facebookmetapixel
Advertisement
छात्रों के विरोध के आगे झुकी सरकार! कैसे PM मोदी के 12 साल के कार्यकाल में इस्तीफा देने वाले दूसरे केंद्रीय मंत्री बने प्रधानपश्चिम एशिया संकट व तेल की बढ़ती कीमतों के बीच अगले हफ्ते कैसा रहेगा शेयर बाजार और कमोडिटी मार्केट का हाल?नीट पेपर लीक, परीक्षा रद्द, आंदोलन और अब शिक्षा मंत्री का इस्तीफा…..3 मई से लेकर अब तक क्या-क्या हुआ?शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, खुद अपने पोस्ट में लेटर जारी करके दी जानकारीफ्लैट खरीदने के बाद पुराने मेंटेनेंस बकाया का आ गया बिल? जानिए क्या कहता है कानून और क्या करें नए खरीदार360% का मोटा डिविडेंड! IT सेक्टर की दिग्गज कंपनी का निवेशकों को तोहफा, रिकॉर्ड डेट फिक्सक्या ईरान पर सबसे बड़े हमले की तैयारी में अमेरिका? ट्रंप बोले: हम ‘लॉक्ड एंड लोडेड’, पर बातचीत भी जारी‘उदारीकण के बाद अहसास हुआ कि हमें इनोवेशन करना होगा, न कि दिल्ली में इंतजार’, नारायण मूर्ति ने बयां की 1991 से पहले की दुश्वारियां1991 से अब तक का सफर: अविश्वास से निकलकर भरोसे पर आधारित आर्थिक नीति बनाने की जरूरत‘बंगाल को मिली तबाही और निराशा की विरासत’, बोले स्वप्न दासगुप्ता: निवेश लाने के लिए करेंगे अतिरिक्त प्रयास

बदलेंगे बैंक स्वामित्व के नियम! विदेशी निवेशकों के लिए खुलेंगे नए दरवाजे

Advertisement

रिजर्व बैंक ने पिछले महीने अपने नियमों में ढील देकर जापान की सूमीतोमो मित्सुई बैंकिंग कॉरपोरेशन को येस बैंक में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की अनुमति दे दी थी।

Last Updated- June 03, 2025 | 10:46 PM IST
rbi dividend 2025
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) भविष्य में  नियमों में संभावित बदलाव के संकेत दे रहा है, जिससे विदेशियों को भारत के बैंकों में अधिक हिस्सेदारी मिल सकेगी। विदेशी संस्थाओं की अधिग्रहण के प्रति उत्सुकता तथा तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की अधिक दीर्घकालिक पूंजी की आवश्यकता के कारण इस पर विचार हो रहा है।

रिजर्व बैंक ने पिछले महीने अपने नियमों में ढील देकर जापान की सूमीतोमो मित्सुई बैंकिंग कॉरपोरेशन को येस बैंक में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की अनुमति दे दी थी। वहीं दो विदेशी संस्थाएं आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी के लिए होड़ में हैं। इसकी वजह से विदेशी स्वामित्व नियमों को आसान बनाने का दबाव बना है। भारत में यह नियम किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था की तुलना में सख्त है।

रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पिछले सप्ताह टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा था कि केंद्रीय बैंक व्यापक समीक्षा के तहत बैंकों के शेयरहोल्डिंग और लाइसेंसिंग नियमों की जांच कर रहा है।  

इस मामले से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि रिजर्व बैंक नियमन के दायरे में आने वाली वित्तीय संस्थाओं को बड़ी हिस्सेदारी रखने की अनुमति देने के लिए अधिक खुला होगा, जिसमें अलग अलग मालमों के आधार पर मंजूरी मिलेगी तथा कुछ नियमों में बदलाव किया जाएगा, जिससे विदेशी अधिग्रहण के प्रति उत्साह की कमी को दूर किया जा सके।

विश्लेषकों का कहना है कि विदेशी बैंक विश्व की सबसे तेज बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश भारत के साथ सौदे करने को इच्छुक हैं। खासकर इस समय भारत द्वारा किए जा रहे व्यापार समझौतों को देखते हुए यह उत्साह और बढ़ा है। इन समझौतों की वजह से एशिया के अन्य देशों और   पश्चिम एशिया में वैश्विक कर्जदाताओं के लिए भारत में नए अवसर खुल सकते हैं।

इंडियन बैंक एसोसिएशन के डिप्टी चेयरमैन माधव नायर ने कहा, ‘यह दिलचस्पी भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि और बाजार तक पहुंच बनाने से प्रेरित है।’ भारतीय नियामकों को चिंता है कि भारत बैंकिंग पूंजी जुटाने में अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से पीछे है, जो तेज आर्थिक विकास के लिए महत्त्वपूर्ण होगी।  मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस में एसोसिएट मैनेजिंग डायरेक्टर अलका अंबरासु ने कहा कि भारत को मध्यम अवधि के हिसाब से अपनी बैंकिंग व्यवस्था के लिए बहुत अधिक पूंजी की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा, ‘यह एक अच्छा तर्क हो सकता है कि इसी वजह से नियामक अंतरराष्ट्रीय कारोबारियों को बैंकिंग व्यवस्था में लाने पर विचार कर रहा है।’

Advertisement
First Published - June 3, 2025 | 10:13 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement