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2026 से 2031 तक डिफेंस पर कितना खर्च होगा? रक्षा सचिव राजेश कुमार ने बताया

रक्षा बजट को जीडीपी के 2.5% तक ले जाने की तैयारी, आयकर अपीलों के निपटान से लेकर जीएसटी कटौती और भारत–चीन–अमेरिका समीकरण में बदलाव के संकेत

Last Updated- February 03, 2026 | 9:51 AM IST
Rajesh Kumar Singh

केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए आवंटन ने सकल घरेलू उत्पाद में इसकी हिस्सेदारी में गिरावट के रुझान को उलट दिया है। वित्त वर्ष 2026 में जीडीपी का 1.91 फीसदी आवंटन किया गया था जो 2026-27 में करीब 2 फीसदी बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने रक्षा बजट में बढ़ोतरी व तमाम पहलुओं पर भास्वर कुमार से की बात। संपादित अंश:

क्या रक्षा क्षेत्र का आवंटन बढ़ाना ऑपरेशन सिंदूर का अस्थायी परिणाम है या दीर्घकालिक दिशा का संकेत है?

रक्षा मंत्रालय के दृष्टिकोण से हम चाहेंगे कि अगले पांच वर्षों में रक्षा व्यय बढ़कर जीडीपी का 2.5 फीसदी हो जाए। इसका मतलब है कि इस अवधि में 15-20 फीसदी की चक्रवृद्धि वार्षिक दर से आवंटन बढ़े। हम इस लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए वित्त मंत्रालय के साथ काम करेंगे। अपनी ओर से रक्षा मंत्रालय ने प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया है और कभी भी आवंटित धन वापस नहीं हुआ है और आगे भी ऐसा जारी रहेगा।

क्या रक्षा व्यय में वृद्धि का रुझान आगे भी जारी रहने की उम्मीद है?

हम चाहेंगे कि पूंजीगत व्यय घटक आर्थिक वृद्धि दर से ज्यादा रहे। सालाना 15 से 20 फीसदी चक्रवृद्धि दर से बढ़े। बीते 5 साल में वित्त वर्ष 2025 पहला ऐसा साल था जब सशस्त्र बलों के लिए आधुनिकीकरण बजट जो कुल पूंजी खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा होता है, का पूरी तरह से इस्तेमाल किया गया… हमें वित्त वर्ष 2026 में भी पूरी तरह से उपयोग करने में यकीन किया है। हमने संशोधित अनुमानों के चरण में प्रदान किए गए 7,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त धन को ध्यान में रखने के बाद भी पूंजी अधिग्रहण के लिए 80 फीसदी धन का उपयोग किया है।

वित्त वर्ष 2026 में अभी तक लगभग 2.1 लाख करोड़ रुपये के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए जबकि वित्त वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 2.09 लाख करोड़ रुपये के अनुबंध हुए थे। हमें वित्त वर्ष के अंत तक लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये के अनुबंध हासिल करना होगा।

हम अधिक बड़े अनुबंधों पर तेजी से हस्ताक्षर करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इससे विक्रेताओं को आसान भुगतान की सुविधा मिलेगी। आपने आधुनिकीकरण बजट में सामान्य से अधिक वृद्धि का अनुमान लगाया था, जो अब साकार हो गया है। इस मद में वित्त वर्ष 2026 के लिए बजट अनुमानों की तुलना में लगभग 24 फीसदी

अधिक आवंटन किया गया है। इसे कैसे समझा जाना चाहिए?

इस बढ़े हुए आवंटन से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देखी गई युद्ध की बदलती प्रकृति के लिए तैयार होने में मदद मिलेगी। यह मिशन सुदर्शन चक्र के तहत वायु-रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने, भारतीय वायुसेना को अपने लड़ाकू विमान स्क्वाड्रन की ताकत बढ़ाने के लिए आवश्यक अतिरिक्त प्लेटफार्म को पूरा करने और भारतीय नौसेना के पानी के नीचे के हथियारों को बढ़ाने में योगदान देगा। इन कार्यक्रमों और हथियारों की खरीद में अधिकांश व्यय होगा। ज्यादातर व्यय घरेलू फर्मों से खरीद में किया जाएगा।

आधुनिकीकरण बजट का एक बड़ा हिस्सा घरेलू स्रोतों से खरीद के लिए अलग रखने का प्रावधान किया गया है जिसमें 75% मानक लक्ष्य होगा…
वित्त वर्ष 2025 में पूंजीगत खरीद के कुल मूल्य में घरेलू फर्मों की हिस्सेदारी 87 फीसदी थी। यह स्तर कभी भी 75 फीसदी से कम नहीं होगा और हम संभवतः वित्त वर्ष 2026 में भी इसे पार कर जाएंगे।

वेतन और पेंशन अभी भी रक्षा बजट का एक बड़ा हिस्सा हैं। क्या इस मुद्दे का समाधान किया जाएगा?

पूंजीगत खर्च में प्रतिशत वृद्धि पेंशन या वेतन में वृद्धि की तुलना में बहुत अधिक है। वेतन आयोग द्वारा संशोधनों जैसी बाहरी घटनाओं को छोड़कर समग्र रक्षा बजट में इनकी हिस्सेदारी स्वचालित रूप से अधिक वांछनीय स्तर पर आ जाएगी।

First Published - February 3, 2026 | 9:50 AM IST

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