भारतपे के सह-संस्थापक और पूर्व प्रबंध निदेशक अश्नीर ग्रोवर ने NCLT के समक्ष एक याचिका दायर की है। इस याचिका में उन्होंने फिनटेक फर्म के बोर्ड पर लगाए गए कुप्रबंधन और दमनकारी आचरण के आरोपों में छूट का अनुरोध किया है। ये आरोप खुद अश्नीर ने अपनी पिछली याचिका में लगाए थे।
इस पर राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की दिल्ली पीठ ने सोमवार को एक नोटिस जारी कर भारतपे और अन्य उत्तरदाताओं से जवाब मांगा। मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में होगी। ग्रोवर ने पिछले दिसंबर में कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 241 और 242 के तहत भारतपे ब्रांड नाम के तहत कारोबार करने वाली रेजिलिएंट इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड के बोर्ड पर दमनकारी आचरण और कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए NCLT के समक्ष एक याचिका दायर की थी।
अधिनियम की धारा 244 के तहत यह अनिवार्य है कि धारा 241 के तहत अपील दायर करने के लिए शेयरधारक के पास कंपनी के कम से कम 10 प्रतिशत शेयर होने चाहिए। इस धारा में NCLT को यह अधिकार भी दिया गया है कि इस संबंध में दायर की गई याचिका के लिए जरूरी सभी या किसी भी आवश्यकता से छूट दी जा सकती है।
ग्रोवर ने धारा 241 के तहत दायर अपनी याचिका में उन्हें कंपनी के प्रबंध निदेशक के रूप में बहाल करने और रेजिलिएंट इनोवेशन के बोर्ड में हुए बदलाव को अवैध घोषित करने की प्रार्थना की है। ग्रोवर ने बोर्ड द्वारा उनकी पत्नी माधुरी जैन की बर्खास्तगी को अवैध बताते हुए उसे रद्द करने की भी अपील की है।