16वें वित्त आयोग ने केंद्र सरकार के लिए राजकोषीय सुदृढ़ीकरण का मार्ग प्रशस्त किया है। इसे विकासात्मक प्राथमिकताओं और राजकोषीय विवेक की अनिवार्यताओं के बीच संतुलन बनाकर हासिल किया जा सकता है। इस क्रम में 2025-26 के बजट अनुमानों को आधार वर्ष मानकर 2026-27 से 2030-31 तक 11 प्रतिशत नॉमिनल जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।
केंद्र सरकार को राजस्व के मोर्चे पर राजस्व घाटा समाप्त करने की सिफारिश की जाती है। राजस्व प्राप्तियां 2025-26 के 34.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2030-31 में 55 लाख करोड़ रुपये बढ़ने का अनुमान जताया गया है। हालांकि राजस्व व्यय 39.4 करोड़ रुपये से बढ़कर 54.6 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान जताया गया है।
इससे राजस्व घाटा आधार वर्ष के 5.24 लाख करोड़ रुपये (जीडीपी के 1.5 प्रतिशत) से गिरकर महज 0.36 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा। इससे वित्त वर्ष 2030-31 तक जीडीपी का 0.1 प्रतिशत का मामूली अधिशेष प्राप्त होगा। रविवार को संसद में पेश की गई अरविंद पानगड़िया के नेतृत्व वाले आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, ‘ इससे राजस्व खाते पर राजकोषीय संतुलन बहाल होगा और केंद्र सरकार के व्यय की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा।’
आयोग का अनुमान है कि प्रभावी राजस्व घाटा (राजस्व घाटे से पूंजीगत व्यय की अनुदानों को घटाकर) आधार वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद के 0.3 प्रतिशत से घटकर उसके कार्यकाल की अवधि के अंतिम वर्ष (2030-2031) में सकल घरेलू उत्पाद के 1.1 प्रतिशत के अधिशेष में बदल जाएगा। आयोग ने महत्त्वपूर्ण रूप से सिफारिश की है कि उसके कार्यकाल की अवधि में केंद्र के पूंजीगत व्यय में वृद्धि जारी रहे।
अनुमान है कि यह 2025-26 में 11.2 लाख करोड़ रुपये (सकल घरेलू उत्पाद के 3.1 प्रतिशत) से बढ़कर 2030-31 तक 23.0 लाख करोड़ रुपये (सकल घरेलू उत्पाद का 3.8 प्रतिशत) हो जाएगा और राज्यों को दिए जाने वाले 50 वर्षीय ब्याज मुक्त ऋण (जैसे एसएएससीआई) 1.7 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 3.4 लाख करोड़ रुपये हो जाएंगे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने जुलाई 2025 में वित्त आयोग को प्रस्तुत अपने ज्ञापन में राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में बहु-क्षेत्रीय परिचालन क्षमताओं को प्राप्त करने के लिए रक्षा व्यय में वृद्धि की आवश्यकता पर जोर दिया था। आयोग ने कहा, ‘हम इस दृष्टिकोण से सहमत हैं और पूंजी खाते पर रक्षा खर्च बढ़ाने की आवश्यकता देखते हैं।’