facebookmetapixel
Budget 2026: 1 फरवरी, रविवार को भी खुले रहेंगे शेयर बाजार, BSE और NSE का बड़ा ऐलानExplainer: ₹14 लाख की CTC वाला व्यक्ति न्यू टैक्स रिजीम में एक भी रुपया टैक्स देने से कैसे बच सकता है?SEBI का नया प्रस्ताव: बड़े विदेशी निवेशक अब केवल नेट वैल्यू से कर सकेंगे ट्रेड सेटलMarket This Week: तिमाही नतीजों से मिला सहारा, लेकिन यूएस ट्रेड डील चिंता से दबाव; सेंसेक्स-निफ्टी रहे सपाटIRFC 2.0: रेलवे से बाहर भी कर्ज देने की तैयारी, मेट्रो और रैपिड रेल में 1 लाख करोड़ का अवसरWipro Q3FY26 results: मुनाफा 7% घटकर ₹3,119 करोड़ पर आया, ₹6 के डिविडेंड का किया ऐलानBudget 2026 से क्रिप्टो इंडस्ट्री की बड़ी उम्मीदें! क्या इसको लेकर बदलेंगे रेगुलेशन और मिलेगी टैक्स में राहत?Value Funds: 2025 में रेंज-बाउंड बाजार में भी मजबूत प्रदर्शन, 2026 में बनेंगे रिटर्न किंग?Tiger Global tax case: सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भारत की टैक्स ट्रीटी नीति में क्या बदला?Defence Stock: हाई से 46% नीचे कर रहा ट्रेड, ब्रोकरेज ने कहा- खरीदने का मौका; अब पकड़ेगा रफ़्तार

राजकोषीय घाटे में कमी बुनियादी सिद्धांतों के लिए बेहतर: फिच रेटिंग्स

RBI के लाभांश से वित्त वर्ष 2025 में भारत का राजकोषीय घाटा जीडीपी के 5.1 फीसदी तक रखने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिल सकेगी।

Last Updated- May 27, 2024 | 11:10 PM IST
fiscal deficit data

फिच रेटिंग्स ने सोमवार को कहा कि अगर टिकाऊ राजस्व बढ़ाने वाले सुधारों के कारण घाटे में कमी जारी रहती है तो यह मध्यावधि के हिसाब से भारत की सॉवरिन रेटिंग के बुनियादी सिद्धांतों के लिए सकारात्मक रहेगा।

रेटिंग एजेंसी ने यह बयान ऐसे समय में दिया है, जब भारतीय रिजर्व बैंक ने केंद्र सरकार को 2.1 लाख करोड़ रुपये लाभांश देने का ऐलान किया है, जो उम्मीद से कहीं ज्यादा है।

फिच रेटिंग्स ने एक बयान में कहा है कि इस लाभांश से वित्त वर्ष 2025 में भारत का राजकोषीय घाटा जीडीपी के 5.1 फीसदी तक रखने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिल सकेगी और इसका इस्तेमाल मौजूदा लक्ष्य से ज्यादा घाटे को कम करने के लिए किया जा सकता है।

फिच रेटिंग्स ने कहा है कि चुनाव के बाद के पूर्ण बजट में नई सरकार के पास दो विकल्प होंगे। सरकार वित्त वर्ष 2025 के लिए मौजूदा राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को बनाए रख सकती है और अप्रत्याशित रूप से मिले धन का इस्तेमाल बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाने में कर सकती है। इससे अचानक आए किसी खर्च या विनिवेश जैसे मदों से उम्मीद से कम धन आने की भरपाई भी हो सकती है।

First Published - May 27, 2024 | 11:10 PM IST

संबंधित पोस्ट