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India-EU FTA: दो अरब लोगों का बाजार, भारत के लिए कितना फायदेमंद?

डब्ल्यूईएफ में जर्मन चांसलर बोले- मुक्त व्यापार समर्थक देशों के लिए सुनहरा मौका

Last Updated- January 23, 2026 | 8:49 AM IST
India-EU FTA

भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच प्रस्तावित एफटीए पर हस्ताक्षर से चंद दिनों पहले जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने गुरुवार को कहा कि ‘महाशक्तियों का युग’ संरक्षणवाद एवं अलगाववाद के बजाय नियम-आधारित व्यवस्था एवं मुक्त व्यापार का समर्थन करने वाले देशों के लिए बड़ा अवसर है। मैर्त्स ने यहां विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि यूरोप उच्च आर्थिक वृद्धि चाहता है और इसे हासिल करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष भारत जाएंगी, जहां भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के सिद्धांतों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

मैर्त्स ने कहा, ‘एक सप्ताह पहले मैं भारत में था। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य उन देशों के लिए अवसर प्रस्तुत करता है जो मनमाने फैसलों के बजाय नियमों को प्राथमिकता देते हैं और संरक्षणवाद एवं अलगाववाद के स्थान पर मुक्त व्यापार में विश्वास रखते हैं।’

उन्होंने कहा कि इसी दिशा में यूरोपीय संघ नए साझेदारों के साथ मिलकर काम कर रहा है। मैर्त्स ने मेक्सिको एवं इंडोनेशिया के साथ व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दिए जाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। इससे पहले मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लिएन ने कहा था कि यूरोपीय संघ भारत के साथ एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते के करीब है, जिसे ‘सबसे महत्त्वपूर्ण समझौता’ कहा जा रहा है। उन्होंने कहा था कि यह समझौता करीब दो अरब लोगों का बाजार तैयार करेगा, जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग एक-चौथाई होगा।

लिएन के साथ यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा 25 से 27 जनवरी तक भारत दौरे पर रहेंगे। वे गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शिखर वार्ता करेंगे। भारत-यूरोपीय संघ के बीच 27 जनवरी को होने वाले शिखर सम्मेलन में मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता पूरी होने की घोषणा की जा सकती है।

प्रस्तावित समझौते से ऐसे समय में भारत-ईयू के समग्र द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती मिलने की उम्मीद है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की शुल्क नीति के चलते वैश्विक व्यापार में व्यापक व्यवधान देखने को मिल रहा है। यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2023-24 में वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 135 अरब डॉलर रहा।

First Published - January 23, 2026 | 8:49 AM IST

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