facebookmetapixel
Advertisement
Credit Card Tips: क्या सच में फ्री होती है No Cost EMI? शर्तें पढ़े बिना न करें खरीदारीअब विदेशों में छाएगी यूपी की व्हिस्की, योगी सरकार की नई एक्सपोर्ट नीति से खुलेंगे दरवाजेदिसंबर संकट के बाद इंडिगो की बड़ी उड़ान, 1000 से ज्यादा पायलटों की भर्ती का ऐलानरेरा पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, रियल एस्टेट सेक्टर में बढ़ेगी जवाबदेहीनिफ्टी में आईटी सेक्टर की पकड़ कमजोर, 26 साल के निचले स्तर पर पहुंचा वेटेजQ3 में मजबूत प्रदर्शन के बाद इंफोसिस ने कर्मचारियों को औसतन 85% बोनस देने का ऐलान कियाFY26 में शहरी भारत देगा GDP का 70% योगदान, डन एंड ब्रैडस्ट्रीट की रिपोर्ट में बड़ा अनुमानBest FD Rates: एफडी में 8.95% तक ब्याज, फरवरी 2026 में कहां मिल रहा सबसे ज्यादा रिटर्न?मिडकैप निवेशकों के लिए बड़ी खबर, BSE लॉन्च करेगा नया इंडेक्स डेरिवेटिववैलेंटाइन डे से पहले ई-कॉमर्स बिक्री 60% तक बढ़ी, फूल-चॉकलेट की मांग में उछाल

BHIM ऐप को सहायक कंपनी बनाएगी NPCI, PhonePe और Google Pay को मिलेगी टक्कर!

Advertisement

इस घटनाक्रम से अवगत एक सूत्र ने कहा, ‘भीम एक अलग कंपनी होगी। इसे प्रमुख भुगतान ऐप्लिकेशन के रूप में विकसित करने पर अधिक ध्यान दिया जाएगा।

Last Updated- August 12, 2024 | 6:37 AM IST
BHIM

नैशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) स्वदेशी भुगतान ऐ​प्लिकेशन भारत इंटरफेस फॉर मनी (भीम) को एक सहायक कंपनी के तौर पर अलग करने की तैयारी में है। भीम ऐप देश में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की योजना बना रहा है और इसलिए यह पहल की जा रही है।

सूत्रों ने बताया कि एनपीसीआई ने ललिता नटराज को नई सहायक कंपनी की मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया है। नटराज इससे पहले आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के साथ काम कर चुकी हैं।

इस घटनाक्रम से अवगत एक सूत्र ने कहा, ‘भीम एक अलग कंपनी होगी। इसे प्रमुख भुगतान ऐप्लिकेशन के रूप में विकसित करने पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। सरकार और आरबीआई दोनों इस ऐप के विकास को रफ्तार देने के इच्छुक हैं।’ एनपीसीआई ने इस बाबत जानकारी के लिए बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा भेजे गए सवालों का खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं दिया।

एनपीसीआई ब्रांड के तहत एक नई सहायक कंपनी स्थापित करने का निर्णय ऐसे समय में लिया गया है, जब यह भुगतान संगठन देश के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) बाजार में कंसंट्रेशन रिस्क यानी कुछ कंपनियों के एका​धिकार की चुनौती का सामना कर रहा है।

एक अन्य सूत्र ने अपनी पहचान जाहिर न करने की शर्त पर कहा, ‘हमारी योजना भारत के भुगतान परिवेश में दो अमेरिकी कंपनियों- गूगल और वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली फोनपे- पर अ​त्य​धिक निर्भरता को कम करना है। अगर कोई और ऐसा नहीं कर रहा है तो एनपीसीआई क्यों न अपने इस ब्रांड को आगे बढ़ाए।’

फिलहाल फोनपे और गूगल पे भारत में कुल मिलाकर करीब 85 फीसदी यूपीआई लेनदेन को प्रॉसेस करते हैं। इससे उद्योग में केवल दो कंपनियों के वर्चस्व को लेकर चिंता बढ़ गई है। जून में फोनपे ने 6.7 अरब और गूगल पे ने 5.1 अरब यूपीआई लेनदेन को प्रॉसेस किए। इसके मुकाबले भीम ऐप ने महीने के दौरान महज 2.27 करोड़ यूपीआई ​​लेनदेन को प्रॉसेस किया जो कुल भुगतान का महज 0.16 फीसदी है।

सूत्रों ने यह भी कहा कि भीम ऐ​प्लिकेशन को अब नया रूप दिया जा रहा है। नई सहायक कंपनी एनपीसीआई ब्रांड के तहत अपना परिचालन जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि इस ऐप्लिकेशन के परिचालन में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

हालांकि एक सूत्र ने कहा, ‘कुछ बदलाव हो सकते हैं। ​फिलहाल सभी टर्नओवर एनपीसीआई के भीतर दर्ज किए जाते हैं। मगर एक अलग कंपनी बनने के बाद उसका अपना बहीखाता, लागत ढांचा आदि होंगे। अपने मौजूदा अवतार में भीम ऐप एनपीसीआई ही है।’

एनपीसीआई द्वारा विकसित भीम ऐप को प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में लॉन्च किया था। इस ऐप का उपयोग सीधे तौर पर बैंक भुगतान करने और यूपीआई नेटवर्क पर मौजूद किसी भी व्यक्ति से रकम मंगाने में किया जा सकता है।

यह कोई पहला अवसर नहीं है जब एनपीसीआई ने एक नई सहायक कंपनी बनाकर अपने कारोबार को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया है। साल 2021 में उसने भारत बिल पेमेंट सिस्टम (बीबीपीएस) लेनदेन को एनपीसीआई भारत बिलपे लिमिटेड (एनबीबीएल) नाम की एक नई सहायक कंपनी को हस्तांतरित कर दिया। इससे उसका स्वचालित बिल भुगतान कारोबार अलग हो गया था।

एनबीबीएल एनपीसीआई की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। उसी साल एनपीसीआई ने पेयू और एयरटेल पेमेंट्स बैंक की पूर्व वरिष्ठ अ​धिकारी नूपुर चतुर्वेदी को एनबीबीएल का सीईओ नियुक्त किया था।

Advertisement
First Published - August 12, 2024 | 6:37 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement