वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में भारत का चालू खाते का घाटा (कैड) बढ़कर 13.2 अरब डॉलर या सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 1.3 प्रतिशत हो गया। यह वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में 11.3 अरब डॉलर (जीडीपी का 1.1 प्रतिशत) था। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई।
वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में वस्तु व्यापार से घाटा बढ़कर 93.6 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले की समान अवधि में 79.3 अरब डॉलर था।
सेवाओं से शुद्ध प्राप्तियां बढ़कर 57.5 अरब डॉलर हो गईं, जो एक साल पहले 51.2 अरब डॉलर थीं। इसे कंप्यूटर सेवाओं व अन्य कारोबारी सेवाओं से समर्थन मिला है।
प्राथमिक आय खाते से शुद्ध निकासी से मुख्य रूप से निवेश आय भुगतान का पता चलता है। यह वित्त वर्ष2026 की तीसरी तिमाही में घटकर 12.2 अरब डॉलर रह गया, जो वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में 16.4 अरब डॉलर था।
इस तिमाही के दौरान व्यक्तिगत हस्तांतरण से प्राप्तियां बढ़कर 36.9 अरब डॉलर हो गईं, जो एक साल पहले 35.1 अरब डॉलर थीं। इससे विदेश में काम करने वाले भारतीयों के धनप्रेषण का पता चलता है।
वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से शुद्ध निकासी 3.7 अरब डॉलर रही, जो वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही के 3.8 अरब डॉलर की तुलना में अधिक है।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) में 0.2 अरब डॉलर की मामूली शुद्ध निकासीहुई, जो पिछले साल की समान तिमाही के 11.3 अरब डॉलर की तुलना में बहुत कम है।
प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) जमा से शुद्ध आवक 5.1 अरब डॉलर रही, जो एक साल पहले 3.1 अरब डॉलर थी। वहीं वाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) से शुद्ध आवक 3.3 अरब डॉलर रही, जो वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही के 4.4 अरब डॉलर की तुलना में कम है।