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सीमेंट कंपनियों को दूसरी छमाही में तेजी की उम्मीद, घर बनाने वालों और सरकारी खर्च पर सबकी नजर

अच्छी मानसून, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी, जीएसटी में बदलाव और इनकम टैक्स में राहत जैसे कदमों से ग्रामीण इलाकों में खपत बढ़ने की पूरी संभावना है

Last Updated- November 30, 2025 | 3:18 PM IST
Cement
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

जुलाई-सितंबर तिमाही में सीमेंट की बिक्री में अच्छी-खासी बढ़ोतरी और कीमतों में मामूली सुधार के बाद देश की बड़ी सीमेंट कंपनियां वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद लगा रही हैं। अल्ट्राटेक, अंबुजा, श्री सीमेंट, डालमिया भारत और नुवोको विस्टास जैसी टॉप-5 कंपनियों का कहना है कि ग्रामीण और शहरी इलाकों में खुद का घर बनाने वाले लोगों (आईएचबी सेगमेंट) की मांग और सरकार के इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स पर खर्च से बाजार में रौनक लौटेगी।

पिछली तिमाही में इन कंपनियों की आमदनी में 18 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। अच्छी मानसून, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी, जीएसटी में बदलाव और इनकम टैक्स में राहत जैसे कदमों से ग्रामीण इलाकों में खपत बढ़ने की पूरी संभावना है। शहरी इलाकों में भी ब्याज दरें नरम पड़ने और जीएसटी रिफॉर्म्स से मकान बनाने की रफ्तार तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

कीमतें स्थिर, लागत घटी, मुनाफे में इजाफा

सितंबर 2025 में पूरे देश में सीमेंट की औसत कीमत 50 किलो की बोरी 341 रुपये रही, जो पिछले साल से 2 फीसदी ज्यादा है। पहली छमाही में कीमतें 346 रुपये तक पहुंची थीं, पर मानसून और त्योहारों की वजह से तिमाही दर तिमाही 3 फीसदी की गिरावट आई। कोयले की कीमतें इस साल अक्टूबर में 17 फीसदी तक लुढ़क कर 108 डॉलर प्रति टन पर आ गईं, जबकि पेटकोक की कीमतें 18 फीसदी चढ़कर 12 हजार रुपये टन हो गईं। डीजल की कीमतें पिछले साल के बराबर 88 रुपये लीटर पर स्थिर हैं।

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इन सबके चलते कंपनियों की लागत कम हुई और प्रीमियम प्रोडक्ट्स की बिक्री बढ़ने से मार्जिन में सुधार हुआ। अल्ट्राटेक ने तो ग्रामीण बाजार में 13 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर कैलाश झंवर ने कहा, “ग्रामीण इलाकों में मकान बनाने की मांग अच्छी है। अच्छा मानसून और एमएसपी में बढ़ोतरी से किसानों की जेब में पैसा आएगा, जिसका फायदा सीमेंट को मिलेगा।”

कौन कितना आगे बढ़ा

अल्ट्राटेक ने जुलाई-सितंबर में 33.85 मिलियन टन सीमेंट बेचा, जो पिछले साल से 6.9 फीसदी ज्यादा है। अंबुजा सीमेंट्स ने तो रिकॉर्ड तोड़ते हुए 16.6 मिलियन टन बेचा, यानी 20 फीसदी की छलांग। कंपनी की आमदनी 9,174 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जिसमें कीमतों में 3 फीसदी की बढ़ोतरी का भी योगदान है। अंबुजा के सीईओ विनोद बहेती ने कहा, “पहली तिमाही में मानसून लंबा खिंचा, पर पूरे साल के लिए हम 7-8 फीसदी ग्रोथ का टारगेट बनाए हुए हैं। जीएसटी 2.0 और दूसरे सरकारी कदमों से माहौल काफी सकारात्मक है।”

श्री सीमेंट ने 6.8 फीसदी ज्यादा बिक्री की और आमदनी में 17.43 फीसदी का इजाफा करते हुए 4,761 करोड़ रुपये कमाए। कंपनी के एमडी नीरज अखौरी का मानना है कि उत्तर और पश्चिम भारत बाकी इलाकों से थोड़ा बेहतर करेगा। डालमिया भारत की आमदनी 10.68 फीसदी बढ़कर 3,417 करोड़ रुपये हो गई। कंपनी के एमडी और सीईओ पुनीत डालमिया ने कहा, “दूसरी छमाही में रफ्तार बढ़ेगी। ग्राहकों का कॉन्फिडेंस लौट रहा है और लगातार अच्छे मानसून से पेंट-अप डिमांड भी निकलेगी।”

नुवोको विस्टास के एमडी जयकुमार कृष्णस्वामी ने बताया कि मानसून और त्योहारों की वजह से दूसरी तिमाही में रफ्तार थोड़ी धीमी रही, लेकिन अब अगस्त 2025 तक केंद्र सरकार ने अपने पूरे साल के कैपेक्स का सिर्फ 38 फीसदी और राज्य सरकारों ने 21 फीसदी ही खर्च किया है। इसका मतलब बाकी साल में भारी खर्च बाकी है, जिससे सीमेंट की मांग में तेजी आएगी।

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इक्रा का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-26 में देश में सीमेंट की खपत 6-7 फीसदी बढ़कर 480-485 मिलियन टन तक पहुंच जाएगी। इसका सबसे बड़ा आधार घर बनाने वाले लोग और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ही होंगे।

First Published - November 30, 2025 | 3:18 PM IST

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