एक एंटीट्रस्ट जांच रिपोर्ट से पता चला है कि चार प्रमुख भारतीय इस्पात निर्माताओं- टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील और सरकारी सेल तथा आरआईएनएल- ने प्रतिस्पर्धियों को अपनी मूल्य निर्धारण योजनाओं का खुलासा किया और आपूर्ति घटाने के लिए मिलीभगत करके उत्पादन में कटौती की। रॉयटर्स ने यह रिपोर्ट देखी है।
भारत के इस्पात क्षेत्र से जुड़े सबसे हाई-प्रोफाइल एंटीट्रस्ट मामले में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की जांच में पाया गया कि 28 कंपनियों ने इस्पात की कीमतों पर मिलीभगत की। इस जांच का मतलब है कि उन पर भारी जुर्माना लग सकता है। रॉयटर्स ने 6 जनवरी को इस बारे में खबर दी थी।
चार बड़ी कंपनियों के बारे में जांच रिपोर्ट को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। इससे पता चलता है कि आयोग ने दर्जनों व्हाट्सऐप चैट को देखा, जिनमें ‘फ्रेंड्स ऑफ स्टील’, ‘टायकून्स’ और ‘स्टील लाइव मार्केट’ जैसे ग्रुप शामिल थे। इन्हें 2022 में उद्योग पर हुई रेड के दौरान जब्त किया गया था। आयोग ने कीमतों में बदलाव, बिक्री और उत्पादन पैटर्न का विश्लेषण किया।
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रिपोर्ट के अनुसार, टाटा स्टील, जेएस डब्ल्यू, सेल और आरआईएनएल ने 2018-2023 के दौरान मिलीभगत की। अप्रैल 2025 में तैयार की गई आयोग की रिपोर्ट में कहा गया, ‘सेल, आरआईएनएल, जेएसडब्ल्यू और टाटा स्टील द्वारा मिलकर किए गए प्रयासों के पर्याप्त सबूत हैं।’ रिपोर्ट में कहा गया है कि ये चारों कंपनियां ‘संवेदनशील जानकारी पहले से देकर बाजार को प्रभावित कर रही थीं।’
कंसल्टेंसी बिगमिंट का अनुमान है कि इन कंपनियों की भारत के इस्पात बाजार में 44.4 फीसदी भागीदारी है। टाटा स्टील ने किसी भी गलत काम से स्पष्ट तौर पर इनकार किया है। सेल, आरआईएनएल, जेएसडब्ल्यू ने इस संबंध में रॉयटर्स के सवालों का जवाब नहीं दिया है।