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भुगतान नियम पर सकारात्मक प्रतिक्रिया

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45 दिन के भुगतान चक्र को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया

Last Updated- June 18, 2024 | 10:58 PM IST
MSMEs

नियमों में बदलाव की मांग के बीच सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय को एमएसएमई के लिए 45 दिन के भुगतान चक्र को लागू करने को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। हालांकि यह जानकारी देने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह भी कहा कि वित्त विधेयक में कोई भी बदलाव करना वित्त मंत्रालय का विशेषाधिकार है।

अधिकारी ने कहा, ‘फिलहाल 45 दिन में भुगतान करने के नियम को लागू करने को लेकर हमें उद्योग से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। वे बहुत खुश हैं। बजट में कोई बदलाव किया जाएगा, या नहीं, यह पूरी तरह से वित्त मंत्रालय के विवेकाधीन है।’

वित्त वर्ष 2023 के बजट में सरकार ने आयकर अधिनियम की धारा 43 बी में नया खंड (एच) जोड़ा था, जिससे कि एमएसएमई को भुगतान में होने वाली देरी की समस्या से निपटा जा सके। इस देरी के कारण एमएसएमई की कार्यशील पूंजी और कारोबार में वृद्धि पर बुरा असर पड़ता है।

आकलन वर्ष 2024-25 (वित्त वर्ष 2023-24) के लिए 1 अप्रैल, 2024 से प्रभावी खंड (एच) में कहा गया है कि सूक्ष्म और लघु उद्यमों से प्राप्त बिलों पर क्रेताओं के द्वारा व्यय का दावा केवल तभी किया जा सकता है, जब इसका भुगतान करार होने पर 45 दिनों के भीतर किया गया हो तथा करार न होने की स्थिति में 15 दिनों के भीतर किया गया हो।

इस सिलसिले में एमएसएमई मंत्रालय को भेजे गए ई-मेल का जवाब खबर छपने तक नहीं मिल सका। छोटे और मझोले कारोबारियों के लिए गैर लाभकारी , गैर सरकारी संगठन इंडिया एसएमई फोरम (आईएसएफ) ने अपने परिषद के 102 सदस्यों के बीच सर्वे कराया। सर्वे के मुताबिक 93 सदस्यों ने नियम का समर्थन किया, 5 ने संशोधन का सुझाव दिया और 4 इस आयकर संशोधन को वापस लिए जाने के पक्ष में थे।

इंडिया एसएमई फोरम के अध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा, ‘पिछले दो दशक से हम खरीदारों से 45 दिन की सीमा का पालन कराने का प्रयास कर रहे हैं और भुगतान में देरी एमएसएमई के लिए अभिशाप बन गई है। आईटी ऐक्ट में यह प्रावधान किया जाना सरकार द्वारा बहुत समय से उठाया गया कदम है और यह पूरे सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए भारत में बेहतर वातावरण बनाने के लिए बहुत ज्यादा लाभदायक साबित होगा।’

डेलॉयट इंडिया में पार्टनर सुमित सिंघानिया ने कहा कि 2023 के वित्त अधिनियम में बदलाव इस मकसद से किया गया है कि समय से एमएसएमई को नकदी मिल सके। उन्होंने कहा, ‘बहरहाल इस कानूनी बदलाव को लागू करने में कुछ मसले सामने आ रहे हैं, जिनके समाधान की जरूरत है।’

सर्वे में हिस्सा ले चुके वाईएमके सॉल्यूशंस के युवराज काशिवा ने कहा कि खरीदारों में वित्तीय अनुशासन तेज करने की अहम भूमिका है और इससे एसएमई को भुगतान में देरी की समस्या से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘इसे आगे और मजबूत किए जाने से समय सीमा का पालन किया जाना सुनिश्चित हो सकेगा।’

जालाराम एक्सपोर्ट्स के रिद्धि मजीठिया ने कहा कि 45 दिन में भुगतान का नियम ऐसे नए उद्यमियों के लिए जीवनदायिनी है जिनके ग्राहकों से अच्छे संबंध स्थापित न हो पाए हों। उन्होंने कहा ‘मौजूदा संबंध क्रेडिट बढ़ा सकते हैं, लेकिन भुगतान के लिए 45 दिन पर्याप्त हैं। इससे कार्यशील पूंजी का प्रवाह सुनिश्चित हो सकेगा और लेनदेन का चक्र गतिशील और प्रभावी बनेगा। इससे सबसे लिए कारोबार का बेहतर माहौल बनेगा।’

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First Published - June 18, 2024 | 10:39 PM IST

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