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बढ़ती लागत से हारी मारुति थामेगी देसी हाथ

Last Updated- December 05, 2022 | 5:14 PM IST

बढ़ती लागत और मुनाफे पर मार से परेशान मारुति सुजुकी ने कारों की कीमत में इजाफा रोकने के रास्ते तलाशने शुरू कर दिए हैं। कंपनी ने सबसे पहले कलपुर्जों पर ध्यान दिया है।


मारुति अपने सभी नए मॉडलों के लिए ज्यादा से ज्यादा कलपुर्जे भारतीय बाजार से ही खरीदने की योजना बना रही है।कंपनी को भरोसा है कि इससे लागत कम करने में उसे काफी आसानी हो जाएगी। फिलहाल मारुति की हर साल भारत में एक नया मॉडल उतारने की योजना है। जाहिर है, कलपुर्जों की कीमत में कमी से उसे काफी फायदा होगा।


मारुति सुजुकी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी शिंजो नाकानिशी ने बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत में बढ़ते खर्च और कच्चे माल की उछाल मारती कीमतों पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा, ‘हम वाकई चिंतित हैं। इसी वजह से हमने नए मॉडलों के लिए कम से कम 70 या 80 फीसदी पुर्जे स्थानीय बाजारों से ही खरीदने की योजना बनाई है।


लागत कम रखने में इससे हमें काफी मदद मिलेगी। हम आगे जाकर भारतीय पुर्जों की खरीद का यह आंकड़ा बढ़ाकर 95 फीसदी तक पहुंचा सकते हैं। इनका इस्तेमाल मौजूदा मॉडलों में भी किया जा रहा है।’उन्होंने कहा कि कंपनी का पहला उद्देश्य स्थानीय बाजार में मौके तलाशना है। इसके लिए वह यहीं के बाजारों से कलपुर्जे खरीदेगी। इससे कंपनी को तो फायदा होगा ही, देशी कलपुर्जा निर्माताओं को भी खासा मुनाफा मिलेगा।


लेकिन कुछ खास पुर्जे अब भी यूरोपीय और दूसरे एशियाई बाजारों से खरीदे जाएंगे।कंपनी ने कुछ समय पहले ऐलान किया था कि हर साल वह भारत के बाजारों में एक नया मॉडल पेश करेगी। पिछले 3 साल के दरम्यान भी वह 6 नए मॉडल उतार चुकी है। नाकानिशी ने बताया कि कंपनी का बहुप्रतीक्षित मॉडल ‘ए स्टार’ भी इसी साल बाजार में पेश कर दी जाएगी।


मारुति के विभिन्न मॉडलों की बात करें, तो इस समय उसके सभी मॉडलों में कुल मिलाकर 95 फीसदी स्थानीय पुर्जों का इस्तेमाल हो रहा है। इस मामले में मारुति 800 सबसे आगे है। इसमें 99 प्रतिशत पुर्जे भारतीय हैं। आल्टो में भी 95 फीसदी भारतीय पुर्जों का इस्तेमाल है।

First Published - March 28, 2008 | 1:21 AM IST

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