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ब्याज से आय घटने से दूसरी तिमाही में कम बढ़ा बैंकों का मुनाफा

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घरेलू रुपये में सावधि जमा पर भारित औसत ब्याज दर 22 आधार अंक घटकर सितंबर 2025 में 6.82 प्रतिशत रह गई, जो एक साल पहले की समान अवधि सितंबर 2024 में 7.04 प्रतिशत थी।

Last Updated- November 05, 2025 | 10:53 PM IST
Bank

ब्याज से होने वाली आमदनी पर दबाव के कारण वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में बैंकों का शुद्ध लाभ 96,506 करोड़ रुपये रहा है, जो सालाना आधार पर 4.2 प्रतिशत अधिक है। बीएस रिसर्च ब्यूरो द्वारा सूचीबद्ध 30 वाणिज्यिक बैंकों के संकलित आंकड़ों के अनुसार जून 2025 तिमाही (वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही) में 91,727 करोड़ रुपये शुद्ध लाभ हुआ था। इस तरह से तिमाही आधार पर लाभ में 5.21 प्रतिशत वृद्धि हुई है। बैंकरों ने कहा कि यील्ड की सख्ती के कारण ट्रेजरी से होने वाली आमदनी से मिला समर्थन सीमित रह गया, जो गैर ब्याज आय का एक हिस्सा है।

ब्याज से आय घटी

ब्याज से शुद्ध आमदनी (एनआईआई) में सालाना आधार पर केवल 2.46 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 2.1 लाख करोड़ रुपये रही, जबकि जून 2025 तिमाही (वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही) के 2.07 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले तिमाही आधार पर 1.47 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

बैंकरों ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत रीपो रेट में 100 आधार अंकों की कटौती के बाद बैंकों ने ब्याज दरें कम कर दी हैं। हालांकि, सितंबर 2025 को समाप्त 12 महीनों में जमा (22 आधार अंक) के पुनर्मूल्यांकन की तुलना में ऋणों (62 आधार अंक) पर नीतिगत दर में कटौती का असर तेज रहा है।

गैर खाद्य ऋण की वृद्धि दर सितंबर 2025 में घटकर 10.2 प्रतिशत रह गई, जो एक साल पहले की समान अवधि में 13 प्रतिशत ती। इसका भी असर ऋण से होने वाले राजस्व आय पर पड़ा है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों से पता चलता है कि रुपये में दिए गए बकाया ऋण पर भारित औसत उधारी दर (डब्ल्यूएएलआर) 62 आधार अंक घटकर सितंबर 2025 में 9.26 प्रतिशत रह गई है, जो एक साल पहले 9.88 प्रतिशत थी।

घरेलू रुपये में सावधि जमा पर भारित औसत ब्याज दर 22 आधार अंक घटकर सितंबर 2025 में 6.82 प्रतिशत रह गई, जो एक साल पहले की समान अवधि सितंबर 2024 में 7.04 प्रतिशत थी।

केयरएज रेटिंग्स ने अपनी समीक्षा में कहा कि वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में में ब्याज से शुद्ध मार्जिन (एनआईएम) में 21 आधार अंकों की गिरावट आई, क्योंकि जमाकर्ताओं को ब्याज दर लाभ के हस्तांतरण की गति ऋण यील्ड के पुनर्मूल्यांकन से अधिक थी। निजी बैंकों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने क्रमशः 17 आधार अंक और 27 आधार अंक की सालाना गिरावट दर्ज की। घरेलू ब्रोकरेज मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज ने अपनी दूसरी तिमाही की समीक्षा में कहा कि अधिकांश बैंकों का मार्जिन उम्मीदों से अधिक था, जो धन की लागत में तेजी से गिरावट की वजह से हुआ। कई बैंकों ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में कटौती और बढ़ती वृद्धि की गति के कारण एनआईएम में और सुधार की उम्मीद जताई।

ब्याज के अलावा आय

ब्याज के अलावा अन्य स्रोतों से आमदनी में शुल्क, कमीशन, ट्रेजरी आय और वसूली शामिल हैं। वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में यह सालाना आधार पर 9.42 प्रतिशत 92,752 करोड़ रुपये हो गई। हालांकि जून 2025 तिमाही में 1.02 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले यह तिमाही आधार पर 9.17 प्रतिशत घट गई। केयरएज ने कहा कि बॉन्ड यील्ड बढ़ने से ट्रेजरी से होने वाली आमदनी में गिरावट आई और इससे मार्क टु मार्केट आय सीमित रह गई। हालांकि संपत्ति की गुणवत्ता बेहतर बनी हुई है।

बेहतर है संपत्ति की गुणवत्ता

फंसे कर्ज में गिरावट होने के साथ वाणिज्यिक बैंकों क संपत्ति की गुणवत्ता बेहतर बनी हुई है। कैपिटललाइन के आंकड़ों के अनुसार सकल गैर निष्पादित संपत्ति (एनपीए) सितंबर 2025 में घटकर 3.86 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले 4.48 लाख करोड़ रुपयये और जून 2025 में 4.16 लाख करोड़ रुपये थी।

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First Published - November 5, 2025 | 10:13 PM IST

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