टाटा संस की तरफ से एयर इंडिया के अधिग्रहण पर विश्लेषकों ने खुशी जताई है और कहा है कि दिग्गज समूह ने आकर्षक कीमत पर मुश्किल में फंसी सरकारी कंपनी एयर इंडिया का अधिग्रहण किया है। उनका कहना है कि यह सौदा दोनों के लिए बेहतर है – सरकार और टाटा संस। साथ ही इससे वित्त वर्ष 2021-22 की विनिवेश प्रक्रिया में तेजी लाने में मदद मिल सकती है। साथ ही इससे एक्सचेजों पर ज्यादातर सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसई) के शेयरों की दोबारा रेटिंग हो सकती है।
आईडीबीआई कैपिटल के शोध प्रमुख ए के प्रभाकर ने कहा, एयर इंडिया का सौदा हो जाना अपने आप में बड़ी प्रगति है और इससे पीएसई की दोबारा रेटिंग हो सकती है, खास तौर से भारत पेट्रोलियम, कंटेनर कॉरपोरेशन, शिपिंग कॉरपोरेशन, सेल, हिंदुस्तान कॉपर आदि, जहां सरकार पहले ही अपनी हिस्सेदारी के विनिवेश का इरादा जता चुकी है। इसके अलावा जिन बैंंकों की रकम नुकसान उठाने वाली इकाइयों में फंसी है, उसे भी कुछ राहत मिलेगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, एयर इंडिया व बीपीसीएल के अलावा शिपिंग कॉरपोरेशन, कंटेनर कॉरपोरेशन, आईडीबीआई बैंक, बीईएमएल, पवन हंस, नीलाचल इस्पात निगम कुछ अन्य सार्वजनिक कंपनियां हैंं जिनमें सरकार अपनी हिस्सेदारी घटा सकती है। वित्त वर्ष 22 के लिए विनिवेश का लक्ष्य 1.75 लाख करोड़ रुपये का है।
एयर इंडिया की बिक्री 18,000 करोड़ रुपये के एंटरप्राइज वैल्यू पर होगी, जिसमें से 15,300 करोड़ रुपये का कर्ज बोली जीतने वाली कंपनी लेगी। टाटा संस बाकी 2,700 रुपये नकद भुगतान करेगी। एंटरप्राइज वैल्यू किसी कंपनी की कुल कीमत होती है, जिसमें न सिर्फ कंपनी का बाजार पूंजीकरण शामिल होता है बल्कि अल्पावधि व लंबी अवधि का कर्ज और कंपनी की बैलेंस शीट में दर्ज नकदी शामिल होती है।
इक्विनॉमिक्स के संस्थापक व मुख्य निवेश अधिकारी जी चोकालिंगम ने कहा, इस सौदे से टाटा को एयर इंडिया की हिस्सदारी और उसकी लो कॉस्ट इकाई एयर इंडिया एक्सप्रेस, ग्राउंड हैंडलिंग कंपनी आदि मिलेगी, इसे देखते हुए टाटा के लिए यह सौदा काफी आकर्षक है। यह देखते हुए कि टाटा की पहले से ही एयर एशिया व विस्तारा में हिस्सेदारी है, एयर इंडिया के अधिग्रहण से विमानन क्षेत्र में उसकी स्थिति और मजबूत होगी। अगर टाटा संस अपने सभी विमानन कारोबारों को एकीकृत कर उसे एक्सचेेंजों पर सूचीबद्ध कराती है तो हमारे सामने टीसीएस जैसी एक अन्य दिग्गज कंपनी होगी। अगर सरकार ने एयर इंडिया के लिए समाधान खोज लिया है तो उसे अन्य इकाइयों के विनिवेश का रास्ता भी मिल सकता है। एयर इंडिया की बिक्री सरकार के विनिवेश एजेंडे के लिए भी बेहतर है।