भारत ने पिछले कुछ सालों में हरित ऊर्जा के क्षेत्र में तेज रफ्तार दिखाई है। कभी सौर ऊर्जा की क्षमता बहुत कम थी, लेकिन अब देश दुनिया के बड़े सौर बाजारों में शामिल हो चुका है। बढ़ती क्षमता, घटती कीमतें और बड़े लक्ष्य यह दिखाते हैं कि ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव चल रहा है। सवाल यह है कि क्या भारत 2030 तक 500 गीगावाट गैर जीवाश्म बिजली क्षमता का लक्ष्य हासिल कर पाएगा।
बिज़नेस स्टैंडर्ड के बीएस मंथन सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि भारत इस लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मंत्री ने बताया कि भारत अपनी कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा पहले ही गैर जीवाश्म स्रोतों से हासिल कर चुका है। यह उपलब्धि तय समय से 5 साल पहले मिली है। अब अगला लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट गैर जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता हासिल करना है। यह वादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर किया था।
मंत्री के अनुसार, 2014 में देश की सौर ऊर्जा क्षमता केवल 2.8 गीगावाट थी। आज बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं को छोड़कर नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 195 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। कुल गैर जीवाश्म स्थापित क्षमता अब 267 गीगावाट हो गई है। पिछले एक साल में ही 50 गीगावाट से ज्यादा नई क्षमता जोड़ी गई, जो अब तक की सबसे बड़ी सालाना बढ़ोतरी है।
सौर और पवन ऊर्जा हर समय उपलब्ध नहीं रहती। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है। इनमें सौर पवन संयुक्त परियोजनाएं, पंप स्टोरेज जल परियोजनाएं, बड़े स्तर पर बैटरी भंडारण, परमाणु ऊर्जा और AI से ग्रिड मैनेजमेंट शामिल हैं। सरकार 43 गीगावाट घंटा बैटरी भंडारण के लिए बिड की तैयारी कर रही है। 2030 तक लगभग 411 गीगावाट घंटा भंडारण क्षमता जोड़ने की योजना है।
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मंत्री ने कहा कि 10 साल पहले सौर बिजली बनाने की लागत 11 से 12 रुपये प्रति यूनिट थी। अब यह घटकर करीब 2.50 रुपये प्रति यूनिट रह गई है। 24 घंटे सप्लाई वाली नवीकरणीय बिजली की दर 4 से 4.50 रुपये प्रति यूनिट है। इसके मुकाबले नई कोयला आधारित बिजली की लागत 7 से 8 रुपये प्रति यूनिट है। उनका कहना है कि सस्ती बिजली से उद्योगों की लागत घटेगी और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
मंत्री के अनुसार, देश की सौर मॉड्यूल निर्माण क्षमता 144 गीगावाट से ज्यादा हो चुकी है। आयात 50 प्रतिशत से ज्यादा घट चुका है और इस साल 70 से 80 प्रतिशत तक और कमी आने की उम्मीद है। 24,000 करोड़ रुपये की योजना के तहत घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। लक्ष्य है कि पूरा सप्लाई तंत्र देश के भीतर ही विकसित हो।
पिछले दो साल में 30 लाख घरों में छत पर सौर संयंत्र लगाए गए हैं। इससे करीब 14 गीगावाट क्षमता जुड़ी है। सरकार इस योजना को और तेज करने की तैयारी में है। जिन परिवारों के पास छत नहीं है या जो खर्च नहीं उठा सकते, उनके लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर नए मॉडल तैयार किए जा रहे हैं।
ग्रिड पर दबाव और वितरण कंपनियों की हिचक को लेकर उठे सवालों पर मंत्री ने कहा कि यह बड़े बदलाव के दौरान आने वाली अस्थायी दिक्कतें हैं। सरकार उत्पादन के साथ भंडारण बढ़ाने, परियोजनाओं को जोड़ने और नई तकनीक से ग्रिड को मजबूत बनाने पर ध्यान दे रही है। उनका कहना है कि लक्ष्य एक मजबूत और भरोसेमंद बिजली व्यवस्था तैयार करना है, जो 2030 के लक्ष्य को हासिल कर सके।