रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) की 45वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) का आयोजन 29 अगस्त को वर्चुअल तरीके से किया जाएगा। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को इसकी जानकारी दी है। हालांकि एजीएम के लिए नोटिस और वित्त वर्ष 2022 के लिए वार्षिक रिपोर्ट रिपोर्ट अभी जारी नहीं की गई है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बैठक के दौरान नई ऊर्जा और 5जी का मुद्दा सुर्खियों में रहेगा।
पिछले साल की वार्षिक आम बैठक में आरआईएल ने अपनी नई ऊर्जा नीति के तहत अगले तीन वर्षों के दौरान अक्षय ऊर्जा में 75,000 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की थी। ब्रोकरेज फर्म केआर चोकसी के प्रबंध निदेशक देवन चोकसी ने कहा कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा और अक्षय ऊर्जा पर सरकार के जोर को देखते हुए इस निवेश में वृद्धि की जा सकती है। पिछले सप्ताह ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2022 को संसद के पटल पर रखा गया। इसके तहत सभी उद्योगों के लिए एक निश्चित सीमा तक हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया एवं बायोमास जैसे अक्षय ऊर्जा के उपयोग को अनिवार्य किया गया है।
आरआईएल ने इससे पहले कहा था कि वह एक दशक के भीतर ग्रीन हाइड्रोजन की लागत को घटाकर 1 डॉलर प्रति किलोग्राम के दायरे में ले जाएगी। चोकसी का मानना है कि इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है क्योंकि अदाणी न्यू इंडस्ट्रीज जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनी भी अगले 10 वर्षों के दौरान ग्रीन हाइड्रोजन में 50 अरब डॉलर यानी करीब 3.9 लाख करोड़ रुपये का निवेश करने की तैयारी कर रही है।
जहां तक 5जी का सवाल है तो रिलायंस जियो जनवरी 2023 तक देश के नौ शहरों में अपनी 5जी सेवाओं की पेशकश करने की योजना बना रही है और इसकी शुरुआत दिल्ली व मुंबई से होगी। प्रतिस्पर्धी दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल पहले ही संकेत दे चुकी है कि वह अगस्त के अंत तक अपनी 5जी सेवाओं की शुरुआत करेगी जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा की धार बढ़ेगी। विश्लेषकों का मानना है कि आरआईएल अपनी आगामी एजीएम में 5जी एंटरप्राइज एवं उपभोक्ता मोबिलिटी समाधान से संबंधित कई घोषणाएं कर सकती है।
इसके अलावा कंपनी अपने खुदरा एवं दूरसंचार कारोबार के लिए भविष्य की योजनाओं का भी खुलासा कर सकती है। इन दोनों कारोबारों का संचालन अलग-अलग इकाइयों- जियो प्लेटफॉर्म्स और रिलायंस रिटेल वेंचर्स- के तहत किया जा रहा है।
ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन ने हाल में कहा था कि उसे नहीं लगता है कि कंपनी अपने खुदरा एवं दूरसंचार कारोबार के आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) के लिए कोई निश्चित समय-सीमा का खुलासा करेगी। हालांकि वह भविष्य की रूपरेखा प्रस्तुत करेगी।
विश्लेषकों का यह भी मानना है कि कंपनी ऑयल टु केमिकल्स (ओ2सी) कारोबार को अलग करने की योजना को आगे बढ़ा सकती है जिसे पिछले साल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम ने कहा, ‘आरआईएल ने पिछले साल अपने ऑयल टु केमिकल कारोबार को अलग करने की योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। लेकिन वह इस साल उस योजना पर विचार कर सकती है।’