एरिक्सन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और मुख्य टेक्नॉलजी ऑफिसर एरिक एकुडेन का कहना है कि दूरसंचार नेटवर्क में एआई को अपनाने में भारत सबसे आगे है और बाकी दुनिया के मुकाबले यहां के ऑपरेटर मजबूत स्थिति में हैं। नई दिल्ली में बिजनेस स्टैंडर्ड की गुलवीन औलख के साथ साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि 5जी नेटवर्क में लगातार निवेश कर रहा भारत उन नेटवर्क पर और अधिक नवाचार को आकर्षित कर सकता है जिससे उसे फायदा होगा। उनसे बातचीत के अंश:
भारतीय दूरसंचार कंपनियों की तुलना वैश्विक टेलीकॉम कंपनियों से करें तो एआई को अपनाने और तैयारियों की स्थिति कैसी है?
भारत 5जी में सबसे आगे है। 5जी पहले से ही भारत के सभी जिलों में लगभग 99.6 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो बहुत महत्त्वपूर्ण है। मुझे लगता है कि 5जी बतौर डिजिटल प्लेटफॉर्म (भारत के लिए एक रेशे की तरह) अच्छी तरह से स्थापित है। इसका मतलब है कि भारत अब एआई को व्यापक रूप से अपनाने के लिए अगला कदम उठाने को तैयार है।
एआई केवल डेटा सेंटर में ही नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं, व्यवसायों, सरकारों और अन्य के लिए भी उपयोगी हो रहा है। उस दृष्टिकोण से भारत एक अच्छी जगह है। अब नेटवर्क में एआई अपनाने पर हमारे ग्राहक यहां- जियो, एयरटेल और वोडाफोन आइडिया- नेटवर्क में एआई के कुछ फायदों का पहले से ही मजा ले रहे हैं क्योंकि इसे हमने अपने उत्पादों में लागू किया है।
भारतीय दूरसंचार कंपनियों के बीच 5जी एडवांस्ड अपनाए जाने को कैसे देखते हैं?
जब हम 5जी एडवांस्ड के बारे में बात करते हैं, तो हम नेटवर्क स्लाइसिंग और खास, अलग सेवा देने की दक्षता जैसी क्षमताओं के बारे में बात करते हैं। उदाहरण के लिए वित्तीय संस्थान, स्वास्थ्य सेवा प्रदाता, कृषि उद्यम और निर्माण इकाइयों को खास प्रदर्शन की जरूरत हो सकती है।
आज के अत्याधुनिक विनिर्माण माहौल में आपको नए 5जी आर्किटेक्चर की जरूरत होती है, जो नेटवर्क स्लाइसिंग और प्रोग्रामेबल नेटवर्क एपीआई के साथ जुड़ा हो। ये ऑपरेटर को सेवा की गुणवत्ता को अनुकूल बनाने, सटीक इनडोर पोजिशनिंग जैसी क्षमताओं में मदद करने और सिक्योरिटी और फ्रॉड मैनेजमेंट जैसे एरिया को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।
एआई से चलने वाला ट्रैफिक आने वाले वर्षों में दूरसंचार नेटवर्क में किस तरह से बदलाव लाएगा। इस बारे में आपका क्या नजरिया है? आपके हिसाब से यह बदलाव नेटवर्क आर्किटेक्चर और परिचालन को किस हद तक बदल देगा?
हमारा अनुमान है कि एआई-केंद्रित यूज केस ट्रैफिक पैटर्न में बड़ा बदलाव लाएंगे। खासकर अपलिंक ट्रैफिक – रोबोट, स्मार्टफोन, एआई ग्लास या सेंसर जैसे डिवाइस से नेटवर्क पर भेजे गए डेटा-के डाउनलिंक ट्रैफिक की तुलना में तेजी से बढ़ने की संभावना है। हमारा अनुमान है कि अगले पांच साल में दुनिया भर में अपलिंक ट्रैफिक औसतन लगभग तीन गुना बढ़ सकता है, जबकि डाउनलिंक ट्रैफिक में लगभग दो गुना वृद्धि हो सकती है।
इस बदलाव का मतलब है कि नेटवर्क को ज्यादा मजबूत अपलिंक क्षमता के साथ डिजाइन किया जाना चाहिए। ऑपरेटरों को न सिर्फ डाउनलिंक क्षमता के लिए बल्कि अपलिंक प्रदर्शन के लिए भी अनुकूल टेक्नॉलजी की जरूरत होगी।
एरिक्सन में हमने खास तौर पर अपलिंक एफिशिएंसी और उपयोगकर्ता अनुभव को बेहतर बनाने के लिए सॉल्युशन विकसित किए हैं। इसका एक उदाहरण हमारी एफडीडी मैसिव एमआईएमओ (जिसे अक्सर एफडी-एमआईएमओ भी कहा जाता है) टेक्नॉलजी है। यह कम-फ्रीक्वेंसी वाले एफडीडी बैंड के लिए एक एडवांस्ड बीमफॉर्मिंग सॉल्युशन है, जो स्पेक्ट्रम दक्षता बढ़ाता है और अपलिंक कवरेज और क्षमता दोनों को बेहतर बनाता है।