग लीवरेज में सुधार के साथ मुनाफे की धीरे धीरे भरपाई हो जाएगी। साथ ही मुनाफे का अनुपात भी सुधरेगा।’

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First Published - October 29, 2023 | 10:21 PM IST

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