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दवा विनिर्माताओं का नया ठिकाना बना ब्राजील, रणनीतिक साझेदारी से भारतीय कंपनियों को होगा बड़ा फायदा

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वित्त वर्ष 2026 की अप्रैल से जनवरी की अवधि में भारत से ब्राजील को दवा निर्यात एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 17 फीसदी से अधिक बढ़कर 74 करोड़ डॉलर हो गया

Last Updated- February 25, 2026 | 10:36 PM IST
Pharma
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

इस सप्ताह राजधानी में आयोजित भारत-ब्राजील हेल्थकेयर बिजनेस मीटिंग ने भारतीय एमएसएमई फार्मा उद्योग के लिए संभावनाओं की एक नई राह की ओर इशारा किया। इस महत्त्वपूर्ण संवाद ने स्पष्ट तौर पर संकेत दिया है कि ब्राजील अब भारतीय दवा निर्माताओं के लिए केवल एक निर्यात गंतव्य ही नहीं बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी के एक प्रमुख केंद्र के तौर पर उभर रहा है। ऐसा खासकर विशेष दवाओं, बायोसिमिलर और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए श्रृंखला में सहयोग के क्षेत्र में दिख रहा है।

भारत-ब्राजील हेल्थकेयर बिजनेस गेटवे का आयोजन फार्मेक्सिल के समर्थन से ब्राजील की दवा वितरण कंपनी अमोवेरी फार्मा द्वारा किया गया। यह आयोजन भारतीय दवा विनिर्माताओं के अलावा ब्राजील के हेल्थकेयर अधिकारियों और ब्राजील के नियामक एनविसा के वरिष्ठ अधिकारियों को बाजार पहुंच, नियामकीय रूपरेखा और तकनीकी साझेदारी पर चर्चा करने के लिए एक मंच प्रदान किया।

इस आयोजन का समय काफी महत्त्वपूर्ण है। वित्त वर्ष 2026 की अप्रैल से जनवरी की अवधि में भारत से ब्राजील को दवा निर्यात एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 17 फीसदी से अधिक बढ़कर 74 करोड़ डॉलर हो गया। पूरे वित्त वर्ष 2025 में निर्यात 77.8 करोड़ डॉलर रहा जिससे भारत की निर्यात रणनीति में ब्राजील के बढ़ते महत्त्व का पता चलता है।

ब्राजील को होने वाले 60 फीसदी से अधिक दवा निर्यात अब फॉर्मूलेशन और बायोलॉजिक्स द्वारा संचालित है। इन क्षेत्रों में करीब 36 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे पता चलता है कि भारतीय एमएसएमई के लिए बाजार कहां बेहतर हो रहा है। कैंसर की दवा यानी ऑन्कोलॉजी ड्रग्स, जटिल इंजेक्शन वाली दवा, बायोसिमिलर और अस्पताल केंद्रित उपचार ब्राजील की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा जरूरतों और लागत के प्रति संवेदनशीलता के अनुरूप मांग वाले प्रमुख क्षेत्रों के रूप में उभर रहे हैं।

फार्मेक्सिल के चेयरमैन नमित जोशी ने कहा कि भारतीय एमएसएमई विनिर्माताओं के लिए ब्राजील एक महत्त्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। ऐसा खास तौर पर विशेष दवाओं, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा के लिए आपूर्ति, तकनीकी साझेदारी और नियामकीय सहयोग जैसे क्षेत्रों में दिख रहा है। नियामकीय सहयोग से छोटी कंपनियों के लिए एनविसा से मंजूरी लेने की राह आसान हो सकती है। 

अमोवेरी फार्मा के सीईओ गुइलहर्मे लीमा ने कहा कि भारतीय विनिर्माताओं के साथ साझेदारी ब्राजील में उन्नत उपचारों तक पहुंच का विस्तार करने में मदद कर सकती है। इससे लेनदेन संबंधी निर्यात के बजाय एक दीर्घकालिक आपूर्ति एवं तकनीकी साझेदारी की ओर बदलाव का संकेत मिलता है।

जहां तक भारतीय एमएसएमई का सवाल है तो संभावनाएं अक्सर बाधाओं के साथ आती हैं। ब्राजील सख्ती से विनियमित बाजार है। इसलिए वहां मुनाफे को लगातार बनाए रखना काफी हद तक अनुपालन में तत्परता, स्थानीय साझेदारी और बड़े पैमाने पर सार्वजनिक खरीद मानकों को पूरा करने की क्षमता पर निर्भर करेगा। नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक से पता चलता है कि नियामकीय तालमेल बेहतर हो रहा है।

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First Published - February 25, 2026 | 10:36 PM IST

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