facebookmetapixel
Corporate Action Next Week: अगले हफ्ते बाजार में हलचल, स्प्लिट-बोनस के साथ कई कंपनियां बांटेंगी डिविडेंड1485% का बड़ा डिविडेंड! Q3 में जबरदस्त प्रदर्शन के बाद हाल में लिस्ट हुई कंपनी ने निवेशकों पर लुटाया प्यार300% का तगड़ा डिविडेंड! IT सेक्टर की दिग्गज कंपनी का निवेशकों को गिफ्ट, रिकॉर्ड डेट भी फिक्सICICI Bank Q3 Results: मुनाफा 4% घटकर ₹11,318 करोड़ पर, NII में 7.7% की बढ़ोतरीX पर लेख लिखिए और जीतिए 1 मिलियन डॉलर! मस्क ने किया मेगा इनाम का ऐलान, जानें पूरी डिटेलChatGPT में अब आएंगे Ads, अमेरिका के यूजर्स के लिए ट्रायल शुरूलक्ष्मी मित्तल के पिता मोहन लाल मित्तल का निधन, उद्योग और समाज में गहरा शोकHDFC Bank Q3 Results: नेट प्रॉफिट 11.5% बढ़कर ₹18,654 करोड़ पर पहुंचा, NII ₹32,600 करोड़ के पारहर 40 शेयर पर मिलेंगे 5 अतिरिक्त शेयर! IT और कंसल्टिंग कंपनी का निवेशकों को तोहफा, रिकॉर्ड डेट फिक्सYES Bank की कमाई में जबरदस्त उछाल, Q3 में मुनाफा 55% बढ़ा

कच्चे तेल आयात में फायदा जलवायु के मोर्चे पर धक्का

ट्रंप ने ऐलान किया, 'हम कर्ज चुकाने पर ध्यान देंगे और करों का भार कम करेंगे। हम चीजों को इस तरह दुरुस्त करेंगे कि कोई अन्य नहीं कर सकता।

Last Updated- November 07, 2024 | 11:07 PM IST
Crude Oil

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अपने विजयी भाषण में कहा था कि अमेरिका के पास दुनिया के किसी भी देश से अधिक तरल सोना (पेट्रोलियम) मौजूद है, जबकि कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने संबंधी उनके बयान का उद्देश्य ईंधन कीमतों पर अंकुश बनाए रखना है।

ट्रंप ने बुधवार को कहा था कि देश के कच्चे तेल के विशाल भंडार का इस्तेमाल ऋण चुकाने में करेंगे। ट्रंप ने ऐलान किया, ‘हम कर्ज चुकाने पर ध्यान देंगे और करों का भार कम करेंगे। हम चीजों को इस तरह दुरुस्त करेंगे कि कोई अन्य नहीं कर सकता। जो संपदा हमारे पास है, वह चीन के पास नहीं है।’

यह कड़े तेवर वाला बयान इस बात का संकेत है कि अमेरिका अब ऊर्जा परिवर्तन नीतियों में बदलाव कर सकता है, जिसने जो बाइडन के कार्यकाल में हरित मोड़ लिया था। जलवायु परिवर्तन कार्यवाही के विरुद्ध स्पष्ट रुख अपनाने वाले ट्रंप ने पूर्व में भी जलवायु परिवर्तन को फर्जी करार दिया था।

ट्रंप के नेतृत्व में रिपब्लिकन पार्टी ने जीवाश्म ईंधन के प्रति थोड़ा नरम रवैया रखा है। अपने चुनावी अभियान के दौरान भी ट्रंप ने कोयला क्षेत्र में नौकरियां वापस लाने का वादा किया था। विशेषज्ञों का कहना है कि गरीब देशों को वित्तीय मदद समेत अमेरिका की जलवायु प्रतिबद्धताओं पर ग्रहण लग सकता है और इसी तरह का रुझान अन्य विकसित देशों में भी देखने को मिल सकता है।

द फासिल फ्यूल नॉन प्रॉलिफरेशन ट्रीटी इनिशिएटिव के ग्लोबल एंगेजमेंट डायरेक्टर हरजीत सिंह कहते हैं, ‘यदि ट्रंप अपने रुख पर कायम रहते हैं तो इसका उन देशों पर बहुत बुरा असर पड़ेगा जो जलवायु परिवर्तन के लिए बहुत अधिक जिम्मेदार भी नहीं है।’

फौरी तौर पर इसका प्रभाव बाकू में होने वाले कॉप 29 पर देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट के अनुसार ऐसी आशंका जताई जा रही है कि इस कॉप में वैश्विक नेतृत्वकर्ता देश शामिल नहीं होंगे। अगर यह आशंका सच साबित हुई तो फिर जलवायु परिवर्तन से निपटने को विकसित देशों से फंड जुटाने के प्रयासों को धक्का लग सकता है। कॉप29 अगले सप्ताह बाकू में आयोजित होगी।

First Published - November 7, 2024 | 11:03 PM IST

संबंधित पोस्ट