नवंबर में भारत की गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) की आमदनी महीने-दर-महीने थोड़ी बढ़ी, जबकि पूरे वित्तीय वर्ष में आमदनी लगातार मजबूत बनी रही। सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि देश का अप्रत्यक्ष कर प्रणाली स्थिर बनी हुई है, हालांकि अलग-अलग सेक्टर और राज्यों में प्रदर्शन में अंतर देखा गया।
नवंबर 2025 में कुल GST रेवेन्यू 1,70,276 करोड़ रुपये पहुंचा, जो नवंबर 2024 के 1,69,016 करोड़ रुपये से 0.7 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, अक्टूबर में कलेक्शन ज्यादा था, जब यह साल-दर-साल 4.6 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.95 लाख करोड़ रुपये हो गया था, जबकि पिछले साल यह 1.87 लाख करोड़ रुपये था।
कुल मिलाकर, अप्रैल से नवंबर 2025 तक के वित्तीय वर्ष में GST रेवेन्यू 14,75,488 करोड़ रुपए तक बढ़ गया, यानी सालाना 8.9 प्रतिशत की बढ़त हुई। अगर बात GST कंपेंसेशन सेस की करें तो यह पिछले साल के लगभग 13,000 करोड़ रुपए से घटकर 4,006 करोड़ रुपए हो गई, यानी 69.06% की भारी गिरावट आई है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, घरेलू कारोबार से आने वाला शुद्ध GST रेवेन्यू नवंबर में महीने-दर-महीने 2.3 फीसदी घटकर 1.24 लाख करोड़ रुपए रह गया। वहीं आयात से आने वाला टैक्स 10.2 फीसदी बढ़कर 45,976 करोड़ रुपए हो गया। कुल मिलाकर GST रिफंड पिछले साल के मुकाबले 3.5 फीसदी कम रहे और 18,196 करोड़ रुपए पर आ गए।
नेट GST कलेक्शन (रिफंड हटाने के बाद) में मामूली 1.3 फीसदी की बढ़त जरूर दिखी और यह 1.52 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा, लेकिन घरेलू रेवेन्यू में 1.5 फीसदी की गिरावट भी दर्ज की गई।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि 22 सितंबर को लागू हुई नई GST दरों की वजह से कलेक्शन पर असर दिखना शुरू हो गया है। HSBC के ताजा आंकड़ों में भी नवंबर में मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी नौ महीने के निचले स्तर 56.6 पर पहुंच गई, जिससे आने वाले महीनों में GST कलेक्शन पर और दबाव पड़ने के संकेत मिल रहे हैं।
IMF ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिका के हाई टैरिफ के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहेगी और हाल में की गई GST कटौती से भी कुछ राहत मिलेगी। लेकिन ज्यादातर अर्थशास्त्री मानते हैं कि जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था की रफ्तार सामान्य होगी, सरकारी खजाने में टैक्स कलेक्शन भी नरम पड़ सकता है।