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टाटा स्टील नीदरलैंड का रहेगा बड़ा योगदान : कौशिक चटर्जी

कंपनी के कार्यकारी निदेशक और मुख्य वित्तीय अधिकारी का कहना है कि टाटा स्टील नीदरलैंड लाभदायक कारोबार है और परियोजना में इसकी अहम भूमिका होगी

Last Updated- October 10, 2025 | 10:37 PM IST

टाटा स्टील ने हाल में नीदरलैंड सरकार के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे इज्मुइडेन में डीकार्बोनाइजेशन यानी कार्बन-मुक्त होने की योजना के पहले चरण के लिए 2 अरब यूरो तक की सरकारी सहायता का रास्ता खुल गया है। एक वीडियो साक्षात्कार में कंपनी के कार्यकारी निदेशक और मुख्य वित्तीय अधिकारी कौशिक चटर्जी ने ईशिता आयान दत्त को बताया कि नीदरलैंड में कम कार्बन उत्सर्जन में बदलाव के लिए सरकारी वित्त पोषण क्यों महत्त्वपूर्ण है और प्रस्तावित यूरोपीय संघ के निष्पक्ष व्यापार नियम इसके संचालन को कैसे रफ्तार दे सकते हैं। बातचीत के अंश :

संयुक्त आशय पत्र (जेएलओआई) पर हस्ताक्षर के बाद इस प्रक्रिया में अगले चरण क्या हैं?

नीदरलैंड सरकार के साथ इस विशेष समझौते के प्रावधानों और नीतिगत शर्तों पर बातचीत नई सरकार बनने के बाद शुरू की जाएगी।

डच सरकार ने परियोजना में कुल 4-6.5 अरब यूरो के निवेश का अनुमान लगाया है। क्या यह पहले चरण के लिए है और इसके पूरा होने की संभावित समय-सीमा क्या है?

मैं इस समय पूंजीगत व्यय या निवेश पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा क्योंकि हम इंजीनियरिंग चरण में हैं, जिसे अंतिम रूप देने में कुछ समय लगेगा। मौजूदा डीकार्बोनाइजेशन का दायरा एक ब्लास्ट फर्नेस को कम कार्बन स्टील निर्माण की संरचना में बदलना है, जबकि दूसरे ब्लास्ट फर्नेस में बदलाव पूरा होने में कम से कम एक दशक लगेगा।

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क्या नीदरलैंड के आगामी चुनाव जेएलओआई पर अमल के लिए कोई खतरा हैं?

गैर-बाध्यकारी जेएलओआई एक लंबी, राजनीतिक और नियामक प्रक्रिया में पहली सफलता है। इसमें दोनों पक्ष उस परिदृश्य पर सहमत हुए हैं जिस पर वे काम करना चाहते हैं, यानी लक्ष्य और उद्देश्य। यह कई उप-परियोजनाओं वाली एक एकीकृत परियोजना है और विशेष रूप से तैयार समझौते पर डच संसद और यूरोपीय आयोग की निगरानी रहेगी।

कंपनी की दीर्घाव​धि यूरोपीय रणनीति के लिहाज से टाटा स्टील नीदरलैंड (टीएसएन) के लिए सरकारी समर्थन कितना जरूरी है?

डीकार्बोनाइजेशन ट्रांजिशन में कंपनियां क्षमता नहीं बढ़ातीं, बल्कि कम कार्बन प्रक्रिया वाली टेक्नोलॉजी जैसे कि डीआरआई (डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन) और इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (इस मामले में) में बदलाव करती हैं ताकि उस कार्बन इकॉनमी को संरचनात्मक रूप से संबोधित किया जा सके जहां उसका महत्त्व होता है। यूरोप में डीकार्बोनाइजेशन परियोजनाओं को आमतौर पर सरकार द्वारा आंशिक रूप से वित्त पोषित किया जाता है क्योंकि यह देशों को राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) हासिल करने में भी मदद करता है।

 ब्रिटेन के विपरीत आप नीदरलैंड के संचालन में ज्यादा आत्मनिर्भर रहे हैं…

हां, दोनों मामले बहुत अलग हैं। ब्रिटेन में अपस्ट्रीम परिसंपत्तियों में जीवनकाल की समस्याएं थीं जिन्हें कम कार्बन तकनीक से बदला जा रहा है जो ब्रिटेन में स्टील स्क्रैप की उपलब्धता और ब्रिटेन सरकार के वित्तीय सहयोग का लाभ उठाकर व्यवहार्यता बढ़ाएगी। नीदरलैंड में ढांचा बहुत बड़ा है और उत्पाद मिश्रण की सबस्ट्रेट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए परियोजना कॉन्फ़िगरेशन बहुत अलग है। टाटा स्टील नीदरलैंड एक लाभदायक कारोबार है और परियोजना में महत्त्वपूर्ण योगदान देगा, लेकिन परियोजना के लिए सरकार की वित्तीय मदद जरूरी है।

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आप बाध्यकारी समझौते को कब अंतिम रूप देंगे?

नीदरलैंड सरकार के साथ बातचीत में तय किए गए संयुक्त आशय पत्र (जेएलओआई) में दोनों पक्षों को एक साल का समय मिला है ताकि वे इंजीनियरिंग सहित सभी शर्तों को सुलझा सकें और फिर उसके बाद ही विशिष्ट समझौते और अंतिम निवेश निर्णय पर पहुंचा जाएगा।

आप नीदरलैंड में किस तरह के नीतिगत बदलाव चाहते हैं?

यह जरूरी है कि यूरोपीय संघ जैसे आर्थिक क्षेत्र में कंपनियों को समान अवसर मिलें। यह प्रमुख नीतिगत मांग है ताकि ऊर्जा लागत, विशेष रूप से नेटवर्क लागत, सीओ2 पर अतिरिक्त शुल्क आदि पर कोई असमानता न हो।

First Published - October 10, 2025 | 10:19 PM IST

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