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RBI गवर्नर की बड़ी बात: मौद्रिक नीति का असर तेजी से दिख रहा, पर आगे सब आंकड़ों पर निर्भर

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मौद्रिक नीति का असर तेजी से दिख रहा है, लेकिन आगे की दरों का फैसला पूरी तरह आंकड़ों, महंगाई और वृद्धि के रुझानों पर निर्भर करेगा।

Last Updated- June 06, 2025 | 10:20 PM IST
RBI Governor Sanjay Malhotra
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा | फाइल फोटो

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद मीडिया के साथ बातचीत के दौरान कई मुद्दों पर जवाब दिए। उन्होंने कहा कि पिछले रुझानों को देखें तो मौद्रिक नीति का असर बहुत तेजी से हुआ है। मुद्रा बाजारों में जो हमने किया है उससे भी अधिक असर हुआ है। हालांकि उन्होंने कहा कि यह आकलन मुश्किल होगा कि मौद्रिक नीति से ऋण की दरों और वास्तविक अर्थव्यवस्था पर इसका असर कैसा रहेगा। संपादित अंश:

इस चक्र में आप दरों को कहां टिकता देख रहे हैं?

हमने रुख को उदार से तटस्थ कर दिया है।  साथ ही इसमें उल्लेख किया गया है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए वास्तव में मौद्रिक नीति को लेकर अब बहुत सीमित गुंजाइश है। आप मौजूदा हालात के बारे से जानते हैं, वृद्धि दर करीब 6.5 प्रतिशत है। इस वर्ष के लिए हम महंगाई दर 3.7 प्रतिशत और अगले वर्ष 4 प्रतिशत से ऊपर या करीब 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगा रहे हैं। मौजूदा हालात को देखते हुए एमपीसी के लिए बहुत कम गुंजाइश बची है। हमने अब रुख  तटस्थ कर दिया है।  समिति का यह भी कहना है कि आने वाले उन आंकड़ों और आधारों पर खासकर अनिश्चितताओं को देखते हुए लगातार नजर रखी जाएगी।  हम किस तरह से आगे बढ़ेंगे, यह मुख्य रूप से आंकड़ों पर निर्भर होगा।

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रुख अब तटस्थ कर दिया गया है। क्या लंबे समय का विराम होगा?

यह अब आंकड़ों पर निर्भर करेगा। तटस्थ का यही मतलब है। मैंने इसे पहले एमपीसी के ब्योरे में साफ किया था कि तटस्थ का मतलब है कि यह किसी भी दिशा में जा सकता है। यह इस पर निर्भर होगा कि आंकड़े कैसे आते हैं।  अगर वृद्धि कमजोर है, तो इसका मतलब है कि यह नीचे जाएगी। अगर वृद्धि अच्छी है, महंगाई बढ़ रही है, तो इसका मतलब है कि रीपो रेट बढ़ सकती है। इसलिए यह इस बात पर निर्भर करेगा कि महंगाई और वृद्धि के आंकड़े कैसे आते हैं।

क्या रुख पर मतदान हुआ था?

रुख पर मतदान को लेकर हमने पहले ही उल्लेख किया है कि कानून में मतदान अनिवार्य नहीं है। इस पर चर्चा हुई।  निश्चित रूप से हमें संकेत देने, अनुमना देने की जरूरत थी।  यह अनुमना है, जो हमें बाजार के प्रतिभागियों को देना होता है। इसलिए इस पर चर्चा हुई और समिति के सभी 6 सदस्यों का विचार था कि हमें तटस्थ रुख रखना चाहिए। इसलिए कोई मतदान नहीं हुआ। समिति के सभी सदस्यों का विचार यह है कि आगे चलकर रुख बदलकर उदार से तटस्थ किया जाना चाहिए।

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क्या नीति के अब तक हुए असर से संतुष्ट हैं?

पिछले रुझानों को देखें तो मौद्रिक नीति का असर बहुत तेजी से हुआ है। मुद्रा बाजारों में आप बड़ा असर देख सकते हैं। जो हमने किया है उससे भी अधिक असर हुआ है। खासकर कम अवधि के हिसाब से मुद्रा बाजारों में 50 आधार अंक की तुलना  में भी अधिक असर दिख रहा है।  ऋण पर भी शुरुआती संकेत दिख रहे हैं। ज्यादातर बैंकों ने थोक और खुदरा दोनों जमा दरों में करीब 40 आधार अंक की कमी की है। औसतन करीब 27 आधार अंक कमी हुई है। ऋण के हिसाब से देखें तो बचे हुए ऋण पर 17 आधार अंक कमी आई है। नए ऋण के हिसाब से देखें तो असर थोड़ा धीमा है।

हमारे आंकड़ों के मुताबिक यह करीब 6 आधार अंक है। इस तरह से यह सुस्त है, लेकिन इससे पहले के वक्त की तुलना में बहुत तेज है। आम तौर पर इसमें 6 से 9 महीने लगते हैं। पहली नीतिगत कटौती से केवल 4 महीने हुए हैं।  इसलिए 25 आधार अंक की पहली नीतिगत कटौती के मुकाबले जमा में 27 आधार अंक और ऋण में 17 आधार अंक और नए ऋण के लिए 6 आधार अंक की कटौती हुई है। मुझे लगता है कि यह एक बहुत अच्छा ट्रांसमिशन है। लेकिन हमें इसे और तेजी से करने की जरूरत है, इसलिए इस बार हमने कुछ कार्रवाई पहले ही कर ली है।

रीपो रेट में कुल 100 आधार अंक की कटौती से आप वृद्धि में कितनी तेजी की उम्मीद कर रहे हैं? क्या वित्त वर्ष 2026 के वृद्धि अनुमान में संशोधन होगा?

जाहिर है, इसका (वृद्धि पर) सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह आकलन करना बहुत मुश्किल होगा कि मौद्रिक नीति से ऋण की दरों और उसके बाद वास्तविक अर्थव्यवस्था पर इसका असर कैसा रहेगा।  ऐतिहासिक रूप से देखें तो इसका असर दिखले में कम से कम 6 से 9 महीने लगते हैं। हम इसे तेज करना चाहते हैं, लेकिन इसका असर दूसरी छमाही में ही दिखेगा। अगर आंकड़ों के हिसाब से देखें तो इस साल जब इतनी अनिश्चितता है, हम कुछ ठोस रूप से बताने की स्थिति में नहीं हैं कि जीडीपी के आंकड़ों पर इसका कितना असर होगा।

यह नकदी का वृद्धि पर वाकई कैसे असर डालती है? व्यवस्था में अधिक नकदी का क्या लाभ है?

यह अन्य कारकों पर भी निर्भर करेगा। मौद्रिक नीति पर्याप्त नहीं, लेकिन जरूरी है। हमें विश्वास है कि इससे ऋण वृद्धि बेहतर होगी। मैं कोई स्पष्ट आंकड़ा देने में सक्षम नहीं हूं, लेकिन भरोसे के साथ यह कहा जा सकता है कि इससे ऋण प्रवाह बढ़ेगा। इसलिए नकदी महत्त्वपूर्ण है।  रीपो रेट में कमी महत्त्वपूर्ण है। इसमें कितना वक्त लगेगा, यह कहना कठिन है।

First Published - June 6, 2025 | 10:11 PM IST

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