facebookmetapixel
Advertisement
Crude Oil Prices: पश्चिम एशिया में तनाव से कच्चे तेल में उछाल, ब्रेंट और WTI दोनों मजबूतमोबाइल यूजर्स हो जाएं तैयार! Airtel बोला- Unlimited Data सस्ता नहीं रहेगा, ज्यादा इस्तेमाल पर बढ़ सकता है बिलVodafone Idea का बड़ा दांव! 2027 में नेटवर्क विस्तार, कमाई बढ़ाने और ग्राहकों को लुभाने की तैयारीStocks To Watch Today: USFDA की कार्रवाई से Dabur दबाव में, Airtel का बड़ा प्लान; इन शेयरों में आज दिख सकती है तेज हलचलथोक जमा नियमों में आरबीआई का बदलाव, सभी ग्राहकों को मिलेगी समान ब्याज दर की जानकारी15 साल में मजबूत हुई ग्रामीण अर्थव्यवस्था, मौसम का असर पहले से कम: आरबीआई डिप्टी गवर्नरब्रांड वैल्यू में शाहरुख खान नंबर-1, विराट कोहली को पीछे छोड़ हासिल किया पहला स्थानवीजा की बेंगलूरु में बड़ी छंटनी, 1,400 कर्मचारियों की गई नौकरी; एआई पर बढ़ते फोकस का असरई-कॉमर्स निर्यात के लिए विदेशी कंपनियों को बनानी होगी अलग यूनिट एक्सचेंजों पर बंद भाव में बड़ा अंतर ट्रेडरों के लिए कमाई का मौका, आर्बिट्राज ट्रेडिंग में आई तेजी

औद्योगिक उत्पादन में गिरावट

Advertisement
Last Updated- December 11, 2022 | 10:57 PM IST

औद्योगिक उत्पादन की वृद्घि दर अक्टूबर में मामूली घटकर आठ माह के निचले स्तर 3.2 फीसदी पर रही, जो सितंबर में 3.3 फीसदी थी। त्योहारी मौसम के बावजूद पूंजीगत वस्तुओं और वाहन क्षेत्र के कम उत्पादन से विनिर्माण क्षेत्र का प्रदर्शन कमतर रहा।
पिछले साल कोविड संबंधित लॉकडाउन में ढील के बाद उत्पादन बढऩे की वजह से आधार सामान्य होने के कारण भी औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) की वृद्घि सुस्त पड़ी है। अक्टूबर 2020 में आईआईपी 4.5 फीसदी बढ़ा था जबकि सितंबर 2020 में 1 फीसदी की तेजी आई थी।
हालांकि सितंबर 2021 के आईआईपी आंकड़े को संशोधित कर 3.1 फीसदी से बढ़ाकर 3.3 फीसदी कर दिया गया। ऐसे में अगर अस्थायी आंकड़ों से तुलना करें तो सितंबर के मुकाबले अक्टूबर में उद्योगों का उत्पादन बढ़ा है।
चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था में 8.4 फीसदी वृद्घि के बाद भी आंकड़ों से व्यापक सुधार की उम्मीद नहीं जगती है। चालू वित्त वर्ष के पहले सात महीने में औद्योगिक उत्पादन 20 फीसदी बढ़ा है, जबकि पिछले साल समान अवधि में इसमें 17.3 फीसदी का संकुचन आया था। पिछले साल कम आधार की वजह से पहली तिमाही में इसमें जोरदार उछाल देखी गई।
ई-वे बिल जारी करने के आंकड़ों को देखें तो नवंबर में औद्योगिक गतिविधियों में और नरमी आ सकती है। नवंबर में ई-वे बिल अक्टूबर के 7.45 करोड़ से घटकर 6.15 करोड़ रह गए। इसका मतलब है कि तीसरी तिमाही के पहले दो महीनों में औद्योगिक गतिविधियों की वृद्घि नरम हुई है और तीसरी तिमाही में इसका असर जीडीपी के आंकड़ों पर भी दिख सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने पहले ही जीडीपी वृद्घि का अनुमान 6.8 फीसदी से घटाकर 6.6 फीसदी कर दिया है।
अक्टूबर में खनन और बिजली उत्पादन में इजाफा हुआ है जबकि विनिर्माण क्षेत्र की रफ्तार नरम पड़ी है। विनिर्माण के अंतर्गत वाहनों के उत्पादन में गिरावट जारी रही। इस क्षेत्र में अक्टूबर में 12.6 फीसदी की गिरावट आई जो पिछले महीने की 9 फीसदी गिरावट से अधिक है। इसके साथ ही परिवहन उपकरणों के उत्पादन में भी 15.6 फीसदी की गिरावट आई है।
इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ‘वाहन क्षेत्र में आपूर्ति पक्ष की समस्या के कारण अक्टूबर में औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े कम रहे। इसके साथ ही ज्यादा आधार का भी असर पड़ा है।’
पूंजीगत और उपभोक्ता वस्तुओं विशेषकर ड्यूरेबल्स के उत्पादन में ज्यादा उम्मीद नहीं दिखती। अक्टूबर में पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन 1.1 फीसदी घटा है जबकि अक्टूबर में यह 2.4 फीसदी बढ़ा था। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के उत्पादन में 6.1 फीसदी की गिरावट आई। नायर ने कहा कि ये आंकड़े टिकाऊ सुधार के स्पष्ट संकेत नहीं देते हैं।

Advertisement
First Published - December 10, 2021 | 11:27 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement