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India manufacturing PMI: इकोनॉमी को मिला बड़ा बूस्ट! फरवरी में 56.9 पर पहुंचा PMI

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फरवरी में भारत का मैन्युफैक्चरिंग PMI 56.9 पर पहुंचकर चार महीने के उच्च स्तर पर रहा, जिसमें मजबूत घरेलू मांग ने वृद्धि को सहारा दिया जबकि निर्यात में सुस्ती देखी गई।

Last Updated- March 02, 2026 | 12:20 PM IST
India Manufacturing PMI
Representative Image

India Manufacturing PMI Data: फरवरी में भारत के विनिर्माण क्षेत्र ने मजबूत प्रदर्शन किया है। HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी PMI बढ़कर 56.9 पर पहुंच गया, जो चार महीनों का उच्च स्तर है। जनवरी में यह 55.4 था। 50 से ऊपर का स्तर गतिविधियों में विस्तार को दर्शाता है।

यह सर्वे HSBC के लिए S&P Global द्वारा तैयार किया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार घरेलू मांग में मजबूती के चलते नए ऑर्डर और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

India Manufacturing PMI को घरेलू मांग ने दी मजबूती

HSBC की मुख्य भारत अर्थशास्त्री Pranjul Bhandari ने कहा कि फरवरी का अंतिम PMI आंकड़ा विनिर्माण गतिविधियों में तेजी को दर्शाता है। उनके अनुसार मजबूत घरेलू ऑर्डर के कारण लगातार दूसरे महीने उत्पादन में तेज विस्तार हुआ है।

नए ऑर्डर अक्टूबर के बाद सबसे तेज गति से बढ़े। कंपनियों ने बेहतर दक्षता, मजबूत मांग और तकनीकी निवेश को उत्पादन वृद्धि का प्रमुख कारण बताया।

निर्यात में सुस्ती, वैश्विक असर

हालांकि घरेलू बाजार मजबूत रहा, लेकिन नए निर्यात ऑर्डर की वृद्धि दर 17 महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गई। यह संकेत देता है कि वैश्विक मांग अभी भी दबाव में है। अमेरिका की टैरिफ नीतियों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। हाल ही में भारत पर अमेरिकी शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया गया था, फिर भी निर्यात वृद्धि में तेजी नहीं दिखी।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बाहरी मांग में कमजोरी के कारण रोजगार सृजन की गति सीमित रह सकती है।

कीमतों और रोजगार का हाल

इनपुट लागत में वृद्धि दर स्थिर रही, लेकिन कंपनियों ने अपने उत्पादों की बिक्री कीमतों में चार महीने की सबसे तेज बढ़ोतरी की। मजबूत मांग के कारण वे बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों तक पहुंचाने में सफल रहीं।

रोजगार सूचकांक चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा, लेकिन वृद्धि सीमित रही। केवल लगभग 4 प्रतिशत कंपनियों ने नई नियुक्तियां कीं।

India Manufacturing PMI: अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत

अक्टूबर से दिसंबर तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही थी, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की वृद्धि 13.3 प्रतिशत दर्ज की गई। पूरे वित्त वर्ष के लिए अर्थव्यवस्था के 7.6 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है।

फरवरी का PMI आंकड़ा दर्शाता है कि चालू तिमाही में भी भारतीय अर्थव्यवस्था लचीली बनी रह सकती है। कारोबारी विश्वास भी चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा है, जो आने वाले समय में निवेश और उत्पादन गतिविधियों को समर्थन दे सकता है।

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First Published - March 2, 2026 | 12:20 PM IST

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