सरकार की तरफ से आईडीबीआई बैंक के नए खरीदार को मताधिकार में खास छूट मिलने के आसार नहीं हैं। हो सकता है कि संभावित खरीदार को बैंक में 50 फीसदी या अधिक हिस्सेदारी खरीदने की मंशा जताने के बाद भी नियामक द्वारा तय 26 फीसदी मताधिकार ही मिले।
यह मसला भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की प्रमुख चिंताओं में से एक है। केंद्रीय बैंक मानता है कि आरबीआई के मौजूदा दिशानिर्देशों के मुताबिक खरीदार के मताधिकार की सीमा 26 फीसदी होनी चाहिए, भले ही वह कितनी भी हिस्सेदारी खरीदे। एक अधिकारी ने कहा कि इस पर केंद्र ने सहमति जताई है। इस पर केंद्र और आरबीआई के बीच चर्चा हुई है। केंद्र सरकार आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक विनिवेश की बिक्री शर्तों को अंतिम रूप दे रही है और वह जल्द ही अभिरुचि पत्र आमंत्रित करेगी।
आरबीआई ने नवंबर 2021 में आंतरिक कार्यदल की सिफारिशें स्वीकार की थीं और 15 साल की लंबी अवधि में प्रर्वतकों की हिस्सेदारी की सीमा को निजी बैंकों के चुकता मत इक्विटी शेयरों की 15 फीसदी से बढ़ाकर 26 फीसदी कर दिया था। अधिकारी ने कहा कि मताधिकार की सीमा 26 फीसदी होगी, लेकिन प्रबंध नियंत्रण नए खरीदार को हस्तांतरित किया जाएगा। अगर सरकार और एलआईसी के पास शेष हिस्सेदारी रही तो भी वे बैंक के प्रबंधन में दखल नहीं देंगे। नए खरीदार को नए प्रबंधन, अहम कार्मिकों की नियुक्ति और बैंक में बेहतर प्रबंधन तरीकों को लागू करने की शक्तियां मिलेंगी।
अधिकारी ने कहा, ‘जिस तरह टाटा समूह को एयर इंडिया का नया प्रबंधन नियुक्त करने की छूट दी गई है, उसी तरह नए खरीदार को बैंक का सीईओ और शीर्ष अधिकारी नियुक्त करने में पूरी आजादी मिलेगी।’
केंद्र जल्द ही यह फैसला लेगा कि वह रणनीतिक विनिवेश के जरिये आईडीबीआई बैंक की कितनी हिस्सेदारी बेचेगा। इस समय आईडीबीआई बैंक के 45.48 फीसदी शेयर सरकार के पास और 49.24 फीसदी एलआईसी के पास हैं। इक्रा के उपाध्यक्ष अनिल गुप्ता ने कहा कि अगर कोई कंपनी बैंक की प्रवर्तक नहीं रह जाती है और उसकी हिस्सेदारी 15 फीसदी से अधिक बनी रहती है तो उसके (इस मामले में एलआईसी और सरकार) मताधिकार अधिकतम 15 फीसदी होंगे। गुप्ता ने कहा, ‘आईडीबीआई बैंक के नए प्रवर्तक को अधिकतम मताधिकार मिलेंगे, जिनकी सीमा 26 फीसदी होगी। नया खरीदार जमाकर्ताओं को कुछ सहजता मुहैया कराने के लिए सरकार और एलआईसी को बोर्ड में स्थान देने पर भी विचार कर सकता है।’
बैंक के संभावित ग्राहकों से संपर्क के बाद आरबीआई के साथ विचार-विमर्श करके हिस्सेदारी बिक्री की मात्रा का फैसला लिया जाएगा। सरकार इस ऋणदाता के विनिवेश के लिए रोड शो 25 फरवरी से शुरू कर रही है ताकि खरीदारों में शुरुआती रुचि की थाह ली जा सके।