प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्यातकों से भारत द्वारा किए गए मौजूदा मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का अधिकतम लाभ उठाने को कहा है। कई भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत अमेरिकी शुल्क को देखते हुए मोदी ने निर्यातकों को आराम की दुनिया से बाहर निकलकर नए बाजार में अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया।
बैठक में शामिल रहे व्यक्ति ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट था कि हमने हाल ही में कुछ एफटीए पर हस्ताक्षर किए हैं। यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर भी बातचीत चल रही है और हम अन्य देशों के साथ भी एफटीए पर हस्ताक्षर करना जारी रखेंगे। यह सरकार का काम है। बहरहाल सिर्फ एफटीए करने से निर्यात नहीं बढ़ सकता है। सभी हितधारकों को कड़ी मेहनत करनी होगी, आराम छोड़कर बाहर निकलना होगा और एफटीए का सर्वोत्तम उपयोग करना होगा।’
सोमवार की शाम को मोदी ने हस्तशिल्प, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, परिधान, इंजीनियरिंग, रत्न और आभूषण सहित विभिन्न क्षेत्रों के कम से कम आधा दर्जन निर्यात संवर्धन परिषदों के प्रमुखों से मुलाकात की। ये क्षेत्र अमेरिका द्वारा लगाए गए तेज, दोहरे अंकों के शुल्क से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। देर शाम शुरू हुई बैठक लगभग 2 घंटे तक चली। इसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकांत दास, वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल, राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने भी भाग लिया।
अमेरिका के 50 प्रतिशत शुल्क से उपजी चुनौतियों को लेकर निर्यातक अब तक वाणिज्य और वित्त मंत्रियों के साथ बैठकें करके अपनी चिंता से अवगत करा रहे थे। इतने उच्च स्तर की यह पहली बैठक है।
बैठक के दौरान निर्यातकों ने निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से समर्थन दिए जाने को लेकर चिंता जताई, जिसमें भारत से वस्तु निर्यात की योजना को फिर से पेश किया जाना, मार्केट एक्सेस इनीशिएटिव (एमएआई) योजना, कुछ प्रशासन संबंधी सुधार इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर में सुधार, एमएसएमई के लिए ब्याज छूट योजना शामिल हैं। उन्होंने अमेरिका द्वारा लगाए गए उच्च शुल्क के कारण पड़े अतिरिक्त लागत का बोझ उठाने के लिए सरकार के कुछ वित्तीय मदद की भी मांग की।
निर्यातकों ने प्रधानमंत्री से भारत-यूरोपीय संघ एफटीए वार्ता में कड़ा रुख अपनाने और भारतीय निर्यातकों को कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (सीबीएएम) से निपटने के लिए कुछ राहत उपाय प्रदान करने का भी आग्रह किया।
वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार सितंबर में अमेरिका को भारत का कुल शिपमेंट 11.9 प्रतिशत घटकर 5.5 अरब डॉलर हो गया, जो मूल्य के मामले में लगातार चौथी गिरावट है।
सितंबर में अमेरिका को रत्न और आभूषणों के निर्यात में सबसे अधिक नुकसान हुआ। इसके बाद महीने के दौरान प्रभावी 50 प्रतिशत शुल्क का पूरा प्रभाव पड़ा। महीने के दौरान मोती, कीमती और अर्ध-कीमती पत्थरों के शिपमेंट में 76.7 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि सोने और अन्य कीमती धातु के आभूषणों के निर्यात में 71.1 प्रतिशत की गिरावट आई।
महीने के दौरान, कपास के कपड़े और मेडअप (-36.2 प्रतिशत), समुद्री उत्पाद (-26.9 प्रतिशत), डेरी के लिए औद्योगिक मशीनरी (-28.1 प्रतिशत), रेडीमेड कपड़े (-25 प्रतिशत), दवा फॉर्मूलेशन (-16.4 प्रतिशत) और वाहनों के कल पुर्जे (-12 प्रतिशत) का निर्यात भी दोहरे अंकों में कम हुआ।