जर्मनी की मिल्टेनआई बायोटेक उत्पादों और सेवाओं की वैश्विक प्रदाता कंपनी है। वह भारत में सेल और जीन थेरेपी (सीजीटी) के स्थानीय विनिर्माण का मूल्यांकन कर रही है। इसमें सीएआर-टी उपचार भी शामिल हैं। यह ऐसा कदम है,जिससे भारत सेल और जीन थेरेपी उत्पादन, प्रशिक्षण और निर्यात के क्षेत्रीय केंद्र के रूप में स्थापित हो सकता है।
हाल ही में एक बातचीत के दौरान संस्थापक और हितधारक स्टीफन मिल्टेनआई ने कहा कि भारत में कंपनी का फौरी ध्यान घरेलू नैदानिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अस्पताल से जुड़े विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने पर है। दीर्घकालिक संभावनाओं के तहत अन्य बाजारों में बेचने के लिए भारत में कलपुर्जे और उपकरण बनाना शामिल है।
मिल्टेनआई ने कहा, सेल्युलर थेरपी पारंपरिक फार्मास्यूटिकल्स से बहुत अलग है और कोशिकाएं आसानी से एक जगह से दूसरी जगह नहीं जा सकतीं। इसलिए कंपनी अस्पतालों के सहयोग से स्थानीय, पॉइंट-ऑफ-केयर विनिर्माण मॉडल को प्राथमिकता दे रही है। साथ ही भविष्य में केंद्रीय सुविधाएं स्थापित करने का विकल्प भी खुला रख रही है।
कंपनी ने कहा कि वह वर्तमान में भारत में अस्पतालों और साझेदारों के साथ सेल्युलर उत्पादों के स्थानीय उत्पादन के लिए बातचीत कर रही है। मिल्टेनआई बायोटेक अपने सिस्टम का उपयोग करके अपने उत्पादों का निर्माण खुद ही करने की योजना बना रही है। वह साझेदार अस्पतालों और अस्पताल श्रृंखलाओं के साथ मिलकर पहुंच बढ़ाने का भी काम करेगी।
नैदानिक मांग और वैज्ञानिक प्रतिभा की उपलब्धता के कारण पिछले एक वर्ष में भारत कंपनी के लिए रणनीतिक केंद्र बन गया है। मिल्टेनआई बायोटेक ने एक वर्ष के भीतर 30 से अधिक लोगों की एक स्थानीय टीम का गठन किया है। साथ ही सेल और जीन थेरेपी विनिर्माण में कौशल की कमी को दूर करने के लिए प्रशिक्षण सुविधाएं भी स्थापित की हैं।
नैदानिक क्षेत्र केबारे में मिल्टेनआई बायोटेक ने कहा कि वह भारत में अपनी चिकित्सा पद्धतियों के लिए नियामक की मंजूरी हासिल करने के लिए प्रयासरत है। देश में कुछ क्लिनिकल ट्रायल स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें पहले के चरण-1 अध्ययन के बाद सीडी19 के लिए नियोजित चरण-2 परीक्षण भी शामिल है। सीडी19 एक ऐसी सीएआर-टी सेल थेरेपी है जिस पर रिलैप्स/रिफ्रैक्टरी बी-सेल ल्यूकेमिया, लिम्फोमा और ल्यूपस जैसी ऑटोइम्यून बीमारियों के लिए शोध चल रहा है।
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कंपनी ने कहा कि भविष्य के संकेत परीक्षणों में भारत को भी शामिल किए जाने की उम्मीद है। ऑन्कोलॉजी के अलावा, मिल्टेनआई बायोटेक ने भारत में ऑटोइम्यून बीमारियों, दुर्लभ बीमारियों और थैलेसीमिया जैसे रोगों में भी रुचि दिखाई है, जहां चिकित्सा आवश्यकताओं की पहुंच में भीषण किल्लत है। कंपनी ने कहा कि उसका लक्ष्य वैश्विक बाजारों की तुलना में कम समय में भारत में नए सीजीटी संकेत पेश करना है।
क्षेत्रीय स्तर पर, मिल्टेनआई बायोटेक वियतनाम, इंडोनेशिया, थाईलैंड, ताइवान और जापान में क्लिनिकल ट्रायल कर रही है या करने की योजना बना रही है। कंपनी ने कहा कि समय के साथ नियामकों से स्वीकृतियों और गुणवत्ता जरूरतों के लिहाज से भारत सीजीटी विनिर्माण, प्रशिक्षण और उभरते एशियाई बाजारों में संभावित निर्यात में व्यापक भूमिका निभा सकता है।
हालांकि कंपनी ने भारत में निवेश के बारे में विशिष्ट आंकड़े जारी नहीं किए हैं। लेकिन उसने कहा है कि टीमें बनाने, प्रशिक्षण का बुनियादी ढांचा तैयार करने और परीक्षण क्षमताएं विकसित करने के लिए प्रारंभिक निवेश पहले ही किया जा चुका है। आगे के निवेश नैदानिक प्रगति, नियामकीय स्वीकृतियों और स्थानीय परिचालन की आत्मनिर्भर बनने की क्षमता के आधार पर किए जाएंगे।