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दूसरी तिमाही में मिली विनिर्माण को गति

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सर्वे में भाग लेने वाले 79 प्रतिशत लोगों ने कहा कि पिछले साल की समान अवधि की तुलना में वित्त वर्ष 24 की दूसरी तिमाही में उत्पादन अधिक बना रहा।

Last Updated- November 13, 2023 | 10:47 PM IST

भारत के विनिर्माण क्षेत्र में जून सितंबर तिमाही (दूसरी तिमाही) में वृद्धि दर्ज की गई है। उद्योग संगठन फिक्की (FICCI) के एक सर्वे में कहा गया है कि विकसित देशों में सुस्ती के बावजूद वित्त वर्ष 2023-24 के शेष महीनों के दौरान भी वृद्धि की गति बरकरार रहेगी।

इसमें कहा गया है कि सर्वे में भाग लेने वाले 79 प्रतिशत लोगों ने कहा कि पिछले साल की समान अवधि की तुलना में वित्त वर्ष 24 की दूसरी तिमाही में उत्पादन अधिक बना रहा।

फिक्की ने 330 विनिर्माण इकाइयों का सर्वे किया, जिसमें बड़े, छोटे व मझोले उद्यम (एसएमई) शामिल हुए। सर्वे में शामिल कंपनियों का 10 प्रमुख क्षेत्रों जैसे वाहन व वाहन के कल पुर्जे, पूंजीगत वस्तुओं सीमेंट और केमिकल्स में कुल मिलाकर सालाना कारोबार 4.9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है।

विनिर्माण क्षेत्र में औसत क्षमता उपयोग वित्त वर्ष 24 की दूसरी तिमाही में 74 प्रतिशत से अधिक रहा है, जिससे इस क्षेत्र में टिकाऊ आर्थिक गतिविधियों का पता चलता है। यह पहले की तिमाहियों में 73 प्रतिशत क्षमता उपयोग की तुलना में अधिक है।

फेडरेशन आफ इंडियन चैंबर्स आफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री (फिक्की) के सर्वे में कहा गया है, ‘भविष्य में निवेश का परिदृश्य भी इसके पहले की तिमाही की तुलना में सुधरा है।

फिक्की के एक सर्वे में कहा गया है कि विकसित देशों में सुस्ती के बावजूद वित्त वर्ष 2023-24 के शेष महीनों के दौरान भी वृद्धि की गति बरकरार रहेगी।’

‘सर्वे में कहा गया है कि इलेक्ट्रॉनिक्स और ह्वाइट गुड्स, सीमेंट, ऑटोमोटिव और मशीन टूल्स में मजबूत वृद्धि हुई है और इनका प्रदर्शन शानदार रहा है। वहीं पूंजीगत वस्तुओं और निर्माण, मशीनरी, केमिकल्स, टेक्सटाइल्स, धातु, कागज व अन्य क्षेत्रों में सामान्य वृद्धि दर्ज की गई है।

प्रतिक्रिया देने वाले 40 प्रतिशत से ज्यादा लोगों ने कहा कि पहले की तिमाहियों की तुलना में निर्यात बेहतर रहने के बावजूद मांग कम रही है। वहीं 48 प्रतिशत ने कहा कि दूसरी तिमाही में निर्यात अधिकर रहा है, जबकि पहली तिमाही 33 प्रतिशत लोगों ने निर्यात बढ़ने की बात कही थी।

साथ ही कच्चे माल की कीमत ज्यादा रहने, कर्ज की लागत अधिक होने, लॉजिस्टिक्स व आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान जैसी परेशानियां भी रही हैं।

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First Published - November 13, 2023 | 10:44 PM IST

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