देश की राजधानी गंभीर प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है। इस बीच दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने 2 जनवरी को पांच वाहन कंपनियों और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सायम) के साथ इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) पॉलिसी 2.0 के मसौदे पर चर्चा करने के लिए एक बैठक बुलाई है।
बैठक में जिन कंपनियों को बुलाया गया है, उनमें मारुति सुजूकी इंडिया (एमएसआईएल), होंडा कार्स, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर (टीकेएम), टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (टीपीईएम) और महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (एमऐंडएम) शामिल हैं। इनमें से मारुति सुजूकी, होंडा और टोयोटा अभी भारत में इलेक्ट्रिक कारें नहीं बेचती हैं। दूसरी ओर, जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर, ह्युंडै मोटर इंडिया (एचएमआईएल), किआ इंडिया और बीवाईडी इंडिया जैसी जानी-मानी ईवी कंपनियों को चर्चा के लिए नहीं बुलाया गया है। खास बात यह है कि पॉलिसी को अभी तक आम लोगों या नीति के मसौदे की राय के लिए औपचारिक रूप से जारी नहीं किया गया है और दिल्ली सरकार अभी हितधारकों की सलाह ले रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन से कदम उठाए जा सकते हैं।
फाडा के आंकड़े के अनुसार इस साल अक्टूबर में बिक्री के मामले में टीपीईएम, जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर, एमऐंडएम, किया, बीवाईडी और ह्युंडै मुख्य 6 ईवी कंपनियां थीं।
मारुति को छोड़कर किसी भी कंपनी ने 2 जनवरी की बैठक के बारे में बिजनेस स्टैंडर्ड द्वारा भेजे गए सवालों का जवाब नहीं दिया। कंपनी के एक अधिकारी ने कहा, ‘हम ईवी नीति पर दिल्ली सरकार की पारदर्शिता और हितधारकों के परामर्श का स्वागत करते हैं। हमारी ईवी ई-विटारा तैयार है, जैसा कि पिछले चार महीनों में 12,000 से अधिक इलेक्ट्रिक गाड़ियों के निर्यात से पता चलता है। हमारी ईवी को 5-स्टार बीएनसीएपी सेफ्टी रेटिंग भी मिली है।’ मारुति की पहली इलेक्ट्रिक कार ई-विटारा, 2026 की पहली छमाही में पेश होने की
उम्मीद है।
इसके साथ ही, हम भारत में एक पूरा, एंड-टू-एंड ईवी इकोसिस्टम मजबूत कर रहे हैं ताकि ग्राहक आधिकारिक तौर पर इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से पहले ही उन पर भरोसा कर सकें। इसमें पहले से इंस्टॉल किए गए 2,000 से ज्यादा चार्जर, 2030 तक 100,000 से ज्यादा चार्जिंग पॉइंट तक पहुंचने का एक स्पष्ट रोडमैप, 1,500 से अधिक ईवी-रेडी सर्विस वर्कशॉप और देश भर में 1,50,000 से ज्यादा ईवी ट्रेंड टेक्नीशियन शामिल हैं। अधिकारी ने कहा, ‘हमारा फोकस ग्राहकों को फैसला लेने के समय ही पूरी तरह से मन की शांति देना है और इस तरह देश में ईवी को अपनाने की प्रक्रिया को तेज करना है।’
दिल्ली की ईवी पॉलिसी 2020 (जिसे ईवी पॉलिसी 1.0 भी कहा जाता है) कई बार एक्सटेंशन के बाद अभी लागू है, क्योंकि सरकार ईवी पॉलिसी 2.0 को फाइनल कर रही है। अगस्त 2020 में नोटिफाई की गई ईवी पॉलिसी 1.0 का मकसद इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी लाना, गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को कम करना और एक अनुकूल इकोसिस्टम बनाना था। उसने सभी सेगमेंट में खरीदने पर इंसेंटिव दिए, जिसमें इलेक्ट्रिक दोपहिया के लिए 30,000 रुपये तक, इलेक्ट्रिक तिपहिया के लिए सपाट 30,000 रुपये और ई-साइकिल और हल्के कमर्शियल ईवी के लिए इंसेंटिव शामिल थे। इलेक्ट्रिक कारों के लिए सीमित इंसेंटिव सिर्फ पहली 1,000 गाड़ियों पर लागू थे और अब खत्म हो गए हैं।