facebookmetapixel
Q3 Results: DLF का मुनाफा 13.6% बढ़ा, जानें Zee और वारी एनर्जीज समेत अन्य कंपनियों का कैसा रहा रिजल्ट कैंसर का इलाज अब होगा सस्ता! Zydus ने भारत में लॉन्च किया दुनिया का पहला निवोलुमैब बायोसिमिलरबालाजी वेफर्स में हिस्से के लिए जनरल अटलांटिक का करार, सौदा की रकम ₹2,050 करोड़ होने का अनुमानफ्लाइट्स कैंसिलेशन मामले में इंडिगो पर ₹22 करोड़ का जुर्माना, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट हटाए गएIndiGo Q3 Results: नई श्रम संहिता और उड़ान रद्द होने का असर: इंडिगो का मुनाफा 78% घटकर 549 करोड़ रुपये सिंडिकेटेड लोन से भारतीय कंपनियों ने 2025 में विदेश से जुटाए रिकॉर्ड 32.5 अरब डॉलरग्रीनलैंड, ट्रंप और वैश्विक व्यवस्था: क्या महा शक्तियों की महत्वाकांक्षाएं नियमों से ऊपर हो गई हैं?लंबी रिकवरी की राह: देरी घटाने के लिए NCLT को ज्यादा सदस्यों और पीठों की जरूरतनियामकीय दुविधा: घोटालों पर लगाम या भारतीय पूंजी बाजारों का दम घोंटना?अवधूत साठे को 100 करोड़ रुपये जमा कराने का निर्देश 

India-US Trade Deal: व्यापार समझौता न भी हो तब भी नहीं रुकेगा भारत का निर्यात, SBI रिसर्च ने बताए विकल्प

अमेरिका ने अब तक 23 देशों पर टैरिफ बढ़ाए हैं, जिनमें ज्यादातर एशियाई देशों पर भारत की तुलना में ज्यादा शुल्क लगाए गए हैं।

Last Updated- July 14, 2025 | 7:03 PM IST
India- US Trade Deal

India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर अंतिम फैसला आने वाले दिनों में होने की संभावना है और यह मिनी ट्रेड डील जुलाई के मध्य तक घोषित की जा सकती है। ताजा जानकारी के अनुसार, दोनों देशों के बीच एक और दौर की बातचीत शुरू होने वाली है। इसके लिए भारतीय वाणिज्य मंत्रालय की एक टीम वाशिंगटन डीसी पहुंच चुकी है। यह चार दिवसीय बातचीत आज यानी सोमवार से शुरू होगी और गुरुवार तक चलेगी। इस दौरान दोनों देशों के बीच कृषि और ऑटोमोबाइल जैसे बड़े व्यापारिक मुद्दों में आ रहे मतभेदों को सुलझाने की कोशिश होगी। इस बीच SBI रिसर्च ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि अगर यह समझौता उम्मीद के अनुसार नहीं हो पाता और भारत पर 10% अतिरिक्त टैरिफ (शुल्क) भी लगाया जाता है, तो भी भारत के पास अपने निर्यात को विविध बनाने (डायवर्सिफाई करने) के कई विकल्प मौजूद हैं।

निर्यात पर नहीं होगा कोई खास असर- SBI रिसर्च

SBI रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की सेवा निर्यात (Service Exports) हर साल नया रिकॉर्ड बना रही है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर रिकॉर्ड 387.5 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जिसमें आईटी, फाइनैंशियल और बिजनेस सर्विसेज जैसे सेक्टर प्रमुख ड्राइवर रहे। ऐसे में भारत के कुल निर्यात पर कोई खास असर पड़ने की संभावना नहीं है।

अमेरिका ने अब तक 23 देशों पर टैरिफ बढ़ाए हैं, जिनमें ज्यादातर एशियाई देशों पर भारत की तुलना में ज्यादा शुल्क लगाए गए हैं। ऐसे में भारत के लिए अमेरिका को निर्यात बढ़ाने का एक अच्छा मौका बनता है, खासकर उन उत्पादों में, जिनमें भारत को तुलनात्मक लाभ (Revealed Comparative Advantage – RCA) प्राप्त है।

Also Read: Mutual Funds ने जून में क्या खरीदा, क्या बेचा? लार्ज से स्मॉल कैप तक बदला गेमप्लान

चीन-सिंगापुर के कैमिकल निर्यात में सेंध लगाने का मौका

अमेरिका द्वारा आयात किए जाने वाले टॉप-5 उत्पादों में से केवल रसायन (Chemicals) ऐसे हैं, जिनमें भारत को तुलनात्मक लाभ (RCA) प्राप्त है। हालांकि, इस कैटेगरी में चीन और सिंगापुर का अमेरिका को निर्यात में हिस्सा भारत से ज्यादा है। अब जबकि चीन पर ज्यादा टैरिफ लागू हो चुके हैं, भारत के पास यह अवसर है कि वह अमेरिका को रसायन और फार्मा जैसे उत्पादों का निर्यात बढ़ा सकता है।

अगर भारत इन टैरिफ को घटाकर 25% से कम (जो कि फिलहाल सिंगापुर पर लागू है) करवाने में सफल हो जाता है, तो वह चीन और सिंगापुर का कुछ बाजार हिस्सा हासिल कर सकता है। अनुमान है कि अगर भारत इन देशों से 2% शेयर हासिल कर लेता है, तो उसकी GDP में 0.2% की बढ़ोतरी हो सकती है।

इसके अलावा, जापान, मलेशिया और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से, जो अब भारत से ज्यादा टैरिफ का सामना कर रहे हैं, भारत यदि 1% का अतिरिक्त शेयर भी हथिया ले, तो यह GDP में और 0.1% की बढ़ोतरी ला सकता है।

टेक्सटाइल निर्यात में भारत को टैरिफ से फायदा

रसायनों के अलावा, भारत को टेक्सटाइल सेक्टर (textiles) में भी तुलनात्मक लाभ (RCA) प्राप्त है और वह अमेरिका को परिधान (apparel) और एक्सेसरीज का निर्यात करता है। हालांकि, इस सेक्टर में भारत को बांग्लादेश, कंबोडिया, इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिलती है।

वर्तमान टैरिफ स्ट्रक्चर के अनुसार, वियतनाम को छोड़कर इन सभी देशों पर भारत से ज्यादा टैरिफ लागू हैं। ऐसे में भारत इस स्थिति का फायदा उठा सकता है। फिलहाल, अमेरिका के कुल परिधान आयात में भारत की हिस्सेदारी 6% है। अगर भारत इन देशों से 5% अतिरिक्त बाजार हिस्सा हासिल कर लेता है, तो इससे देश की GDP में 0.1% की बढ़ोतरी हो सकती है।

Also Read: India-US Trade Deal: BTA पर बातचीत के लिए भारतीय टीम वाशिंगटन पहुंची, चार दिवसीय वार्ता आज से शुरू

आसियान देशों को निर्यात बढ़ाने पर हो जोर

भारत के पास उन एशियाई देशों को निर्यात बढ़ाने का भी अवसर है, जिन पर अब अमेरिका ने ज्यादा टैरिफ लगा दिए हैं। रसायनों के अलावा, भारत इन देशों को कृषि उत्पाद, पशु एवं पशु आधारित उत्पाद, वेस्ट और स्क्रैप (खासतौर पर मेटल स्क्रैप) और कुछ पशु एवं वनस्पति आधारित प्रोसेस्ड उत्पादों का निर्यात भी बढ़ा सकता है।

भारत-आसियान मुक्त व्यापार समझौते (ASEAN-India FTA) की मौजूदा रूपरेखा की समीक्षा की जा रही है ताकि टैरिफ में असंतुलन को दूर किया जा सके और “रूल्स ऑफ ओरिजिन” से जुड़ी कमजोरियों पर काम किया जा सके, जिनका इस्तेमाल कर कुछ देश चीन से बड़े पैमाने पर माल डंप कर रहे हैं। SBI रिसर्च ने रिपोर्ट में भारत को आसियान देशों को निर्यात बढ़ाने और चीन से हो रहे माल के डंपिंग को रोकेने की सलाह दी गई है।

First Published - July 14, 2025 | 6:58 PM IST

संबंधित पोस्ट