facebookmetapixel
Advertisement
अगले हफ्ते शेयर बाजार में दिख सकता है बड़ा उतार-चढ़ाव, इन संकेतों पर निवेशकों की रहेगी नजर₹50 का मोटा डिविडेंड! गुरखा बनाने वाली कंपनी का बड़ा तोहफा, रिकॉर्ड डेट इसी हफ्तेप्राइमरी मार्केट में बंपर हलचल: 7 से 15 सितंबर के बीच खुलेंगे 11 IPOs, ₹7,055 करोड़ जुटाने की तैयारीविदेशी निवेशकों का बदला रुख, सितंबर के पहले हफ्ते में शेयर बाजार से निकाले ₹7,443 करोड़PM Kisan की 24वीं किस्त कब आएगी? जानें संभावित तारीख, पात्रता और e-KYC की पूरी जानकारीदेश भर में फिर सक्रिय हुआ मॉनसून, दिल्ली-NCR समेत कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारीपश्चिम एशिया में जंग फिर तेज: अमेरिका ने खार्ग द्वीप के पास ईरानी जहाजों को बनाया निशाना, ईरान ने भी दी चेतावनी4000 लोगों की जा सकती है नौकरी! JLR बड़ी छंटनी की तैयारी में, बढ़ते खर्च से कंपनी परेशानसुभाष चंद्रा की बढ़ीं मुश्किलें: CBI ने दर्ज की FIR, फर्जी कागज दिखाकर ₹1,322 करोड़ के फ्रॉड का आरोपएक शेयर पर ₹60 का मोटा डिविडेंड! पावर ट्रांसमिशन सेक्टर से जुड़ी कंपनी का तोहफा, रिकॉर्ड डेट फिक्स

मार्च में चाय पर पड़ी सूखे की मार, विशेषज्ञों ने बताई कैसी होगी पैदावार

Advertisement

इंडियन टी एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के चेयरमैन अंशुमान कनोरिया ने कहा कि पिछले साल की समान अवधि की तुलना में मार्च महीने में उत्पादन की पहली खेप में 80 प्रतिशत गिरावट की आशंका है।

Last Updated- April 07, 2024 | 10:04 PM IST
Tea

भारत के विभिन्न हिस्सों में मार्च में बदलते मौसम, शुष्क दौर, छिटपुट बारिश और मिट्टी का तापमान कम होने से चाय के उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है।

इंडियन टी एसोसिएशन (आईटीए) के अध्यक्ष हेमंत बांगड़ ने कहा कि अनुभवजन्य आंकड़ों से पता चलता है कि मार्च महीने में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में उत्तर भारत के चाय उत्पादन में 30 से 50 प्रतिशत की कमी आई है।

टी रिसर्च एसोसिएशन (टीआरए) का अनुमान है कि फरवरी और मार्च में उत्तर बंगाल में चाय उत्पादन 35 से 40 प्रतिशत कम हुआ है। टीआर के सेक्रेटरी जयदीप फूकन ने कहा, ‘ऊपरी असम में करीब 40 प्रतिशत कम उत्पादन हुआ है। शेष असम में 20 से 25 प्रतिशत की कमी आई है।’

उन्होंने कहा कि मार्च महीने का पूरा आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, हालांकि उत्तर भारत में फसल के उत्पादन में सुधार की उम्मीद है।

दक्षिण भारत में भी सूखे के कारण चाय की फसल पर असर पड़ा है। द यूनाइटेड प्लांटर्स एसोसिएशन ऑफ साउदर्न इंडिया (यूपीएएसआई) के सेक्रेटरी संजीत आर नायर ने कहा, ‘अगर स्थानीय स्तर पर हुई कुछ बूंदाबांदी को छोड़ दें तो पिछले 2-3 महीनों में कोई खास बारिश नहीं हुई है। मार्च में कृषि के हिसाब से जलवायु की स्थिति अनुकूल नहीं थी। सूखे जैसी हालत होने के कारण अप्रैल में भी फसल प्रभावित होने की आशंका है।’मार्च में भी फसल का उत्पादन कम था ।

उत्तर बंगाल और असम में भी बारिश कम हुई है। दार्जिलिंग में समस्या गंभीर रही है, जहां चाय उत्पादन के हिसाब से मार्च महीना कंपनियों के राजस्व के लिए अहम है। दार्जिलिंग चाय की पहली खेप फरवरी के अंत में तैयार होती है और यह मई के मध्य तक चलता है।

इंडियन टी एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के चेयरमैन अंशुमान कनोरिया ने कहा कि पिछले साल की समान अवधि की तुलना में मार्च महीने में उत्पादन की पहली खेप में 80 प्रतिशत गिरावट की आशंका है।

Advertisement
First Published - April 7, 2024 | 10:04 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement