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भारत विनिवेश के लक्ष्य से चूकने की राह पर

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भारत सरकार ने विनिवेश से 2023-24 में 510 अरब रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था।

Last Updated- November 24, 2023 | 11:41 PM IST
Interim Budget: Disinvestment target pegged at Rs 50,000 crore in FY24 वित्त वर्ष 2024-25 में 50,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य, RE घटाकर 30,000 रुपये किया गया

भारत इस साल विनिवेश का आधा लक्ष्य जुटाने में परेशानियों का सामना करेगा। भारत लगातार पांचवें साल विनिवेश के लक्ष्य से दूर रहेगा। सूत्रों के मुताबिक सरकार की प्राथमिकताएं चुनाव के कारण बदल गई हैं।

दो सरकारी सूत्रों ने बताया कि सरकार 2023-24 के 300 अरब रुपये (3.60 अरब डॉलर) के विनिवेश के लक्ष्य को हासिल करने दूर रह सकती है।

भारत का लक्ष्य विनिवेश से मार्च 2024 तक समाप्त हो रहे वित्तीय वर्ष तक 510 अरब रुपये जुटाने का लक्ष्य था। इस 510 अरब रुपये में से करीब 300 अरब रुपये के विनिवेश का लक्ष्य ही हासिल होने की उम्मीद है।

यह लक्ष्य को हासिल करने के लिए आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बेचना और सरकारी कंपनी एनएमडीसी स्टील का निजीकरण प्रस्तावित था।

इस क्रम में बैंकिंग नियामक भारतीय रिजर्व बैंक ने आईडीबीआई के इच्छुक खरीदारों की जांच की अवधि को 2024 के आम चुनाव के बाद तक बढ़ा दिया है।

कई राज्यों में चुनाव और अगले साल गर्मियों में चुनाव के कारण एनएमडीसी स्टील की बिक्री इस साल नहीं हो पाएगी। एनएमडीसी का मुख्य संयंत्र खनिज संपदा संपन्न छत्तीसगढ़ में है।

एनएमडीसी के ज्यादातर कर्मचारी छत्तीसगढ़ में कार्यरत हैं और मजदूर संघों ने प्रस्तावित बिक्री का विरोध किया है। हालांकि भारत विनिवेश के कुछ छोटे लक्ष्यों को इस वित्त वर्ष में हासिल कर सकता है लेकिन भारत विनिवेश के आधे लक्ष्य से कम को ही हासिल कर पाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार कंपनियों को बेचने की अपनी योजना पर आगे नहीं बढ़ पा रही है। इसका कारण यह है कि 2019 के बाद से ज्यादातर क्षेत्रों जैसे स्टील, उर्वरक और तेल व गैस कंपनियों का विनिवेश भूमि स्वामित्व व कर्मचारी संघों के विरोध के कारण विनिवेश की प्रक्रिया बाधित हुई है।

वित्त मंत्रालय से इस बारे में टिप्पणी मांगी गई थी लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। पूर्व केंद्रीय वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा, ‘सरकार के इस कार्यकाल में कोई निजीकरण नहीं होगा।’ उन्होंने कहा, ‘निजीकरण नीति में राजनीतिक रुचि की कमी के कारण अगले छह महीनों तक विनिवेश और निजीकरण के बारे में भूल जाइए।’

जानकारी देने वाले पहले सूत्र ने बताया, ‘लक्ष्य की कमी को कुछ हद तक सरकारी कंपनियों के लाभांश से पूरा किया जाएगा।’ जबरदस्त लाभ व निरंतर मांग के कारण सरकारी कंपनियां अधिक लाभांश दे पाई हैं।

सरकार को लाभांश का लक्ष्य 430 अरब रुपये के लक्ष्य से अधिक होने की उम्मीद है। अभी तक सरकारी कंपनियों ने 203 अरब रुपये का लाभांश दिया है। बार्कले इंवेस्टमेंट बैंक के अर्थशास्त्री राहुल बाजोरिया ने कहा, ‘जब तक सरकार अपने राजकोषीय लक्ष्यों को हासिल कर रही है और इनमें कोई गिरावट नहीं है, तब तक विनिवेश का लक्ष्य चूक जाना जायज है।’

तीसरे सरकारी अधिकारी ने बताया कि निजीकरण में विलंब होने से सरकार के राजकोषीय घाटे 5.9 प्रतिशत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार केवल पांच कंपनियों में अपनी थोड़ी सी हिस्सेदारी ही बेच पाई है।

यह हिस्सेदारी स्टॉक एक्सचेंज में शेयर बाजारों की बिक्री करके हासिल की गई है जबकि इस साल भारत के शेयर बाजार ने बुलंदियों को छुआ है। सरकार संचालित कंपनियों ने सूचकांक 16 नवंबर को अपने सर्वकालिक उच्च स्तर 13,242 को हासिल किया।

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First Published - November 24, 2023 | 10:39 PM IST

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