भारती एयरटेल, रिलायंस जियो और वोडाफोन आइडिया समेत देश की प्रमुख दूरसंचार परिचालक कंपनियां इंटरनैशनल टर्मिनेशन चार्ज (आईटीसी) को मौजूदा 0.65 रुपये प्रति मिनट की सीमा से बढ़ाकर तुरंत ही कम से कम 4 से 5 रुपये प्रति मिनट किए जाने पर जोर दे रही हैं। एआई टूल का इस्तेमाल करते हुए की गई वित्तीय धोखाधड़ी समेत ऐसे मामलों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर उन्होंने यह मांग की है।
आईटीसी ऐसा ऐसा शुल्क होता है, जो कोई भी विदेशी कंपनी भारतीय दूरंसचार कंपनियों के नेटवर्क पर आने वाली कॉल के लिए चुकाती हैं। हालांकि किसी भी विदेशी दूरसंचार सेवा प्रदाता को भारतीय कंपनियों को कम से कम 0.35 रुपये से ज्यादा से लेकर ज्यादा से ज्यादा 0.65 रुपये प्रति मिनट का भुगतान करना होगा। लेकिन अगर भारतीय दूरंचार कंपनियों की कॉल विदेशी दूरसंचार कंपनियों के नेटवर्क पर जाती है, तो यह शुल्क 3 से 3.5 रुपये प्रति मिनट हो जाता है।
उद्योग के अधिकारियों ने कहा कि यह अंतर बहुत ज्यादा है क्योंकि इनकमिंग कॉल की संख्या आउटगोइंग कॉल की तुलना में कहीं ज्यादा है और इसलिए इस क्षेत्र के नियामक को दखल देने की जरूरत है।
जीएसएमए इंडिया कंज्यूमर स्कैम रिपोर्ट 2025 के आंकड़ों के मुताबिक देश में धोखाधड़ी का खतरा बहुत ज्यादा है और 53 प्रतिशत वयस्क जिंदगी भर इसके जोखिम में रहते हैं तथा 42 प्रतिशत का कहना है कि यह खतरा तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट से पता चलता है कि पीड़ित अक्सर मैसेजिंग ऐप (46 प्रतिशत), एसएमएस (37 प्रतिशत), ईमेल (33 प्रतिशत), सोशल प्लेटफॉर्म (33 प्रतिशत) और वॉयस (32 प्रतिशत) का हवाला देते हैं, साथ ही वे सर्च ऐड (19 प्रतिशत), क्यूआर/पेमेंट लिंक (18 प्रतिशत) और डेटिंग ऐप (14 प्रतिशत) का भी जिक्र करते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 10 प्रतिशत लोगों का मानना है कि उन्हें एआई का इस्तेमाल करके धोखाधड़ी का व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाया गया।