पश्चिम एशिया में बढ़ते टकराव के मद्देनजर सरकारी अधिकारियों ने आज बहु-मंत्रालयी सहायता डेस्क स्थापित करने की पहल की है ताकि तनाव की वजह से व्यापार में होने वाले व्यवधान से निर्यातकों और आयातकों को निपटने में मदद मिल सके। सहायता डेस्क का नेतृत्व विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के एक वरिष्ठ अधिकारी करेंगे।
ताजा भू-राजनीतिक स्थिति की समीक्षा के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक में निर्यातकों ने पश्चिम एशिया के घटनाक्रम को देखते हुए संकट के प्रति आगाह किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया जाने वाला माल घरेलू बंदरगाहों पर जमा हो गया है और लॉजिस्टिक संबंधित चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। उन्होंने रमजान का महीना होने के कारण खाद्य पदार्थ के निर्यात में आने वाली कठिनाइयों का भी जिक्र किया। दुबई, दोहा प्रमुख एयर कार्गो हब हैं मगर हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंधों के कारण हवाई मार्ग से भेजे जाने वाली खेप पर भी असर पड़ रहा है।
निर्यात क्षेत्र के एक सूत्र के अनुसार पिछले 24 घंटों से मुंद्रा और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट पर पश्चिम एशिया जाने वाले लगभग 3,000 कंटेनर फंसे हुए हैं। शिपिंग कंपनियां चालक दल, कार्गो और जहाजों की सुरक्षा को देखते हुए इस समय ऑर्डर नहीं ले रही हैं।
कंटेनर शिपिंग लाइंस एसोसिएशन (सीएसएलए) के सुनील वासवानी ने भारतीय बंदरगाहों पर फंसे कार्गो की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘अमेरिका को सामान केप ऑफ गुड होप के माध्यम से भेजा जाएगा। मगर सुरक्षा चिंता के कारण पश्चिम एशिया के लिए शिपमेंट रोक दिया गया है।’ उन्होंने कहा कि बंदरगाहों पर लगातार कार्गो पहुंच रहे हैं जिससे वहां भीड़भाड़ बढ़ रही है। बंदरगाह अतिरिक्त जगह प्रदान करने के लिए काम कर रहे हैं।
अमेरिका और इजरायल द्वारा शनिवार को ईरान पर हमला किए जाने और वहां के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बहरीन, कुवैत और कतर सहित खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों को निशाना बनाते हुए हमले शुरू कर दिए। इससे पूरे पश्चिम एशियाई देशों में टकराव का दायरा काफी बढ़ गया।
वाणिज्य विभाग के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि बैठक में कार्गो आवाजाही पर नजर रखने, अनावश्यक देरी को कम करने और निर्यातकों तथा आयातकों के लिए कागजी कार्यवाही और भुगतान प्रक्रिया को सुगम बनाने पर चर्चा की गई।
बैठक के दौरान हितधारकों के बीच मार्ग और क्षमता विकास, अधिभार और उपकरण उपलब्धता की निगरानी के लिए करीबी, वास्तविक समय में समन्वय बनाए रखने पर सहमति बनी। जल्द खराब होने वाली वस्तुओं, दवाओं और उच्च-मूल्य वाले उत्पादों के निर्यातों की सुविधा के लिए तंत्र पर भी चर्चा की गई।
बैठक की अध्यक्षता वाणिज्य विभाग के विशेष सचिव सुचिंद्र मिश्रा और विदेश व्यापार महानिदेशालय के महानिदेशक लव अग्रवाल ने की। बैठक में लॉजिस्टिक संचालकों और शिपिंग कंपनियों, वित्त मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय, जहाजरानी मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक और निर्यात संवर्धन परिषदों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।