facebookmetapixel
16वां वित्त आयोग: राज्यों की कर हिस्सेदारी 41% बरकरार, जीडीपी योगदान बना नया मानदंडBudget 2026: मजबूत आर्थिक बुनियाद पर विकास का रोडमैप, सुधारों के बावजूद बाजार को झटकाBudget 2026: TCS, TDS और LSR में बदलाव; धन प्रेषण, यात्रा पैकेज पर कर कटौती से नकदी प्रवाह आसानBudget 2026: खाद्य सब्सिडी में 12.1% का उछाल, 81 करोड़ लोगों को मिलता रहेगा मुफ्त राशनBudget 2026: पारंपरिक फसलों से आगे बढ़ेगी खेती, काजू, नारियल और चंदन जैसी नकदी फसलों पर जोरBudget 2026: मुश्किल दौर से गुजर रहे SEZ को बड़ी राहत, अब घरेलू बाजार में सामान बेच सकेंगी इकाइयांBudget 2026: व्यक्तिगत करदाताओं के लिए जुर्माने और अ​भियोजन में ढील, विदेश परिसंपत्तियों की एकबार घोषणा की सुविधाBudget 2026: बुनियादी ढांचे को रफ्तार देने के लिए ₹12.2 लाख करोड़ का आवंटन, कैपेक्स में भारी बढ़ोतरीBudget 2026: पहली बार ₹1 लाख करोड़ के पार पहुंचा हेल्थ बजट, ‘मिशन बायोफार्मा शक्ति’ का आगाजविनिवेश की नई रणनीति: वित्त वर्ष 2027 में 80,000 करोड़ जुटाएगी सरकार, जानें क्या है पूरा रोडमैप

दिवालिया कानून में बदलाव की तैयारी, IBC के लिए बदलेंगे NCLT के नियम

Last Updated- May 01, 2023 | 11:02 PM IST
Jaiprakash Associates has a debt of Rs 55 thousand crores जयप्रकाश एसोसिएट्स पर 55 हजार करोड़ रुपये कर्ज
BS

सरकार ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (IBC) से संबंधित मामले निपटाने के लिए राष्ट्रीय कंपनी विधि पंचाट (NCLT) के नियमों में बदलाव की योजना बना रही है। आधिकारिक सूत्रों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को यह जानकारी दी।

इसके साथ ही कंपनी मामलों का मंत्रालय भी विभिन्न NCLT पीठों में खाली पड़े पद अगस्त तक भरने की उम्मीद कर रहा है। इसके अलावा मामले संभालने के लिए आर्टि​फिशियल इंटेलिजेंस (AI) यानी कृत्रिम मेधा वाली आईटी प्रणाली भी स्थापित की जाएगी।

IBC लागू होने से पहले कंपनी संबंधी विवादों को निपटाने के लिए एक सक्षम प्राधिकरण के तौर पर NCLT का गठन किया गया था। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘NCLT के पास उन कंपनियों को बंद करने के लिए नियम हैं, जो कंपनी अधिनियम से संबंधित हैं। मगर IBC काफी अलग कानून है।’

नियमों का मसौदा पंचाट के लिए दिशानिर्देश के तौर पर काम करेगा। उदाहरण के लिए NCLT को उन फालतू आवेदनों के लिए दंडित करने का अधिकार मिल सकता है जिनका उद्देश्य कॉरपोरेट समाधान प्रक्रिया में देरी करना मात्र होता है। इसके अलावा कुछ मामले तेजी से निपटाने के लिए प्राथमिकता सूची भी हो सकती है।

IBC के वकील अक्सर कहते हैं कि श्रमबल, बुनियादी ढांचे और डोमेन विशेषज्ञता के अभाव में NCLT और IBC का ठीक से तालमेल नहीं बैठ पाता। जून 2016 में IBC आने के बाद NCLT ने पूरी क्षमता से कभी काम नहीं किया।

इस समस्या से निपटने के लिए सरकार दोतरफा रणनीति पर अमल करना चाहती है। कंपनी मामलों का मंत्रालय पंचाट के विभिन्न पीठों में 22 रिक्त पदों को अगस्त तक भरने की योजना बना रहा है। इसके अलावा IBC मामले संभालने के लिए आईटी क्षमता वाली प्रणाली स्थापित करने की भी मंत्रालय की योजना है।

उदाहरण के लिए यदि किसी मामले में ट्रिब्यूनल को समाधान पेशेवर (RP) नियुक्त करना है तो भारतीय ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया बोर्ड (IBBI) में पंजीकृत पेशेवरों की सूची से AI के जरिये किसी को चुना और नियुक्त किया जाएगा।

अधिकारियों ने यह भी कहा कि कानून एवं अन्य जानकारियों के लिए न्यायाधीशों की कनिष्ठ कर्मचारियों पर निर्भरता भी सूचना प्रौद्योगिकी से लैस प्रणाली के जरिये कम की जाएगी। मंत्रालय IBC में भी ई-मेल के जरिये नोटिस आदि भेजने के लिए आईटी प्रणाली के उपयोग पर विचार कर रहा है।

Also Read: NCLT ने Zee Entertainment, Siti Networks के खिलाफ दिवाला कार्रवाई को मंजूरी दी

लॉ फर्म अल्वारेज ऐंड मार्शल ने अपने एक परिपत्र में कहा है कि NCLT के पीठ में याचिकाओं को सूचीबद्ध करने में पंजीकरण के स्तर पर पारदर्शिता का अभाव था, जिसके लिए अक्सर बाद में पूछते रहना पड़ता था। डिजिटल व्यवस्था नहीं होना इसकी असली वजह थी।

दिवालिया पेशेवर अभिलाष लाल ने कहा, ‘दस्तावेजों और प्रक्रियाओं की अधिकता के कारण NCLT में मामले निपटाने की रफ्तार सुस्त पड़ जाती थी। NCLT में मामले दाखिल करने का लिहाज से प्रक्रियाएं व्यवस्थित करने, अनावश्यक प्रशासनिक दखल खत्म करने और कोविड के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया को ई-मोड या डिजिटल में बदलने से मुकदमों का बोझ कम करने में मदद मिलेगी।

ट्रिब्यूनल के आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2017 और अगस्त 2022 के बीच NCLT में कुल 31,203 मामले थे। इनमें से 7,175 मामले अदालत में स्वीकार होने से पहले के चरण में अटके थे और 3,369 मामले स्वीकार होने के बाद अटके पड़े थे।

First Published - May 1, 2023 | 11:02 PM IST

संबंधित पोस्ट