facebookmetapixel
Advertisement
तेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिकबांग्लादेश: चुनौतियों के बीच आजादी का जश्न, अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी बड़ी चुनौतीपश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क, रणनीतिक तेल भंडार विस्तार प्रक्रिया तेजGST कटौती से बढ़ी मांग, ऑटो और ट्रैक्टर बिक्री में उछाल: सीतारमणसरकार का बड़ा फैसला: पीएनजी नेटवर्क वाले इलाकों में नहीं मिलेगा एलपीजी सिलिंडर

₹11 प्रति यूनिट से ₹2.50 पर आई सौर बिजली, प्रह्लाद जोशी बोले- सस्ती ऊर्जा से घटेगी उद्योगों की लागत

Advertisement

बीएस मंथन में प्रह्लाद जोशी का दावा, आज बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं को छोड़कर नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 195 गीगावाट तक पहुंच चुकी है

Last Updated- February 25, 2026 | 4:49 PM IST
Pralhad Joshi

भारत ने पिछले कुछ सालों में हरित ऊर्जा के क्षेत्र में तेज रफ्तार दिखाई है। कभी सौर ऊर्जा की क्षमता बहुत कम थी, लेकिन अब देश दुनिया के बड़े सौर बाजारों में शामिल हो चुका है। बढ़ती क्षमता, घटती कीमतें और बड़े लक्ष्य यह दिखाते हैं कि ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव चल रहा है। सवाल यह है कि क्या भारत 2030 तक 500 गीगावाट गैर जीवाश्म बिजली क्षमता का लक्ष्य हासिल कर पाएगा।

बिज़नेस स्टैंडर्ड के बीएस मंथन सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि भारत इस लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

2030 का लक्ष्य और मौजूदा स्थिति

मंत्री ने बताया कि भारत अपनी कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा पहले ही गैर जीवाश्म स्रोतों से हासिल कर चुका है। यह उपलब्धि तय समय से 5 साल पहले मिली है। अब अगला लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट गैर जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता हासिल करना है। यह वादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर किया था।

2014 के बाद तेज बढ़ोतरी

मंत्री के अनुसार, 2014 में देश की सौर ऊर्जा क्षमता केवल 2.8 गीगावाट थी। आज बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं को छोड़कर नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 195 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। कुल गैर जीवाश्म स्थापित क्षमता अब 267 गीगावाट हो गई है। पिछले एक साल में ही 50 गीगावाट से ज्यादा नई क्षमता जोड़ी गई, जो अब तक की सबसे बड़ी सालाना बढ़ोतरी है।

रुक रुक कर मिलने वाली बिजली की चुनौती

सौर और पवन ऊर्जा हर समय उपलब्ध नहीं रहती। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है। इनमें सौर पवन संयुक्त परियोजनाएं, पंप स्टोरेज जल परियोजनाएं, बड़े स्तर पर बैटरी भंडारण, परमाणु ऊर्जा और AI से ग्रिड मैनेजमेंट शामिल हैं। सरकार 43 गीगावाट घंटा बैटरी भंडारण के लिए बिड की तैयारी कर रही है। 2030 तक लगभग 411 गीगावाट घंटा भंडारण क्षमता जोड़ने की योजना है।

Also Read | BS Manthan 2026: क्या भारत बनेगा दुनिया की फूड फैक्ट्री? एक्सपर्ट्स ने बताया इसके लिए क्या करना होगा

सस्ती होती नवीकरणीय बिजली

मंत्री ने कहा कि 10 साल पहले सौर बिजली बनाने की लागत 11 से 12 रुपये प्रति यूनिट थी। अब यह घटकर करीब 2.50 रुपये प्रति यूनिट रह गई है। 24 घंटे सप्लाई वाली नवीकरणीय बिजली की दर 4 से 4.50 रुपये प्रति यूनिट है। इसके मुकाबले नई कोयला आधारित बिजली की लागत 7 से 8 रुपये प्रति यूनिट है। उनका कहना है कि सस्ती बिजली से उद्योगों की लागत घटेगी और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

सौर निर्माण में आत्मनिर्भरता

मंत्री के अनुसार, देश की सौर मॉड्यूल निर्माण क्षमता 144 गीगावाट से ज्यादा हो चुकी है। आयात 50 प्रतिशत से ज्यादा घट चुका है और इस साल 70 से 80 प्रतिशत तक और कमी आने की उम्मीद है। 24,000 करोड़ रुपये की योजना के तहत घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। लक्ष्य है कि पूरा सप्लाई तंत्र देश के भीतर ही विकसित हो।

छत पर सौर योजना का विस्तार

पिछले दो साल में 30 लाख घरों में छत पर सौर संयंत्र लगाए गए हैं। इससे करीब 14 गीगावाट क्षमता जुड़ी है। सरकार इस योजना को और तेज करने की तैयारी में है। जिन परिवारों के पास छत नहीं है या जो खर्च नहीं उठा सकते, उनके लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर नए मॉडल तैयार किए जा रहे हैं।

ग्रिड और वितरण कंपनियों की चिंता

ग्रिड पर दबाव और वितरण कंपनियों की हिचक को लेकर उठे सवालों पर मंत्री ने कहा कि यह बड़े बदलाव के दौरान आने वाली अस्थायी दिक्कतें हैं। सरकार उत्पादन के साथ भंडारण बढ़ाने, परियोजनाओं को जोड़ने और नई तकनीक से ग्रिड को मजबूत बनाने पर ध्यान दे रही है। उनका कहना है कि लक्ष्य एक मजबूत और भरोसेमंद बिजली व्यवस्था तैयार करना है, जो 2030 के लक्ष्य को हासिल कर सके।

Advertisement
First Published - February 25, 2026 | 3:03 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement