देेश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी शेयर बाजार पर अपना दांव ढीला कर रही है। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की सूचीबद्ध कंपनियों में हिस्सेदारी सितंबर तिमाही में 50 तिमाहियों में सबसे कम थी। इसका पता ट्रैकर प्राइमइन्फोबेस डॉट कॉम के आंकड़ों से चलता है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि कुल सूचीबद्ध कंपनियों में इसकी हिस्सेदारी 3.69 फीसदी है, जो जून 2009 के बाद सबसे कम है। यह जून 2021 तिमाही में 3.74 फीसदी के मुकाबले भी कम है। इसमें जून 2012 के बाद गिरावट आ रही है। उस समय इसके पास नैशनल स्टॉक एक्सचेेंज (एनएसई) में सूचीबद्ध कंपनियों के कुल मूल्य की पांच फीसदी हिस्सेदारी थी।
यह विश्लेषण एनएसई पर सूचीबद्ध कुल 1732 कंपनियों में से 1,688 पर आधारित है। इसमें उन सभी कंपनियों को शामिल किया गया है, जिन्होंने तिमाही के आखिर तक शेयरधारिता के आंकड़े दाखिल कर दिए हैं। शेष कंपनियों में से ज्यादातर स्मॉल कैप हैं, जिनका रुझान पर असर नहीं पडऩे के आसार हैं। यह विश्लेषण उन कंपनियों पर आधारित है, जिनमें एलआईसी की कम से कम एक फीसदी हिस्सेदारी है। एक फीसदी से अधिक हिस्सेदारी होने पर खुलासा करना अनिवार्य होता है।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि जून से दिसंबर 2020 के बीच एलआईसी की हिस्सेदारी में कमी आई, जो मुनाफावसूली का संकेत है। प्राइम डेटाबेस के प्रबंध निदेशक प्रणव हल्दिया ने कहा कि उन्होंने शायद पिछली तिमाही में भी मुनाफावसूली जारी रखी। उन्होंने कहा कि स्वामित्व की घटती हिस्सेदारी इस बात का भी संकेत हो सकता है कि एलआईसी बाजार में मूल्यांकन ऊंचे स्तरों पर पहुंचने की चर्चाओं के बीच उतने आक्रामक तरीके से लिवाली नहीं कर रही, जितनी निवेशकों की अन्य श्रेणियां कर रही हैं। हल्दिया के मुताबिक आम तौर पर यह बीमा कंपनी बाजार में गिरावट के समय लिवाली करती है और ज्यादा सतर्कता भी बरतती है। उन्होंने कहा, ‘एलआईसी पहले से ही रुझान के विपरीत निवेशक रही है।’
वैश्विक वित्तीय सेवा समूह मॉर्गन स्टैनली ने सुझाव दिया कि निवेशकों को अक्टूबर के अंतिम सप्ताह मेंं बिकवाली करनी चाहिए। नोमुरा और यूबीएस ने भी ऐसा ही रुख अख्तियार किया है। एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स अपने 19 अक्टूबर के स्तर 62245.43 से 4.7 फीसदी लुढ़क चुका है। सेंसेक्स को बाजार की हलचल का संकेत माना जाता है।