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अदालत ने 2000 रुपये के नोट वापस लेने के खिलाफ दायर जनहित याचिका खारिज की

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RBI ने 19 मई को दो हजार रुपये के नोटों को चलन से वापस लेने की घोषणा की थी और कहा था कि मौजूदा नोट को 30 सितंबर तक बैंक खातों में जमा किया जा सकता है या बदला जा सकता है।

Last Updated- July 03, 2023 | 1:46 PM IST
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दो हजार रुपये के नोट (Rs. 2000 Notes) को चलन से वापस लेने के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायाधीश सुब्रमण्यम प्रसाद ने याचिका खारिज कर दी। इससे पहले, याचिका पर 30 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।

याचिकाकर्ता रजनीश भास्कर गुप्ता ने दलील दी थी कि RBI के पास दो हजार रुपये के नोट को चलन से वापस लेने की कोई शक्ति नहीं है और इस संदर्भ में केवल केंद्र सरकार ही फैसला कर सकती है। उन्होंने अपनी याचिका में कहा था कि RBI के पास किसी भी मूल्य के बैंक नोट को बंद करने का निर्देश देने की कोई स्वतंत्र शक्ति नहीं है।

यह शक्ति केवल वर्ष 1934 के RBI अधिनियम की धारा 24 (2) के तहत केंद्र सरकार के पास निहित है। याचिका का RBI ने यह कहते हुए विरोध किया था कि दो हजार रुपये के नोट को चलन से वापस लेना ‘मुद्रा प्रबंधन अभियान’ का हिस्सा है और यह आर्थिक योजना से जुड़ा मामला है।

RBI ने 19 मई को दो हजार रुपये के नोटों को चलन से वापस लेने की घोषणा की थी और कहा था कि मौजूदा नोट को 30 सितंबर तक बैंक खातों में जमा किया जा सकता है या बदला जा सकता है। इससे पहले, उच्च न्यायालय ने वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका को खारिज कर दिया था।

याचिका में दावा किया गया था कि बिना किसी साक्ष्य के 2,000 रुपये के बैंक नोट को बदलने की सुविधा देने वाली वाली RBI और SBI की अधिसूचनाएं मनमानी और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए बनाये गये कानून के खिलाफ है। इस बारे में उच्च न्यायालय ने कहा था कि नागरिकों को होने वाली असुविधा से बचाने के लिए ऐसा किया गया है। अदालत ने यह भी कहा कि वह किसी नीतिगत निर्णय पर अपीलीय प्राधिकरण के रूप में कार्य नहीं कर सकती।

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First Published - July 3, 2023 | 1:46 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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