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जेपी के लिए सुरक्षा की पेशकश पर मतदान टला

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Last Updated- December 12, 2022 | 4:28 AM IST

सुरक्षा समूह के प्रस्ताव पर लेनदारों की वोटिंग से कुछ घंटे पहले लेनदारों की समिति ने सोमवार को आयोजित आपात बैठक में जेपी इन्फ्राटेक के बोलीदाताओं को नई बोली जमा कराने के लिए एक और मौका देने का फैसला लिया। नई बोली पर इस हफ्ते लेनदारों की समिति के सभी सदस्य वोटिंग करेंगे।
सुरक्षा समूह और एनबीसीसी इंडिया जेपी इन्फ्रा की परिसंपत्तियां खरीदने की दौड़ में हैं, जिसने बैंकों के 22,000 करोड़ रुपये के कर्ज भुगतान में चूक की है और उसे अगस्त 2017 में दिवालिया संहिता के तहत कर्ज समाधान के लिए भेज दिया गया है।
पिछले हफ्ते सीओसी ने सुरक्षा समूह की पेशकश पर सोमवार को मतदान का फैसला लिया था जब मुंबई के समूह ने अपनी प्रतिस्पर्धी एनबीसीसी इंडिया के मुकाबले लेनदारोंं को 1,700 करोड़ रुपये ज्यादा की पेशकश की थी।
एनबीसीसी इंडिया के प्रस्ताव को वोटिंग के लिए नहीं भेजा गया और सीओसी ने उसे खारिज कर दिया क्योंंकि उन्होंने पाया कि यह पेशकश आईबीसी के नियमों व सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के  मुताबिक नहीं है। लेकिन एनबीसीसी ने अपनी पूर्व पेशकश में कुछ जोड़कर भेजा और शुक्रवार रात लेनदारों से कुछ और समय की मांग की।
सोमवार सुबह सीओसी की बैठक एक बार फिर बुलाई गई और दोनों बोलीदाताओं को संशोधित बोली जमा कराने के लिए सात दिन का समय दिया गया। साथ ही एनबीसीसी और सुरक्षा को संशोधित बोली जमा कराने के लिए दिए गए समय पर 28 मई को मतदान कराने का फैसला सीओसी ने लिया है।
अगर वोटिंग के नतीजे में संशोधित बोली की अनुमति नहीं मिलती है तो सुरक्षा की पेशकश को मतदान के लिए रखा जाएगा और अगर संशोधित बोली की अनुमति मिलती है तो 4 जून तक दोनों बोलीदाताओं को संशोधित बोली जमा करानी होगी।
सीओसी की अगली बैठक 7 जून को होगी और आईआरपी सर्वोच्च न्यायालय से 30 दिन का वक्त मांगेंगे। सर्वोच्च न्यायालय ने 24 मार्च को आदेश दिया था कि 45 दिन के भीतर पूरी प्रक्रिया समाप्त हो जानी चाहिए।

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First Published - May 24, 2021 | 11:34 PM IST

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