facebookmetapixel
Advertisement
लोक सभा अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव लाने की तैयारी में विपक्ष, राहुल गांधी की मांग पर अड़ी विपक्षी पार्टियां16वें वित्त आयोग की नई अंतरण व्यवस्था: राज्यों के लिए फायदे-नुकसान और उठते सवालAI Impact Summit 2026: पंजीयन के नाम पर वसूली से बचें, इंडिया AI मिशन ने जारी किया अलर्टहिंद महासागर में भारत का बड़ा कदम: सेशेल्स के लिए 17.5 करोड़ डॉलर के आर्थिक पैकेज का ऐलानIndia AI Impact Summit 2026: दिल्ली के लग्जरी होटलों में रेट्स आसमान पर, स्वीट्स 30 लाख रुपये तकफार्मा दिग्गजों की हुंकार: चीन से मुकाबले के लिए भारतीय दवा नियमों में बड़े सुधार की जरूरतपीएम इंटर्नशिप योजना में बदलाव की तैयारी; इंटर्नशिप अवधि और आयु सीमा में कटौती संभवमारुति सुजुकी की रफ्तार: 2025 में रेल से 5.85 लाख वाहनों की रिकॉर्ड ढुलाई, 18% का शानदार उछालFY26 की पहली छमाही में कंपनियों का कैपेक्स 6 साल के हाई पर, इंफ्रा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने दिखाई तेजीजगुआर लैंड रोवर के वैश्विक नक्शे पर तमिलनाडु: रानीपेट में ₹9,000 करोड़ के TATA-JLR प्लांट का उद्घाटन

उपग्रह सेवा देने की तैयारी में लिंक ग्लोबल

Advertisement
Last Updated- April 17, 2023 | 11:42 PM IST
Lynk offers to partner telcos for satellite-to-mobile connect

अमेरिकी मोबाइल प्रौद्योगिकी कंपनी लिंक ग्लोबल ने भारतीय दूरसंचार कंपनियों के साथ साझेदारी करने के लिए एक रिपोर्ट पेश की है, जो दुनिया के पहले पेटेंट युक्त, सीधे वाणिज्यिक उपग्रह से प्रमाणित और मानक मोबाइल फोन प्रणाली की पेशकश के लिए है।

पिछले साल अमेरिका में संघीय संचार आयोग ने इस नई प्रौद्योगिक के तहत लिंक को अब तक का पहला लाइसेंस प्रदान किया था।

लिंक का कहना है कि जिस किसी के पास सामान्य मोबाइल फोन हो, वह अब बिना किसी बाधा या रुकावट के हर जगह संपर्क कायम रख सकता है, जिसमें ‘डार्क स्पॉट’ वाले स्थान भी शामिल हैं अथवा जहां जमीनी मोबाइल नेटवर्क पर कोई कवरेज न हो। कंपनी इन भागों में कवरेज उपलब्ध कराने के लिए छोटे उपग्रह स्थापित कर रही है, जिसे यह ‘आकाश में सेल टॉवर’ कहती है।

यह उपभोक्ताओं के लिए दो अलग-अलग फोन रखने की जरूरत को खत्म करता है – एक सामान्य मोबाइल सेवाओं के लिए और दूसरी उपग्रह आधारित सेवाओं के लिए, जो फिलहाल काफी महंगी है। हालांकि उन्हें और ज्यादा किफायती तथा हल्का-फुल्का बनाने के लिए काम चल रहा है।

यह प्रौद्योगिकी दुनिया भर में उन एक अरब से अधिक लोगों को संपर्क करने के लिए कम लागत वाला तरीका भी प्रदान करेगी, जो मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करते हैं क्योंकि उनके इलाकों में कोई कनेक्टिविटी नहीं होती।

रिलायंस जियो के सामने प्रस्तुत की गई अपनी रिपोर्ट में लिंक ने कारोबारी प्रारूप के बारे में बताया। पहला, मोबाइल नेटवर्क परिचालक को पूंजीगत व्यय और परिचालन व्यय में और खर्च नहीं करना पड़ेगा। दूसरा, लिंक अपने ग्राहकों द्वारा उत्पन्न ट्रैफिक से राजस्व हिस्सेदारी प्राप्त करते हुए पैसा कमाएगी। मिसाल के तौर पर ग्राहकों के लिए इनबाउंड रोमिंग के वास्ते लिंक रिलायंस जियो का स्पेक्ट्रम साझा करेगी क्योंकि भारत में उसके पास अपना खुद का कोई स्पेक्ट्रम नहीं है।

दूरसंचार कंपनियों का कहना है कि प्रौद्योगिकी की कदमताल पहले से ही काफी तेज है। ऐपल जैसी कंपनियां पहले से ही घोषणा कर चुकी हैं कि आईफोन 14 उपग्रह और स्थलीय सेवाओं की पेशकश करेगा।

लिंक दुनिया भर में तकरीबन 12 मोबाइल नेटवर्क परिचालकों के साथ यह सेवा शुरू करने के लिए अनुबंधों को अंतिम रूप दे रही है। कुछ दिन पहले ही इसने वोडाफोन घाना को सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए टेलीसेल के साथ एक करार किया है, जो 3.1 करोड़ निवासियों के लिए 100 प्रतिशत मोबाइल कवरेज सुनिश्चित करेगी।

लेकिन भारतीय दूरसंचार कंपनियों को कहना है कि यहां लिंक की पेशकश से स्पेक्ट्रम संबंधी नियामकीय उलझन के कुछ मसले सामने आएंगे, जिनका सामाधान करने की जरूरत है।

Advertisement
First Published - April 17, 2023 | 10:20 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement