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सरकार का दावा: GST सुधार से वित्तीय क्षेत्र में रफ्तार लौटेगी, सस्ती लोन दरों से अर्थव्यवस्था में तेजी

सितंबर में जीएसटी परिषद ने भारतीय अर्थव्यवस्था में खपत को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न श्रेणियों के लिए जीएसटी दरों को उदार बनाया

Last Updated- November 17, 2025 | 9:53 PM IST
GST
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

केंद्र सरकार को उम्मीद है कि हाल में किए गए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधार से वित्तीय क्षेत्र को रफ्तार मिलेगी। इससे एनिमल स्परिट को बल मिलेगा यानी निवेशकों और उपभोक्ताओं में अधिक जोखिम लेने और खर्च करने का रुझान पैदा होगा जिससे आर्थिक वृद्धि में तेजी आएगी। यह बात आर्थिक मामलों के विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर ने कही। उन्होंने कहा कि वैश्विक टैरिफ के कारण पैदा हुई हालिया अनिश्चितताओं ने भारतीय अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित नहीं किया है। इससे हमारी अर्थव्यवस्था और निर्यातकों की मजबूती का पता चलता है।

सितंबर में जीएसटी परिषद ने भारतीय अर्थव्यवस्था में खपत को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न श्रेणियों के लिए जीएसटी दरों को उदार बनाया। इसके अलावा नई कर व्यवस्था के तहत अधिक छूट के जरिये मध्यवर्ग को आयकर में राहत दी गई और रीपो रेट में की गई 100 आधार अंकों की कटौती से ऋण की लागत कम हो गई। बैंकरों का कहना है कि इन उपायों से अर्थव्यवस्था में नई जान आई है। वे चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही के दौरान ऋण वितरण को रफ्तार देकर इस अवसर का फायदा उठाना चाहते हैं।

मुंबई में सीआईआई के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ठाकुर ने कहा कि भारत का वितीय क्षेत्र उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक सबसे स्थिर क्षेत्र बन गया है। उन्होंने कहा, ‘पिछले एक दशक से वितीय क्षेत्र बहीखाते की दोहरी समस्या से ग्रस्त था। मगर उसने अधिक मजबूत, समावेशी और नवोन्मेषी बनने की दिशा में कदम बढ़ाया है। अब वह भारत में आर्थिक बदलाव का उत्प्रेरक और प्रतिबिंब बन गया है।’

उन्होंने कहा कि यह सरकारी बैंकों में पूंजी बढ़ाने, गैर-निष्पादित आस्तियां यानी एनपीए की वसूली व्यवस्था को मजबूत करने, दमदार समाधान प्रक्रिया जैसे तमाम उपायों के कारण संभव हो पाया है। ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालियापन संहिता (आईबीसी) ने भी इसमें एक बड़ी भूमिका निभाई है।

First Published - November 17, 2025 | 9:53 PM IST

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