facebookmetapixel
Advertisement
रुपये में पांच दिन से जारी भारी गिरावट थमी, डॉलर के मुकाबले रिकवरी में क्रूड और RBI का बड़ा हाथनीट पर्चा लीक को PM मोदी ने बताया ‘घोर पाप’, राहुल गांधी का प्रधानमंत्री आवास के सामने प्रदर्शनखाड़ी युद्ध के तनाव से गहराया विमानन संकट, पायलट एसोसिएशन ने UAE की उड़ानें रोकने की उठाई मांगबांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से प्रशांत किशोर की पहली अग्निपरीक्षा, जन सुराज पार्टी के लिए दांव पर लगी साखभारत के उर्वरक निर्यात को मिली रफ्तार, 3 साल में निर्यात 52% बढ़ाजुलाई में फिर बढ़ा विदेशी निवेशकों का भरोसा, FPI ने चुनिंदा सेक्टरों में की ताबड़तोड़ खरीदारीपीएलआई योजना ने बदली विनिर्माण की तस्वीर, ₹2.4 लाख करोड़ का आया निवेश; 14.5 लाख को मिली नौकरियांसरकार ने कहा: बिना एथेनॉल वाले पेट्रोल पर वापस जाने का कोई प्रस्ताव नहीं, पंपों पर जारी रहेगी सप्लाईभारतीय रिजर्व बैंक ने स्वैप योजना से जुटाए 21 अरब डॉलर, शुरुआती हफ्तों में ही दर्ज हुई रिकॉर्ड आवकरिकॉर्ड वाहन बिक्री से बजाज ऑटो का मुनाफा 46% बढ़ा, राजस्व 65% उछला

थोक महंगाई 21 महीने के नीचे

Advertisement
Last Updated- December 14, 2022 | 11:24 PM IST
FMCG GST rate Cut

नवंबर महीने में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित महंगाई दर तेजी से घटकर 21 माह के निचले स्तर पर पहुंच गई। ज्यादा आधार और खाद्य, ईंधन और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों का दबाव कम होने के कारण थोक महंगाई दर नवंबर में 5.85 प्रतिशत पर है।

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक खाद्य महंगाई भी नवंबर महीने में 20 माह के निचले स्तर 2.17 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो अक्टूबर महीने में 6.48 प्रतिशत थी। फलों व सब्जियों के दाम घटने के साथ प्रोटीन वाले आयटम जैसे अंडा, मांस और मछली की कीमत कम होने से महंगाई घटी है।
बहरहाल मोटे अनाज गेहूं, धान, आलू, प्याज और दूध उत्पादों के दाम बढ़े हैं। ईंधन की महंगाई (17.35 प्रतिशत) और विनिर्मित वस्तुओं (3.59 प्रतिशत) की कीमत भी इस माह के दौरान कम हुई है।

चालू वित्त वर्ष में यह दूसरा मौका है, जब फैक्टरी-गेट महंगाई दर एक अंक में दर्ज की गई है। खासकर यह जिंसों के वैश्विक दाम में कमी और आधार कम रहने के कारण हुआ है। प्रमुख महंगाई दर में गैर खाद्य और गैर ईंधन की कीमत भी लगातार सातवें महीने घटकर नवंबर में 3.5 प्रतिशत हो गई है, जो अक्टूबर में 4.7 प्रतिशत थी। विनिर्मित वस्तुओं की महंगाई दर में कमी के कारण ऐसा हुआ है। केयर रेटिंग्स में मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा कि थोक महंगाई नवंबर में तेजी से गिरी है, यह उपभोक्ता महंगाई (सीपीआई) की तरह ही है और डब्ल्यूपीआई और सीपीआई महंगाई दर के बीच अंतर भी कम हो रहा है, जो एक साल पहले 10 प्रतिशत के उच्च स्तर पर था।

उन्होंने कहा, ‘डब्ल्यूपीआई और सीपीआई महंगाई दर में नवंबर महीने में गिरावट की एक वजह मौसमी है। बहरहाल इससे अर्थव्यवस्था को राहत मिली है। कुल मिलाकर जिंसों के वैश्विक दाम में कमी भी महंगाई को रोक रही है।’
अगर फार्मास्यूटिकल्स, तंबाकू और चमड़े के उत्पादों को छोड़ दें तो अन्य विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी सुस्त रही है। कीमत वृद्धि में सबसे तेज गिरावट मूल धातुओं और सब्जियों के साथ एनिमल ऑयल और बसा में आई है। इसी तरह से थोक महंगाई दर में रसोई गैस, हाई स्पीड डीजल और पेट्रोल की कीमत तेजी से गिरी है और इसमें क्रमशः 13.40 प्रतिशत, 42.10 प्रतिशत और 14.11 प्रतिशत की कमी आई है।

यह भी पढ़े: दायरे में रहेगा राजकोषीय घाटा

बैंक ऑफ बड़ौदा में मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि गेहूं की कीमत में आने वाले महीनों में कुछ उतार चढ़ाव की संभावना है क्योंकि रशियन फेडरेशन एक बार फिर ब्लैक सी ग्रेन इनीशिएटिव में शामिल हो गया है, लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि आगे चलकर थोक महंगाई दर और कम होगी। उन्होंने कहा, ‘बहरहाल थोक महंगाई रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के हिसाब से बहुत अहम नहीं है। रिजर्व बैंक खुदरा महंगाई पर नजर रखता है, जो दिसंबर में 6 प्रतिशत से ऊपर रहने की संभावना है।’ भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी मौद्रिक नीति समिति को खुदरा महंगाई दर घटाने का लक्ष्य सौंपा है, थोक महंगाई दर घटाने का नहीं। लेकिन यह एक दूसरे पर असर डालते हैं।

Advertisement
First Published - December 14, 2022 | 11:22 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement