facebookmetapixel
Mutual Fund होंगे रिटायरमेंट का नया सहारा?Economic Survey 2026: फाइनैंशियल सेक्टर के लिए SMC Bill बन सकता है नया रेगुलेटरी गवर्नेंस मॉडलBudget 2026: ‘2047 तक सबके लिए बीमा’ को पूरा करने के लिए इंश्योरेंस सेक्टर की प्रमुख मांगे क्या हैं?Share Market: बजट से पहले बाजार में रिकवरी, L&T और बैंकिंग शेयरों में तेजीEconomic Survey 2026: AI डेटा सेंटर्स की बढ़ती बिजली मांग से दुनिया में तांबे की कमी का खतराWorld Gold Demand: सोने की ग्लोबल मांग ने भी बनाया रिकॉर्ड, पहली बार 5,000 टन के पारBudget 2026: क्या घर खरीदना होगा सस्ता? टैक्स छूट व GST कटौती पर रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ी उम्मीदेंVedanta Q3FY26 results: मुनाफा 60% बढ़कर ₹7,807 करोड़ पर पहुंचा, रेवेन्यू भी बढ़ाEconomic Survey 2026: FPI इनफ्लो में बना रहेगा उतार-चढ़ाव, FDI निवेश को बढ़ावा देने पर सरकार का फोकसRTI कानून की दोबारा हो समीक्षा- इकोनॉमिक सर्वे, संभावित बदलावों के दिये सुझाव

केएएल, मारन के दावों का कोई कानूनी औचित्य नहीं : स्पाइसजेट

स्पाइसजेट ने मंगलवार को शेयर बाजार को बताया कि वह केएएल एयरवेज और मारन द्वारा 1,323 करोड़ रुपये का हर्जाना मांगने के दावों का दृढ़ता से खंडन करती है।

Last Updated- May 28, 2024 | 10:43 PM IST
SpiceJet

विमानन कंपनी स्पाइसजेट ने मंगलवार को कहा कि केएएल एयरवेज और कलानिधि मारन के 1,323 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान के दावे निराधार हैं और इनका कोई कानूनी औचित्य नहीं है।

केएएल एयरवेज और कलानिधि मारन ने सोमवार को कहा था कि वे स्पाइसजेट और उसके प्रमुख अजय सिंह से 1,323 करोड़ रुपये से अधिक का हर्जाना मांगेंगे। साथ ही दोनों पक्षों के बीच जारी विवाद मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के हाल के आदेश को चुनौती देंगे।

स्पाइसजेट ने मंगलवार को शेयर बाजार को बताया कि वह केएएल एयरवेज और मारन द्वारा 1,323 करोड़ रुपये का हर्जाना मांगने के दावों का दृढ़ता से खंडन करती है। विमानन कंपनी ने कहा, ‘इन दावों का कोई कानूनी औचित्य नहीं है। वे मध्यस्थ न्यायाधिकरण और फिर दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा पहले ही खारिज किए गए दावों को दोहरा रहे हैं।’

स्पाइसजेट ने कहा, ‘ केएएल एयरवेज और मारन ने शुरुआत में मध्यस्थता कार्यवाही के दौरान 1,300 करोड़ रुपये से अधिक के मुआवजे की मांग की। इस दावे की गहन जांच की गई और बाद में उच्चतम न्यायालय के तीन सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की एक पीठ ने इसे खारिज कर दिया।

इसके बाद केएएल एयरवेज और कलानिधि मारन ने दिल्ली उच्च न्यायालय के एकल-न्यायाधीश पीठ में अपील की और मुआवजे में समान राशि की मांग की, जिसे अदालत ने फिर से खारिज कर दिया।’ स्पाइसजेट ने कहा कि दोनों पक्षों ने अपीलीय क्षेत्राधिकार के समक्ष किसी भी अपील को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया था और परिणामस्वरूप मामले का निपटारा हो गया था।

First Published - May 28, 2024 | 10:43 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट