facebookmetapixel
मजबूत फंडामेंटल के साथ शेयर बाजार में बढ़त की उम्मीद, BFSI क्षेत्र सबसे आगे: रमेश मंत्रीअमेरिकी प्रतिबंधों से वेनेजुएला की तेल अर्थव्यवस्था झुलसी, निर्यात पर गहरा असर; भारत का आयात भी घटाबांग्लादेश ने IPL के प्रसारण पर लगाया प्रतिबंध, एक्सपर्ट बोले: इस फैसले से कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगादिल्ली दंगा साजिश केस में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकारGrok विवाद में X को सरकार ने दी 72 घंटे की और मोहलत, महिलाओं व बच्चों की तस्वीरों पर केंद्र सख्तकेंद्रीय बजट से पहले IVCA की मांग: AIF ने प्राइवेट क्रेडिट फंड्स के लिए टैक्स में समानता की मांग कीSMC बिल पर एम. दामोदरन की चेतावनी: सेबी का निवेशकों की सुरक्षा पर फोकस कमजोरविश्व आर्थिक मंच की सलाना बैठक में दावोस जाएंगे भारतीय नेतागण, चौहान और वैष्णव करेंगे अगुआईभारत कोकिंग कोल का आईपीओ शुक्रवार को पेश होगा, ₹1,069 करोड़ जुटाने की तैयारीAI इम्पैक्ट समिट में ग्लोबल साउथ पर फोकस, खुद को AI सर्विस सप्लायर के रूप में पेश करेगा भारत

जामनगर से ब्रसेल्स तक: रूस की तेल राजनीति में भारत का बढ़ता दखल

भारत से यूरोपीय संघ को ईंधन निर्यात में 58% की बढ़ोतरी, रूसी तेल से रिफाइन हुए उत्पादों का हिस्सा ज्यादा

Last Updated- November 10, 2024 | 3:53 PM IST
crude oil

भारत से यूरोपीय संघ को डीजल और अन्य ईंधनों का निर्यात 2024 की पहली तीन तिमाहियों में 58 प्रतिशत बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें अधिकांश हिस्सा रियायती रूसी कच्चे तेल से रिफाइन किया गया ईंधन है।

दिसंबर 2022 में EU और G7 देशों ने रूस से कच्चे तेल की खरीद पर प्रतिबंध और कीमत सीमा लागू की थी ताकि रूस के राजस्व पर असर पड़े और यूक्रेन में चल रहे युद्ध के लिए रूस की फंडिंग पर रोक लग सके। लेकिन रिफाइन किए गए तेल पर कोई सीधा प्रतिबंध न होने के कारण, ऐसे देश जो रूस पर प्रतिबंध नहीं लगा रहे हैं, वे रूसी तेल खरीद सकते हैं, उसे रिफाइन कर सकते हैं और फिर यूरोपीय देशों को निर्यात कर सकते हैं।

यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूस से तेल खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। पहले भारत की कुल तेल खरीद में रूस का हिस्सा 1 प्रतिशत से भी कम था, लेकिन अब यह बढ़कर 40 प्रतिशत तक हो गया है। इसका कारण यह है कि रूस का तेल अन्य अंतरराष्ट्रीय तेल की तुलना में सस्ती दरों पर मिल रहा था। हालांकि रिफाइनरी से तैयार ईंधन यूरोप को पूरी कीमत पर निर्यात हो रहा है।

‘सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर’ (CREA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने इस रिफाइनिंग सिस्टम का फायदा उठाते हुए यूरोपीय संघ को सबसे ज्यादा तेल उत्पादों का निर्यात करना शुरू कर दिया है। गुजरात के जामनगर, वडीनार और कर्नाटक के न्यू मैंगलोर रिफाइनरी से 2024 की पहली तीन तिमाहियों में EU को होने वाले निर्यात में 58 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इनमें से ज्यादातर रिफाइनरी रूसी कच्चे तेल पर निर्भर हैं।

जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज की रिफाइनरी है, वहीं वडीनार में रूस की रोसनेफ्ट समर्थित नायरा एनर्जी की यूनिट है। मैंगलोर रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) ONGC की सहायक कंपनी है।

EU के देशों द्वारा तेल उत्पादों का लगातार आयात “रिफाइनिंग में मौजूद खामी” को दर्शाता है, जिससे रूसी तेल के निर्यात से उसे फायदा मिल रहा है। युद्ध से पहले यूरोप औसतन 1,54,000 बैरल प्रतिदिन डीजल और जेट फ्यूल का आयात भारत से करता था, जो अब लगभग दोगुना हो गया है।

CREA की एक पुरानी रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2023 तक EU देशों ने रूस से बने तेल उत्पादों का 8.5 अरब यूरो का आयात किया। यह राशि EU की यूक्रेन के लिए दी जाने वाली सहायता के 68 प्रतिशत के बराबर है। पिछले 13 महीनों में भारत द्वारा EU देशों को निर्यात किए गए तेल उत्पादों में से एक-तिहाई से ज्यादा रूसी कच्चे तेल से बना था।

अक्टूबर में, भारत ने रूस से लगभग 2 अरब यूरो का कच्चा तेल खरीदा। इसी दौरान चीन ने 47 प्रतिशत, भारत ने 37 प्रतिशत, EU और तुर्की ने 6-6 प्रतिशत रूसी तेल खरीदा।

रिपोर्ट के मुताबिक, रूस का लगभग 83 प्रतिशत समुद्री तेल उन ‘शैडो टैंकरों’ से भेजा गया, जो पश्चिमी देशों के नियमों से मुक्त हैं। इस शैडो फ्लीट में पुराने टैंकर शामिल हैं जिनका मालिकाना स्पष्ट नहीं होता।

First Published - November 10, 2024 | 3:53 PM IST

संबंधित पोस्ट