facebookmetapixel
Advertisement
Stocks to Watch Today: Wipro की AI डील, Adani का QIP, TVS का ₹711 करोड़ का दांव; आज इन शेयरों पर रहेगी नजरबैंक ऑफ बड़ौदा में बड़ी सेंधमारी: 1TB डेटा डार्क वेब पर हुआ लीक, जांच में जुटी एजेंसियांHDFC Bank के बोर्ड ने अपने ही अधिकारियों पर की कार्रवाई, MD-CFO पर लगाया 1-1 लाख रुपये का जुर्मानासुप्रीम कोर्ट की दो टूक: शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार मौलिक, आंदोलन के नाम पर पुलिस ज्यादती जायज नहींटाटा पावर का मुनाफा 11% बढ़ा, 2030 तक ट्रांसमिशन में ₹40,000 करोड़ निवेश की तैयारी में कंपनीCoal India Q1 Results: पहली तिमाही में मुनाफा लगभग स्थिर, पर आय में 8.4% की बढ़ोतरीआइकिया इंडिया साल 2030 तक चार गुना राजस्व करने की तैयारी में, 30 स्टोर खोलने का भी लक्ष्यविपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा में पेश हुआ एंटी-पेपर लीक बिल, सजा और जुर्माने को बनाया गया और कठोरजल्द आ सकते हैं 10 और 20 रुपये के नए प्लास्टिक बैंक नोट, सरकार ने RBI को दी मंजूरीलोढ़ा डेवलपर्स डेटा सेंटर की जमीन बेचकर करेगी ₹10,000 करोड़ की कमाई, अगले 3-4 साल में बिक्री का लक्ष्य

तेज हुआ मंदी का इलाज

Advertisement
Last Updated- December 10, 2022 | 8:49 PM IST

मंदी की आहट सुनकर सरकार भी चौकन्नी हो गई है और कम से कम चुनाव से पहले उसे टालने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही है।
इसी सिलसिले में सरकार बैंकों को भी तलब कर रही है, ताकि पिछले 6 महीने में उनकी ओर से दिए गए कर्ज का जायजा लिया जा सके। दरअसल सरकार को लगता है कि बैंक और दूसरे कर्जदाता उद्योगों को पर्याप्त धन मुहैया नहीं करा रहे हैं।
कैबिनेट सचिव के एम चंद्रशेखर इसी मामले में 27 मार्च को बैंकरों और उद्योग जगत के प्रमुखों से मिलने वाले थे। लेकिन वह बैठक अब अगले महीने के लिए टाल दी गई है। इस बारे में पूछने पर चंद्रशेखर ने कहा, ‘हमें असली फिक्र इस बात की है कि हमने जो कुछ किया है, उसकी वजह से पर्याप्त नकदी और फायदा अर्थव्यवस्था को मिलना चाहिए।’
इस बैठक में कुछ निजी और विदेशी बैंकों को भी बुलाया जा सकता है। लेकिन एक सरकारी बैंक के चेयरमैन के मुताबिक सरकार के इस फरमान के कुछ और मायने हैं। उन्हें लगता है कि सरकार ब्याज दरों में और कटौती करने का इशारा बैंकों को कर रही है।
हालांकि कैबिनेट सचिव ने इस मसले पर कुछ और नहीं कहा, लेकिन अधिकारियों के मुताबिक बैंक जोखिम नहीं उठा रहे हैं और रिवर्स रेपो तथा सरकारी प्रतिभूतियों का फायदा उठाते हुए नकदी अपने पास जमा कर रहे हैं। अधिकारी ने कहा कि जब तक बैंक कर्ज नहीं देते, राहत पैकेज का सही असर नहीं दिख सकता।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक तकरीबन 5,00,000 करोड़ रुपये के राहत पैकेज दिए जा चुके हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमान के मुताबिक पिछले वर्ष सितंबर से दरों में कटौती जैसे जो कदम उठाए गए हैं, उनसे बैंकिंग प्रणाली में 3,88,000 करोड़ रुपये की नकदी आनी चाहिए। इसके अलावा सांविधिक तरलता अनुपात (एसएलआर) में कमी करने की वजह से भी कर्ज देने के लिए बैंकों के पास 40,000 करोड़ रुपये आने का अनुमान है।
अधिकारियों के मुताबिक बैंकों के पास जरूरत से ज्यादा एसएलआर है, जिसकी वजह से कर्ज मिलने में परेशानी हो रही है। इसी वर्ष 2 जनवरी को वाणिज्यिक बैंकों की एसएलआर होल्डिंग कुल मांग और देनदारियों की 28.9 फीसदी थी, जबकि मार्च 2008 में यह 27.8 फीसदी ही थी।
दिलचस्प है कि बैंक रिवर्स रेपो के जरिये अपनी अतिरिक्त नकदी रिजर्व बैंक को दे रहे हैं। बैंकों ने आज इसके जरिये 11,605 करोड़ रुपये रिजर्व बैंक के पास रखे, जबकि शुक्रवार को 50,000 करोड़ रुपये रखे गए थे।
सरकार इस बात से भी परेशान है कि निजी और विदेशी बैंक कर्ज पर ब्याज की दरें कम नहीं कर रहे हैं। इसकी वजह से उपभोक्ता खरीदारी में कोताही बरत रहे हैं। हालांकि सरकारी बैंकों ने अपनी प्रधान उधारी दरों में 2 फीसदी तक की कमी की है। लेकिन चुनिंदा निजी बैंकों ने इनमें केवल 0.5 फीसदी की कटौती की है। विदेशी बैंक और भी सुस्त हैं।
सरकारी राहत पैकेजों के बावजूद बैंक नहीं दे रहे पर्याप्त कर्ज
पैकेज से 5,00,000 करोड़, आरबीआई से 4,28,000 करोड़ रुपये की मदद
ज्यादा नकदी पर रिवर्स रेपो के जरिये फायदा उठा रहे बैंक
ज्यादातर बैंक नहीं घटा रहे हैं अपनी प्रधान उधारी दरें

Advertisement
First Published - March 21, 2009 | 5:25 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement