भारत के औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर जनवरी में घटकर 3 महीने के निचले स्तर 4.8 प्रतिशत पर आ गई। यह दिसंबर के 26 माह के उच्च स्तर 8 प्रतिशत की तुलना में काफी कम है। खनन, बिजली और विनिर्माण क्षेत्रों के कमजोर प्रदर्शन से वृद्धि दर में नरमी आई। साथ ही आधार का भी कुछ असर रहा। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों से यह सामने आया है।
कुल मिलाकर औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) 169.4 रहा, जो मौजूदा 2011-12 सीरीज के तहत अब तक के सर्वोच्च स्तर 170.7 से मामूली कम है।
सालाना आधार पर विनिर्माण उत्पादन जनवरी में 4.8 प्रतिशत बढ़ा है, जिसमें भारत का 78 प्रतिशत औद्योगिक उत्पादन होता है। यह दिसंबर के 8.4 प्रतिशत की तुलना में कम है। वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 10 महीने में विनिर्माण क्षेत्र 4.9 प्रतिशत बढ़ा है, जो पिछले वित्त वर्ष 2025 की समान अवधि में 4.3 प्रतिशत बढ़ा था।
हालांकि जनवरी 2026 के दौरान बिजली उत्पादन सुधरकर 5.1 प्रतिशत हो गया जबकि एक वर्ष पहले इसी अवधि में यह वृद्धि 2.4 प्रतिशत थी। यह दिसंबर के 18 महीने के उच्च स्तर 6.3 प्रतिशत की तुलना में कम है।
खनन उत्पादन 4.3 प्रतिशत बढ़ा है, जिसमें दिसंबर में 6.9 प्रतिशत वृद्दि हई थी। खनन उत्पादन वित्त वर्ष 2026 के शुरुआती 10 महीनों में 0.7 प्रतिशत बढ़ा है।
उपयोग-आधारित वर्गीकरण के मुताबिक जनवरी, 2026 में प्राथमिक वस्तुओं में 3.1 प्रतिशत, पूंजीगत वस्तुओं में 4.3 प्रतिशत, मध्यवर्ती वस्तुओं में छह प्रतिशत, अवसंरचना/ निर्माण वस्तुओं में 13.7 प्रतिशत और टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं में 6.3 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।
केयरएज रेटिंग्स में मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा, ‘जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाए जाने और रिजर्व बैंक द्वारा दर में कटौती के अनुकूल असर के कारण आगे चलकर खपत को समर्थन जारी रहेगा।’ लांकि उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुओं का उत्पादन 2.7 प्रतिशत घटा। जनवरी, 2026 में आईआईपी वृद्धि में सबसे अधिक सकारात्मक योगदान अवसंरचना एवं निर्माण वस्तुओं, मध्यवर्ती वस्तुओं और प्राथमिक वस्तुओं का रहा।
विनिर्माण क्षेत्र के 23 उद्योग समूहों में से 14 में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। इनमें बुनियादी धातुओं का विनिर्माण (13.2 प्रतिशत), मोटर वाहन एवं ट्रेलर विनिर्माण (10.9 प्रतिशत) और अन्य गैर-धात्विक खनिज उत्पाद (9.9 प्रतिशत) प्रमुख रहे।