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2050 तक भारत में तेल की मांग दोगुनी होकर 90 लाख बैरल प्रतिदिन होने का अनुमान

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ऊर्जा क्षेत्र की वैश्विक दिग्गज बीपी को उम्मीद है कि देश में प्राकृतिक गैस की खपत 2050 तक 1 से 3 प्रतिशत सालाना दर से बढ़ेगी, जिसमें औद्योगिक मांग वृद्धि की प्रमुख चालक होगी

Last Updated- October 06, 2025 | 11:13 PM IST
Strait of Hormuz Crude Oil
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

ऊर्जा क्षेत्र की वैश्विक दिग्गज बीपी के मुख्य अर्थशास्त्री स्पेंसर डोल ने कहा कि भारत में तेल की मांग 2023 के 50 लाख बैरल प्रतिदिन से बढ़कर 2050 में 90 लाख बैरल प्रति दिन  होने की उम्मीद है। यह कुल वैश्विक खपत का 10 प्रतिशत होगा।

बीपी के मौजूदा ट्रैजेक्ट्री के मुताबिक भारत की ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत कोयला बना रह सकता है।  2050 में कुल ऊर्जा मिश्रण में इसकी हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से ऊपर रहेगी, जबकि ‘2 डिग्री से नीचे’ परिदृश्य में यह तेजी से गिरकर 16 प्रतिशत रह जाएगी। ‘मौजूदा ट्रैजेक्ट्री’ उस व्यापक राह को दिखाता है, जिस पर वैश्विक ऊर्जा प्रणाली वर्तमान में चल रही है, जबकि ‘2 डिग्री से नीचे’ परिदृश्य यह पता लगाता है कि यदि दुनिया उत्सर्जन में बहुत अधिक कटौती करती है तो प्रणाली कैसे विकसित हो सकती है।

बीपी को उम्मीद है कि देश में प्राकृतिक गैस की खपत 2050 तक 1 से 3 प्रतिशत सालाना दर से बढ़ेगी, जिसमें औद्योगिक मांग वृद्धि की प्रमुख चालक होगी।  

बीपी ने कहा कि भारत की प्राथमिक ऊर्जा खपत तेजी से बढ़ेगी। दोनों परिदृश्यों में 2023 के 7 प्रतिशत से बढ़कर 2050 तक देश की मांग, वैश्विक मांग का 12 प्रतिशत होगी। 

ऊर्जा दिग्गज ने कहा कि तेज आर्थिक वृद्धि और बढ़ती समृद्धि के कारण हर परिदृश्य में भारत में तेल की मांग बढ़ेगी। 

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First Published - October 6, 2025 | 11:13 PM IST

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