facebookmetapixel
Stock Market: सेंसेक्स-निफ्टी में लगातार तीसरे दिन गिरावट, वजह क्या है?राज्यों का विकास पर खर्च सच या दिखावा? CAG ने खोली बड़ी पोल2026 में शेयर बाजार के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद, ABSL AMC का 10-12% रिटर्न का अनुमाननिवेश के 3 बड़े मिथ टूटे: न शेयर हमेशा बेहतर, न सोना सबसे सुरक्षित, न डायवर्सिफिकेशन नुकसानदेहजोमैटो और ब्लिंकिट की पैरेट कंपनी Eternal पर GST की मार, ₹3.7 करोड़ का डिमांड नोटिस मिलासरकार ने जारी किया पहला अग्रिम अनुमान, FY26 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.4% की दर से बढ़ेगीDefence Stocks Rally: Budget 2026 से पहले डिफेंस शेयरों में हलचल, ये 5 स्टॉक्स दे सकते हैं 12% तक रिटर्नTyre Stock: 3-6 महीने में बनेगा अच्छा मुनाफा! ब्रोकरेज की सलाह- खरीदें, ₹4140 दिया टारगेटकमाई अच्छी फिर भी पैसा गायब? जानें 6 आसान मनी मैनेजमेंट टिप्सSmall-Cap Funds: 2025 में कराया बड़ा नुकसान, क्या 2026 में लौटेगी तेजी? एक्सपर्ट्स ने बताई निवेश की सही स्ट्रैटेजी

India-UK FTA से एल्युमिनियम निर्यात 2030 तक तीन गुना बढ़ेगा, लेकिन CBAM का कार्बन टैक्स बनेगा चुनौती

वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, 2024-25 में भारत ने UK से 3,244 करोड़ का एल्युमिनियम किया आयात, इसमें 86 फीसदी स्क्रैप एल्युमिनियम

Last Updated- August 25, 2025 | 8:34 PM IST
India UK
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच हाल ही में हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से भारत के एल्युमिनियम इंडस्ट्री को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। एक्सपर्ट और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि इस समझौते से 2030 तक भारत से UK में एल्युमिनियम निर्यात तीन गुना बढ़ सकता है। हालांकि, UK का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM), जो जनवरी 2027 से लागू होगा, इस फायदे को कम कर सकता है।

FTA के तहत UK ने पहले से चली आ रही 2 से 10 फीसदी की इंपोर्ट ड्यूटी को खत्म कर दिया है। वेदांता एल्युमिनियम के CEO राजीव कुमार ने बताया, “इस समझौते से भारत का एल्युमिनियम निर्यात मौजूदा 21 किलोटन प्रति वर्ष (KTPA), जिसकी कीमत 93 मिलियन डॉलर है, 2030 तक बढ़कर लगभग 65 किलोटन हो सकता है, जिसकी वैल्यू करीब 220 मिलियन डॉलर होगी।” उन्होंने कहा कि ड्यूटी-फ्री होने से भारतीय एल्युमिनियम मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोटिव पार्ट्स, फूड और ड्रिंक पैकेजिंग और रिन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स में ज्यादा आकर्षक बनेगा।

Also Read: India-Oman FTA: भारत-ओमान मुक्त व्यापार समझौते पर जल्द लगेगी मुहर, अरबों डॉलर के ट्रेड का रास्ता साफ

CBAM की चुनौती

हालांकि, UK का CBAM भारतीय निर्यातकों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह मैकेनिज्म 14 से 35 फीसदी तक टैरिफ लगा सकता है, जो प्रति टन CO₂ पर करीब 150 डॉलर के बराबर होगा। राजीव कुमार ने चेतावनी दी कि उच्च उत्सर्जन वाले उत्पादकों के लिए यह कार्बन ड्यूटी 50 फीसदी से भी ज्यादा हो सकती है, जिससे निर्यात की लागत इतनी बढ़ जाएगी कि FTA का फायदा खत्म हो सकता है। डेलॉइट के पार्टनर राजीब मैत्रा ने कहा, “FTA में कार्बन टैक्स से छूट नहीं मिली, जो एक बड़ी चुनौती है और इसे जल्द से जल्द हल करने की जरूरत है।”

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में भारत ने UK से 3,244 करोड़ रुपये का एल्युमिनियम आयात किया, जिसमें 86 फीसदी स्क्रैप एल्युमिनियम था। वहीं, भारत ने 794 करोड़ रुपये के वैल्यू-एडेड एल्युमिनियम प्रोडक्ट्स का निर्यात किया। FTA से रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) सेक्टर में भी सहयोग की नई राहें खुलेंगी। मैत्रा ने बताया कि एल्यूमिना प्रोसेसिंग से निकलने वाले रेड मड, जिसमें गैलियम, टाइटेनियम और वैनेडियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज होते हैं, का उपयोग हो सकता है। भारत हर साल करीब 90 लाख टन रेड मड पैदा करता है। इसके अलावा, एल्युमिनियम ड्रॉस से भी रिसाइक्लिंग और खनिज निकालने की संभावनाएं हैं।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि FTA के फायदे को पूरी तरह हासिल करने के लिए नीतिगत कदम उठाने होंगे। मैत्रा ने सुझाव दिया कि एल्युमिनियम को कोर सेक्टर का दर्जा दिया जाए, घरेलू कार्बन प्राइसिंग और ट्रेडिंग सिस्टम लागू किया जाए, और छोटे-मध्यम इंडस्ट्रीज को प्रोत्साहन के साथ नई तकनीक का समर्थन दिया जाए। इसके अलावा, ग्रीन स्टील की तरह ग्रीन एल्युमिनियम सर्टिफिकेशन फ्रेमवर्क बनाया जाए, जो कम कार्बन वाले एल्युमिनियम प्रोडक्शन को बढ़ावा दे और वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धा को मजबूत करे।

First Published - August 25, 2025 | 7:06 PM IST

संबंधित पोस्ट