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पायलट परीक्षकों पर DGCA का शिकंजा: निगरानी होगी और सख्त, अनुभव व पात्रता मानदंड होंगे कड़े

इस महीने विमानन क्षेत्र की कंपनियों के साथ साझा किए गए एक मसौदे प्रस्ताव में डीजीसीए ने अधिकृत परीक्षकों की पुनर्नियुक्ति के नियम कड़े कर दिए हैं

Last Updated- January 23, 2026 | 10:26 PM IST
Aeroplane
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने पायलट परीक्षकों की नियुक्ति और उन्हें बनाए रखने से जुड़े नियम-कायदे सख्त बनाने का प्रस्ताव दिया है। डीजीसीए ने पायलट परीक्षकों के लिए अनुभव और पात्रता से जुड़े मानदंड कड़े करने की बात कही है जबकि कुछ प्रक्रियात्मक आवश्यकताएं समाप्त की जा सकती हैं। पायलट परीक्षक वरिष्ठ पायलट होते हैं जो विमान और सिम्युलेटर पर नए एवं कम अनुभवी पायलटों की दक्षता का आकलन करते हैं।

इस महीने विमानन क्षेत्र की कंपनियों के साथ साझा किए गए एक मसौदे प्रस्ताव में डीजीसीए ने अधिकृत परीक्षकों की पुनर्नियुक्ति के नियम कड़े कर दिए हैं। मौजूदा नियमों के तहत दोबारा नियुक्त होने के लिए एक पायलट को पिछले पांच वर्षों में डीई के रूप में सेवा देने का अनुभव रखना जरूरी होता है। नए प्रस्ताव के तहत उम्मीदवारों के पास पिछले सात वर्षों में उसी या किसी अन्य विमानन कंपनी के साथ कम से कम 12 महीने का परीक्षक के तौर पर अनुभव होना चाहिए। यह कदम संदर्भ अवधि का थोड़ा विस्तार करते हुए न्यूनतम अनुभव आवश्यकता को बढ़ाता है।

डीजीसीए ने डीई के रूप में नियुक्ति चाहने वाले विदेशी पायलटों के लिए सख्त मानदंडों का प्रस्ताव दिया है जिनमें एक विशिष्ट विमान उड़ाने के लिए पायलटों को प्रशिक्षित करने और उनकी योग्यता परखने का तीन साल का निरंतर अनुभव आवश्यक है। वर्तमान में विदेशी पायलटों को पिछले तीन वर्षों के भीतर केवल दो साल के टाइप रेटिंग एग्जामिनर (टीआरई) अनुभव की आवश्यकता है। 

मसौदे में डीई और सिंथेटिक फ्लाइट एग्जामिनर (एसआरई) के लिए सख्त निगरानी का प्रस्ताव है जिसमें उनकी मंजूरी को वार्षिक रिफ्रेशर प्रशिक्षण से जोड़ा गया है। रिफ्रेशर प्रशिक्षण लाइसेंसिंग आवश्यकताओं और वर्तमान नियमों पर परीक्षकों को अद्यतित रखने का एक सालाना पाठ्यक्रम है। एसएफई वरिष्ठ पायलट होते हैं जो केवल उड़ान सिमुलेटर पर दूसरों का परीक्षण करते हैं।

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मौजूदा नियमों के तहत रिफ्रेशर प्रशिक्षण केवल डीई और एसएफई के लिए लागू था और वे एक औपचारिक वार्षिक पाठ्यक्रम पूरा किए बिना अपनी नियुक्ति जारी रख सकते थे। नए प्रस्ताव में यह स्पष्ट किया गया है कि अगर डीजीसीए को रिफ्रेशर पाठ्यक्रम पूरा किए हुए 12 महीने से अधिक हो गए हैं तो डीई या एसएफई की नियुक्ति वैध नहीं रहेगी। डीजीसीए ने 20 फरवरी तक मसौदे पर सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी हैं।

नियामक ने अपने मसौदे में परिचालन बाधाएं कम करने के लिए खास रियायत भी पेश की हैं। एसएफई के लिए ऊपरी आयु सीमा 70 से बढ़ाकर 75 वर्ष कर दी गई है जिससे अनुभवी कर्मियों को अधिक समय तक सक्रिय रहने की इजाजत मिलती है।

इसके अलावा, मसौदे में डीई और एसएफई दोनों के लिए नियुक्तियों का कार्यकाल पांच साल से बढ़ाकर सात साल कर दिया गया है जिससे नवीनीकरण की आवृत्ति कम हो गई है।

पूरी प्रक्रिया आसान बनाने के एक अन्य उपाय के तौर पर अनुमोदित प्रशिक्षण संगठनों (एटीओ), जिनके पास इन-हाउस एसएफई नहीं हैं, उन्हें आपसी समझौते के तहत विमानन कंपनियों से सिम्युलेटर परीक्षकों का उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी।

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मौजूदा समय में अधिकृत डीई ( विमानन कंपनी या उड़ान प्रशिक्षण केंद्रों द्वारा अपने पायलटों की जांच के लिए चुने गए डीई) पर प्रत्येक जांच के दौरान सुरक्षा एवं अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए डीजीसीए निरीक्षकों की निगरानी रखी जानी चाहिए। 

मसौदे में यह नियमित निगरानी हटाने का प्रस्ताव है जिससे अधिकृत डीई  को निरीक्षक की उपस्थिति के बिना परीक्षण करने की अनुमति मिलती है।

First Published - January 23, 2026 | 10:26 PM IST

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