facebookmetapixel
Advertisement
तेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिकबांग्लादेश: चुनौतियों के बीच आजादी का जश्न, अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी बड़ी चुनौतीपश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क, रणनीतिक तेल भंडार विस्तार प्रक्रिया तेजGST कटौती से बढ़ी मांग, ऑटो और ट्रैक्टर बिक्री में उछाल: सीतारमणसरकार का बड़ा फैसला: पीएनजी नेटवर्क वाले इलाकों में नहीं मिलेगा एलपीजी सिलिंडर

GPU पर रोक से रुकेगी AI की स्पीड, 2027 के बाद दिखेगा प्रतिकूल प्रभाव

Advertisement

इले​क्ट्रॉनिकी एवं आईटी मंत्रालय का कहना है कि प्रस्तावित आदेश के प्रभाव का आकलन किया जा रहा है। अब देखना होगा कि डॉनल्ड ट्रंप सत्ता संभालने के बाद क्या निर्णय लेते हैं

Last Updated- January 17, 2025 | 11:21 PM IST
Artificial Intelligence

ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने संबंधी बाइडन प्रशासन का प्रस्ताव भारत के एआई कार्यक्रम को प्रभावित कर सकता है। भारत 2027 से अपने एआई कार्यक्रम का दायरा बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। जीपीयू कंप्यूटर में ग्राफिक्स, इफेक्ट, वीडियो आदि कार्यों को संभालने और एआई को ताकत देने में मदद करता है।

नियमों के तहत 18 देशों को चिप तक निर्बाध पहुंच देने की बात कही गई है जिसमें ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया जैसे अमेरिका के करीबी सहयोगी देश शामिल हैं। इन देशों की सत्यापित कंपनियों पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। दूसरी तरफ चीन और रूस जैसे देशों को प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया है।

भारत को तीसरी श्रेणी में रखा गया है जिसमें इजरायल और सिंगापुर जैसे देश शामिल हैं। इन देशों को सालाना 1,700 जीपीयू के आयात की अनुमति होगी।
कंपनियों को अमेरिकी सरकार से मंजूरी लेनी होगी जिसके तहत सालाना आधार पर चिप के आयात पर सीमा लगाई जाएगी। यह सीमा 2025 में 1,00,000 चिप के लिए होगी जो 2026 में बढ़कर 2,70,000 चिप और 2027 में 3,20,000 चिप तक हो जाएगी। ऐसे चिप की कंप्यूटिंग क्षमता को इन सभी वर्षों के लिए एनवीडिया के एच-100 जीपीयू के बराबर तय की गई है।

इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (आईईएसए) के अध्यक्ष अशोक चंडोक ने कहा, ‘हालांकि लधु अव​धि में प्रभाव मामूली दिख सकता है, लेकिन 2027 से उसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा जब भारत अपने एआई कार्यक्रम का विस्तार करेगा। हमें लगता है कि यह कमोबेश अब तय हो चुका है।’

इले​क्ट्रॉनिकी एवं आईटी मंत्रालय का कहना है कि प्रस्तावित आदेश के प्रभाव का आकलन किया जा रहा है। अब देखना होगा कि डॉनल्ड ट्रंप सत्ता संभालने के बाद क्या निर्णय लेते हैं।

नियमों के तहत गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा जैसी अमेरिकी कंपनियों को जीपीयू के इस्तेमाल का वैश्विक अधिकार मिलेगा। मगर उपयोग की मात्रा पर सीमा लगाए जाने से वे एआई डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए केवल हतोत्साहित होंगी।

Advertisement
First Published - January 17, 2025 | 11:21 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement